छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मेनन ने कहा- कोरोना के दौर में यह एक नोबेल विचार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन ने कहा कि नोवल कोरोनावायरस के इस कठिन दौर में ई-लोक अदालत एक नोबल विचार है। इससे एक ओर जहां केसोें की पेंडेंसी कम की जा सकेगी, वहीं पक्षकारों को भी राहत पहुंचेगी। चीफ जस्टिस शनिवार को ई-लोक अदालत के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर की ओर से शुरू की गई इस कोशिश में चीफ जस्टिस मेनन ने कहा-कोरोना के चलते किए गए लाॅकडाउन में सार्वजनिक विभाग ठीक से काम नहीं कर पाए। न्याय व्यवस्था भी इससे प्रभावित हुई है। अधिवक्ता और पक्षकार भी कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

काेरोनाकाल में 5212 केस फाइल हुए, 3956 मामलों का निपटारा

जस्टिस मेनन ने कहा-ग्रीष्मकालीन अवकाश को रद्द करने का निर्णय लिया गया और हम सप्ताह के अंत तक कार्य करते रहे। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में 5212 से ज्यादा केस फाइल किए गए।हाईकोर्ट में 3956 मामलों का निपटारा किया गया। निराकृत मामलों में बड़ी संख्या ऐसी थी जिन पर पिछले 5 सालों से ज्यादा समय से सुनवाई चल रही थी।

साल 2019 में हाईकोर्ट में 45 हजार मामले फाइल हुए

जस्टिस मेनन ने कहा किजिला और निचले अदालतों में भी अच्छा काम हुआ। उन्होंने बताया कि साल 2019 में अकेले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 45 हजार से अधिक मामले फाइल किए गए। इनमें से 39 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। वहीं2020 में जनवरी से लेकर मार्च तक 10639 मामले दायर हुए और 8736 मामलों में फैसला दिया गया।

उन्होंने कहा,ई-लोक अदालत प्रदेश भर में लगाई जा रही है, यह अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। लाॅकडाउन के कारण जब सभी आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, इससे न्यायिक क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा। ऐसी स्थिति में ई-लोक अदालत एक प्रयास है।हम मुकदमे से जुड़े लोगों की तकलीफें कुछ कम कर सकें।

जस्टिस मिश्रा ने कहा, ये एेतिहासिक मौका, 195 बेंच में 3133 मामले सुने जा रहे

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा,ये ऐतिहासिक मौका है जब वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश भर की अदालतों में समझौते कर मुकदमों का निपटारा किया जा रहा है। इसके माध्यम से गरीब लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास है।

जस्टिस मिश्रा ने बताया कि ई-लोक अदालत निर्बाध रूप से चले, ये सुनिश्चित करने के लिये सभी जिलों की अदालतों को प्राधिकरण की ओर से अतिरिक्त डेटा उपलब्ध कराया गया है। ई-लोक अदालत में 23 जिलों के 195 बेंच में 3133 मामले सुने जा रहे हैं। हाईकोर्ट में भी दो बेंच लगी है।

बिना कोर्ट गए एक-दूसरे से जुड़े पक्षकार

छत्तीसगढ़ में पहली बार राज्य स्तरीय ई-लोक अदालत शनिवार को हुई।देश के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार है, जब लोक अदालत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुईहै। इसमें पक्षकार और वकील को कोर्ट आने की जरूरत नहीं होगी। घर में बैठे पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से मामलों का निराकरण किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के 3000 से अधिक पक्षकार ऑनलाइन जुड़ेंगे।

हाईकोर्ट सहित सभी जिला और तहसील कोर्ट में होगा आयोजन
जस्टिस मिश्रा ने बताया कि समझौता योग्य प्रकरणों, पारिवारिक मामले, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस के प्रकरण संबंधी मामले लोक अदालत के माध्यम से निराकृत हो जाते है। कोरोना संक्रमण के चलते जब लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तो ऐसे मामलों के निराकरण के लिए हाईकोर्ट और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने ई-लोक अदालत लगाने का निर्णय लिया है। इसका आयोजन हाईकोर्ट के साथ सभी जिला और तहसील कोर्ट में होगा।

पक्षकारों को दिया गया लिंक, वॉट्सएप से भी जुड़ सकेंगे
जस्टिस मिश्रा ने बताया कि पक्षकारों की ओर से ई-लोक अदालत के जरिएसमझौते के लिए जब फार्म भरे गए, उसी समय उन्हें लिंक उपलब्ध कराया गया। इस लिंक के जरिए वीडियो कांफ्रेंसिंग में कोर्ट से जुड़ सकेंगे। पक्षकारों और वकीलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिएयदि जुड़ने में दिक्कत होगी तो उन्हें यह भी सुविधा दी गई है कि वे वॉट्सएप वीडियो कॉल कर अपना पक्ष रख सकेंगे। सफल रहा तो आगे भी जारी रहेगा।



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देश में पहली बार राज्य स्तरीय ई-लोक अदालत लगाई गई। इसमें 23 जिलों के 200 से ज्यादा खंडपीठों में 3 हजार से ज्यादा मामलों की सुनवाई होगी। उद्घाटन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रामचंद्र मेनन ने किया।

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