राज्य को 23 हजार करोड़ रु. का नुकसान किसान, मनरेगा व वेतन पर ही बजट खर्च करेगी सरकार

जाॅन राजेश पाॅल |लाॅकडाउन के कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति का साइकिल गड़बड़ा गया है। लगभग 23 हजार करोड़ के नुकसान का आंकलन है। वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून तक के तीन माह को राज्य की कमाई का सीजन माना जाता है, लेकिन यही लॉकडाउन की बलि चढ़ गया। व्यापार बंद रहने से इसमें भारी गिरावट आ रही है। बंद की वजह से खनिज दोहन, शराब की बिक्री बंद होने से इससे मिलने वाले मुनाफे पर बड़ा असर पड़ा है। सरकार ने घाटे और मुनाफे की कमी को लेकर बड़ा होमवर्क किया है। सरकार का अनुमान है कि कुल वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही 25 फीसदी तक राजस्व कलेक्शन आ जाता है। लेकिन इसमें 15 से 18 प्रतिशत तक कमी आई है। इस तरह पूरे वर्ष में 30 फीसदी तक कमी हो सकती है, क्योंकि कोरोना का असर सालभर रहने की संभावना है।
जानकार यह भी कहते हैं कि स्थिति बिगड़ी तो इसमें और इजाफा हो सकता है और संभली तो कुछ घाटा 23 हजार से कम होकर 25 फीसदी तक आ सकता है। सरकार बजट का टारगेट 10 फीसदी तक अधिक रखती है। सामान्यतया हर साल राजस्व कलेक्शन दस फीसदी तक कम और खर्च भी 15 फीसदी तक कम हो पाता है। इस वजह से 23 हजार करोड़ रुपए का नुकसान आंका गया है।

इसीलिए मांगे हैं 30 हजार करोड़

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 30 हजार करोड़ रुपए मांगे हैं। उसे आशंका है कि कोरोना के चलते उसकी राजस्व प्राप्तियों में 23 हजार करोड़ रुपयों की गिरावट आ सकती है। उसका इस साल बजट एक लाख दो हजार करोड़ रुपए का है। इस बजट में पेश की गई योजनाओं, घोषणाओं और जरूरतों को पूरा करने और राजस्व के घाटे को पूरा करने के लिए ही सरकार को बड़े फंड की जरूरत है। इस वजह से सरकार मितव्ययिता का रास्ता अपना रही है। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार केंद्र सरकार से 30 हजार करोड़ रुपए के अलावा केंद्र से राज्य को मिलने वाली परंपरागत मदों जैसे टैक्स, सीएसआर व खनिज रायल्टी, कैंपा, मनरेगा की राशि आदि की मांग कर रहे हैं। इधर, राज्य सरकार ने विभागों को भी पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है कि बजट में शामिल उनकी किन योजनाओं व घोषणाओं को डिले किया जा सकता है, फिलहाल रोका जा सकता है। यह भी कि किन योजनाओं, घोषणाओं व कामों के लिए हर हाल में रुपयों की जरूरत होगी ही। इसकी जानकारी सभी विभाग, वित्त विभाग को बता रहे हैं।
इन विभागों में खर्च ज्यादा
कृषि, ऊर्जा , पंचायत, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, ट्राइबल, महिला बाल विकास, समाज कल्याण, वन विभाग आदि। इनमें से ज्यादातर विभाग ऐसे हैं जिनसे आय की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ये खर्चीले विभाग हैं। जिनको सिर्फ पैसा देना पड़ता है।
खर्च में प्राथमिकताएं

  • बिलों पर सब्सिडी पर बड़ा खर्च
  • उपकरणों सब्सिडी, बोनस, धान खरीदी, जीरो फीसदी ऋण। खाद, बीज व दवाओं पर खर्च।
  • मनरेगा पर खर्च, साल में कम से कम 150 दिन का काम राज्य सरकार अपनी ओर से देती है।
  • तनख्वाह, हास्टल, ड्रेस, कापी, किताब, स्कालरशिप, साइकिल, भोजन आवास आदि पर खर्च।
  • पुलिस के इंफ्रास्ट्रक्चर और वेतन पर।
  • वेतन-भत्ते और अन्य स्थापना व्यय।


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23 thousand crores to the state. Government will spend budget on farmers, MNREGA and salary

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