क्वारेंटाइन सेंटर में हंगामा करने वाले 42 लोगों को शिफ्ट किया

जिले में 135 क्वारेंटाइन सेंटर संचालित हैं। इसमें 107 ग्रामीण क्षेत्र व 28 शहरी क्षेत्र व सार्वजनिक उपक्रम के हैं। सेंट्रल स्कूल गोपालपुर में सबसे अधिक 304 लोगों को क्वारेंटाइन किया गया था। जिसमें राजधानी एक्सप्रेस से आने वाले समान्य लोग भी थे। कुछ लोग कभी भोजन में खराबी तो कभी रोटी की बात को लेकर हंगामा करते थे।
ऐसे लोगों में से 20 को छुरी तो 22 को पोड़ी उपरोड़ा क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया है। अब यहां 262 लोग बचे हैं जो दूसरे राज्यों से आए हैं। इधर ग्रामीण क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटर में पंचायत ही भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। सरपंचों का कहना है कि इसके लिए अभी हमें कोई फंड नहीं मिला है। उधार में राशन लेकर चावल खिला रहे हैं। क्वारेंटाइन सेंटर में प्रवासी मजदूरों को सुबह नाश्ता व चाय दिया जाता है। इसके बाद दोपहर में भोजन व रात में फिर भोजन दिया जा रहा है। भोजन में दाल, चावल व सब्जी दी जा रही है। सेंटर में भोजन पकाने वाले स्व सहायता समूहों का कहना है कि जो हमें पकाने के लिए दिया जाता है उसे ही हम पकाकर खिला रहे हैं। सेंटर में तैनात अधिकारियों का कहना है कि अब तक अलग से कोई मेन्यू नहीं आया है। समान्य तौर पर दाल चावल सब्जी दे रहे हैं। कई लोगों ने रोटी की मांग की लेकिन सभी को उपलब्ध कराना मुश्किल है। अगर कोई बीमार या गर्भवती है तो उसे अलग से सेंटर में रखा जा रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक है। इसके बाद भी कई लोग सिगरेट या तंबाकू की मांग भी करते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल स्कूल में एसएफ के जवान तैनात हैं। साथ ही बाकी केन्द्रों में भी बाहर कोई भी नहीं जा सकता। इसके लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
मजदूरों के लिए भोजन, पानी की सुविधा पर्याप्त: प्रभारी
सेंट्रल स्कूल क्वारेंटाइन सेंटर के प्रभारी व पीएचई के ईई समीर गौड़ का कहना है कि मजदूरों के लिए पर्याप्त भोजन व पानी की व्यवस्था है। कहीं कोई समस्या नहीं है। समय पर नाश्ता व भोजन दिया जा रहा है। कुछ लोगों को दूसरे जगह पर शिफ्ट किया गया है, यह प्रशासन का निर्णय है।



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कमरे में अलग-अलग रहना तो दूर सब समूह में ही रहते हैं। इसलिए बीमारी बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है।

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