सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार का टेलीकॉम कंपनियों को नोटिस, रात 11:59 तक बकाया रकम चुकाने को कहा

Share This :
, but before source link and author name, the post template would look like this:

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को शुक्रवार रात 11:59 बजे तक बकाया रकम का भुगतान करने को कहा है। दूरसंचार विभाग की तरफ से जारी आदेश में भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों से शुक्रवार की आधी रात से पहले पूरी रकम चुकाने को कहा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को हीटेलीकॉम कंपनियों से रिकवरी स्थगित करने पर दूरसंचार विभाग को फटकार लगाई थी। इसके बाद विभाग ने सर्कल और जोन के स्तर पर कंपनियों को बकाया रकम के डिमांड नोटिस भेजने शुरू कर दिए। इसी आदेश में उनसे रात 11:59 बजे तक बकाया भुगतान करने को कहा गया है।

1.47 लाख करोड़ रुपए के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टेलीकॉम कंपनियों और केंद्र के टेलीकॉम डिपार्टमेंट के रवैए पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ज्यादातर कंपनियों ने बकाया रकम जमा नहीं करवाई है। इस पर शीर्ष अदालत ने कंपनियों से पूछा कि क्यों ना आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘क्या इस देश में कोई कानून नहीं बचा? इस देश में रहने से बेहतर है कि इसे छोड़कर चले जाना चाहिए।’

23 जनवरीतक बकाया जमा करने के आदेश थे

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को आदेश दिया था कि टेलीकॉम कंपनियां 23 जनवरी तक बकाया राशि जमा करें। कंपनियों ने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और टाटा टेली ने भुगतान के लिए ज्यादा वक्त मांगते हुए नया शेड्यूल तय करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इसे भी खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की वजह?

दूरसंचार विभाग के राजस्व मामलों से जुड़े एक डेस्क ऑफिसर ने पिछले दिनों संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य अफसरों को लिखी चिट्‌ठी में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक टेलीकॉम कंपनियों पर कोई कार्रवाई न की जाए, भले ही वे एजीआर मामले में बकाया भुगतान नहीं करें।

दूरसंचार विभाग ने आदेश वापस लिया, सुप्रीम कोर्ट ने एक घंटे का वक्त दिया था

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद दूरसंचार विभाग ने यह आदेश वापस ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब हम पहले ही टेलीकॉम कंपनियों को भुगतान का आदेश दे चुके हैं, तब कोई डेस्क ऑफिसर ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकता है? हमें नहीं पता कि कौन माहौल बिगाड़ रहा है?क्यादेश में कोई कानून ही नहीं बचा है?कोई अधिकारी कोर्ट के आदेश के खिलाफ जुर्रत कर सकता है तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थीकि अगर इस अफसर ने एक घंटे के अंदर आदेश वापस नहीं लिया तो उसे जेल भेजा जा सकता है। कंपनियों ने एक पैसा भी नहीं चुकाया और आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक चाहते हैं?

टेलीकॉम कंपनियों के एमडी को 17 मार्च को पेशी के आदेश

जिन टेलीकॉम कंपनियों पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के आधार पर स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस के1.47 लाख करोड़ रुपए बकाया हैं, उनमें से सिर्फ रिलायंस जियो ने करीब 195 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया है। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, एमटीएनएल, बीएसएनएल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा टेलीकम्युनिकेशंस और अन्य के मैनेजिंग डायरेक्टर्स से 17 मार्च को पेश होने को कहा है।

एजीआर : सरकार और कंपनियों का कैलकुलेशन अलग-अलग था, इसलिए विवाद शुरू हुआ
टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच पिछले 14 साल से एजीआर को लेकर विवाद था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले टेलीकॉम ट्रिब्यूनल ने 2015 में टेलीकॉम कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन कोर रिसोर्सेस से मिली रकम को छोड़कर बाकी रेवेन्यू एजीआर में शामिल होगा। विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) एडजस्टमेंट को भी एजीआर में शामिल किया गया। हालांकि, फंसे हुए कर्ज, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कबाड़ की बिक्री को इससे अलग रखा गया। विवाद इसलिए था क्योंकि सरकार किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट और कबाड़ बेचने से मिलने वाली रकम को भी एजीआर में शामिल करती है। 24 अक्टूबर 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की गणना को ही सही माना था। टेलीकॉम कंपनियों को इसी आधार पर ब्याज और पेनल्टी समेत बकाया फीस चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों को एजीआर का 3% स्पेक्ट्रम फीस और 8% लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है।

1.47 लाख करोड़ में से किस कंपनी पर कितना बकाया

कंपनी बकाया (रुपए)
वोडाफोन-आइडिया 53,038 करोड़
भारती एयरटेल 35,586 करोड़
टाटा टेली 13,823 करोड़
रिलायंस जियो, रिलायंस कम्युनिकेशंस, बीएसएनएल, एमटीएनएल और अन्य परबकाया 45,000 करोड़
सभी कंपनियों पर ब्याज और पेनल्टी समेत कुलबकाया 1,47000 करोड़
रिलायंस जियो ने चुकाए -195 करोड़
अब बाकी कंपनियों पर बकाया 1,46,805 करोड़

एयरटेल को छोड़ बाकी टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों में 23% तक गिरावट

कंपनी शेयर में गिरावट
वोडाफोन-आइडिया 23.21%
भारती इन्फ्राटेल 4.04%
रिलायंस कम्युनिकेशंस 4.11%
टाटा टेली 9.89%

(एयरटेल का शेयर4.69% फायदे में रहा)

टेलीकॉम सेक्टर पर इस वक्त सबसे ज्यादा खतरा: एनालिस्ट
कंसल्टिंग फर्म कॉम फर्स्ट इंडिया के डायरेक्टर महेश उप्पल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टेलीकॉम इंडस्ट्री की स्थिति खराब होगी। वोडाफोन-आइडिया की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ेंगी। विश्लेषकों का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर में दो कंपनियों का दबदबा होनेका जोखिम इस वक्त सबसे ज्यादा है। अभी भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो बाजार में हैं। एजीआर मामले में वोडाफोन-आइडिया पर 53,000 करोड़ कीदेनदारी है। कंपनी पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि राहत नहीं मिली तो कारोबार बंद करना पड़ सकता है। दिसंबर तिमाही में वोडाफोन-आइडिया कोको 6,439 करोड़ का घाटा हुआ है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Go to Source
Author:

Author: newsnet

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *