किसानों ने पिछले साल से 73% ज्यादा खाद-बीज का कर लिया स्टॉक

लॉकडाउन में छूट का असर इस बार खेती-किसानी में जबर्दस्त देखा जा रहा है। आमतौर पर मानसून के बाद ही खाद और बीज उठाव करने किसान ज्यादा आते हैं लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि किसानों ने पिछले पुराने सालों के रिकार्ड तोड़ दिए।
37 दिन में ही किसानों ने पिछले साल की तुलना में 73 प्रतिशत खाद और 75 प्रतिशत बीज का ज्यादा उठाव कर लिया। किसानों को ऐसी आशंका है कि आगे चलकर खाद व बीज का संकट पैदा हो सकता है और इससे दाम भी बढ़ेंगे। दुर्ग जिले में 59 सहकारी समितियों के माध्यम से जिले के 1 लाख 27 हजार 576 किसानों को खरीफ सीजन के लिए खाद व बीज मुहैया करवाई जाती है। एक अप्रैल से किसानों को खाद व बीज देने का सिलसिला शुरू होता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
जिला कोरोना संक्रमण के चलते रेड जोन में था इसलिए खाद-बीज का वितरण 15 अप्रैल के बाद किया जा सका। जैसे ही कृषि क्षेत्र में यह छूट मिली किसान बड़ी संख्या में खाद व बीज का उठाव करने पहुंच रहे हैं। जिससे स्टाक लगातार बढ़ते जा रहा है।
किसानों को फायदा: अधिकारियों का दावा है कि आने वाले फसल में किसानों को लाभ होगा। किसान कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
इस तरह किसान कर रहे हैं खाद-बीज का ज्यादा स्टॉक: किसानों ने पिछले साल एक अप्रैल से 20 मई तक 4027 मिट्रिक टन खाद खरीदी की थी। यानी 51 दिनों में इतना खाद बिका। इस बार 12 हजार 660 मिट्रिक टन खाद किसान 20 मई तक खरीद चुके हैं और वह भी 15 अप्रैल के बाद से। इस तरह पिछले साल की तुलना में 8633 मिट्रिक टन किसानों ने ज्यादा उठाए हैं। जो पिछले साल से 73 प्रतिशत ज्यादा है। इसकी वजह मूल्य का बढ़ना भी है।
खाद व बीज संकट का अंदेशा: लॉकडाउन के दौरान जिस तरह से नमक व दूसरी अन्य चीजों की कमी देखने मिली वैसे आगे चलकर कहीं खाद व बीज का संकट न खड़ी हो जाए। इसलिए किसान आशंकित हैं और वे सोसायटी से खाद व बीज का बड़े पैमाने पर उठाव करने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि अभी सरकारी रेट पर सोसायटी से खाद व बीज मिल रहे हैं। फैक्ट्रिरियां बंद रही और कम मजदूरों के साथ इसे अभी चालू किया गया है।
14639 क्विंटल धान बीज की खरीदी अधिक: किसानों ने पिछले साल 4957 क्विंटल प्रमाणिक धान बीज सोसायटियों से खरीदे थे। इस बार 19 हजार 650 क्विंटल धान बीज अब तक किसान ले जा चुके हैं। इस तरह पिछले साल की तुलना में 14 हजार 639 क्विंटल बीज का उठाव अभी से कर लिया है। यह उठाव पिछले साल की अपेक्षा 75 प्रतिशत ज्यादा है। इसलिए खाद और बीज लेने टूट पड़े हैं किसान। संकट न हो इसके लिए भी ऐसा हो रहा है।
कोरोना का भय अब भी किसानों में: जिस तरह से कोरोना संक्रमित मरीज गांवों में भी मिलने लगे हैं। उससे भी किसान चिंतित हैं। हर पंचायतों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए है। दीगर राज्यों से मजदूर यहां क्वारेंटाइन किए गए हैं। इसलिए गांवों में भी संक्रमण का खतरा किसान महसूस करने लगे हैं। उनका गांव इस समस्या में फंस सकता हैं और लॉक डाउन भी हो सकता है। इस स्थिति में खाद-बीज की समस्या से जूझना पड़ सकता है।



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