वट को अक्षय वृक्ष कहा जाता है, इसकी पत्ती, जटा, छाल, जड़ और मिट्टी में है कई रोगों की दवा

वृट वृक्ष को अक्षय वृक्ष कहा जाता है। प्राचीन ग्रंथ वेद, पुराण, रामायण और महाभारत में 40 वृक्ष का वर्णन किया गया। इनमें वटवृक्ष को सर्वोपरि रखा गया है। इस वृक्ष की जटाएं, छाल, जड़, मिट्टी, दूध और इसके पत्ते कई रोगों की दवा के रूप में काम आते हैं। शुक्रवार को महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा और वट वृक्ष की पूजा की। कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए फिजिकल डिस्टेंस का पालन भी किया।
दूधेश्वर महादेव – यहां का वट वृक्ष 500 साल से ज्यादा पुराना, तभी से हो रही पूजा
दूधाधारी मठ के सामने स्थित तालाब के पार पर दूधेश्वर महादेव की स्थापना की गई है। यहीं वट का एक वृक्ष है जो करीब 500 साल पुराना है। मठ के महंत राजेश्री डॉ. रामसुंदर दास बताते हैं कि तभी से यहां हर वट सावित्री पर पूजा होती आई है। इस बार पति की लंबी उम्र की कामना से महिलाओं ने वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
1. वट की जटा और छाल का चूर्ण दंत मंजन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से दांतों से संबंधित सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसके अलावा जटाओं को पीसकर लेप लगाना त्वचा के लिए लाभकारी है।
2. वट का दूध लगाने से गांठ बैठ जाती है। यही दूध लगाते रहने से गांठ का घाव भी भर जाता है। अधिक देर पानी में रहने से त्वचा पर होने वाले घाव इसके दूध से ठीक हो जाते है। नाभि में लगाने से अतिसार (डायरिया) में लाभ होता है।
3. बरगद के नीचे की मिट्टी बहुत उपजाऊ मानी जाती है। पक्षियों की बीट मिट्टी में मिलकर उर्वरक बनाती है।
4. पत्तों को तेल में पकाकर बालों में लगाने से सभी विकार दूर होते हैं। मुदी चोट पर भी पत्ते अधिक फायदा करते हैं। पत्ते के चिकने हिस्से पर तेल या घी लगाकर आग में सेंककर रात को बांधे, दर्द से राहत मिलती है।
5. इसकी छाल को छाया में सुखाकर, इसके चूर्ण का सेवन मिश्री और गाय के दूध के साथ करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा आयुर्वेदिक दवा कंपनियां भी कई बीमारियों की दवा बनाने में इसका इस्तेमाल करती हैं।
6. जड़ का चूर्ण लस्सी के साथ पीने से नकसीर में लाभ होता है। इसका धार्मिक महत्व भी माना गया है।



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लाॅकडाउन की वजह से घर में मास्क पहन पूजा।

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