एक समय में 32 लोगों को ही प्रवेश, हर विजिटर का नाम-नंबर कर रहे नोट, यहां घूमने की समय-सीमा 60 मिनट

संस्कृति विभाग कैंपस में संचालित राज्य का सबसे बड़ा म्यूजियम महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय लगभग साढ़े तीन महीने बाद मंगलवार से लाेगाें के लिए खाेल दिया गया। काेराेना संक्रमण से बचने के लिए यहां कई बड़े बदलाव किए गए हैं। दिनभर में दाे बार म्यूजियम काे पूरी तरह सैनिटाइज किया जा रहा है। हर व्यक्ति की दाे बार थर्मल स्क्रीनिंग और हैंड सैनिटाइज किया जा रहा है। सबसे पहले कैंपस में प्रवेश करते ही गार्ड रजिस्टर में नाम, माेबाइल नंबर और पता जैसी काॅन्टैक्ट डिटेल लिख रहे हैं और थर्मल स्क्रीनिंग व हैंड सैनिटाइज कर रहे हैं। इसके बाद म्यूजियम में एंट्री देने से पहले दाेबारा थर्मल स्क्रीनिंग और हैंड सैनिटाइज करवा रहे हैं। एक समय में अधिकतम 32 लाेगाें काे प्रवेश दिया जा रहा है। पहले एक समय में 100 लाेग म्यूजियम विजिट कर सकते थे। यहां घूमने की अधिकतम समय-सीमा 60 मिनट है। जिनमें काेराेना के लक्षण हैं, उनके प्रवेश पर पाबंदी है। संग्रहालय सुबह 10 से शाम 5 बजे खुला रहता है।
महंत घासीदास संग्रहालय, दाेपहर 03:40 बजे
मास्क नहीं था तो स्कार्फ बांधकर लिया प्रवेश

शालिनी देवी संस्कृति विभाग परिसर में संचालित हाेने वाले गढ़कलेवा पहुंचीं। यहां उन्हें पता चला कि आज संग्रहालय शुरू हाे रहा है। अचानक मूड हुआऔर वाे संग्रहालय पहुंच गई। उन्हाेंने मास्क नहीं पहना था। स्टाफ ने मास्क के बिना एंट्री देने से मना कर दिया तो उन्होंने स्कार्फ बांधकर एंट्री ली। ग्राउंड फ्लाेर में उन्हाेंने मूर्तियां छूने की काेशिश की ताे केयर टेकर ने तुरंत राेकते हुए कहा कि कुछ भी छूने की अनुमति नहीं है। आप सिर्फ देख सकती हैं। लगभग आधे घंटे तक शालिनी म्यूजियम में रहीं।

म्यूजियम में किए गए हैं ये बड़े बदलाव

  • म्यूजियम के ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर में कुल आठ कमरे हैं। हर कमरे के लिए एक केयर टेकर नियुक्त किया गया है।
  • एक कमरे में एक समय में अधिकतम चार लोगों को एंट्री दी जा रही है।
  • ग्रुप एंट्री के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। पहले 25 लाेगाें के ग्रुप काे प्रवेश दे देते थे, अब सिर्फ चार लाेगाें के ग्रुप काे प्रवेश की अनुमति है।
  • सीसीटीवी कैमरे के अलावा केयर टेकर भी लोगों पर नजर रख रहे हैं, ताकि कोई शख्स किसी सामान को न छुए।
  • एक व्यक्ति अधिकतम 60 मिनट म्यूजियम घूम सकता है।
  • ग्रुप फोटो लेना और वीडियो शूटिंग भी प्रतिबंधित है।
  • बच्चों और बुजुर्गों का प्रवेश प्रतिबंधित
  • म्यूजियम में किसी काे कुछ भी खाने की अनुमति नहीं है।
  • इस महीने के अंत तक यहां ऑनलाइन टिकट सिस्टम से एंट्री शुरू कर दी जाएगी।

टच स्क्रीन है बंद :संग्रहालय के ग्राउंड फ्लोर में टच स्क्रीन मशीन लगी है। म्यूजियम में प्रदर्शित हर दुर्लभ वस्तु काे इस स्क्रीन पर देखने की सुविधा है। उस वस्तु से जुड़ी राेचक जानकारी ऑडियाे के माध्यम से सुन भी सकते हैं। छूने से ऑपरेट हाेने वाली इस टच स्क्रीन मशीन काे संक्रमण के खतरे की वजह से फिलहाल बंद रखा गया है।

ये देश के सबसे पुराने 10 म्यूजियम में है शामिल

  • 1875 में महंत घासीदास ने घड़ी चौक के पास संग्रहालय बनवाया था। ये जहां अभी संचालित है उस भवन का उद्‌घाटन 21 मार्च 1953 काे देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था।
  • संग्रहालय में 17 हजार 279 पुरावशेष एवं कलात्मक सामग्रियां हैं। इसमें शैव, वैष्णव, जैन धर्म की लगभग 70 से ज्यादा दुर्लभ प्रतिमाएं भी शामिल हैं।
  • यहां 8 वीथिकाएं हैं, जिसमें कौशल दीर्घा (प्रवेश दीर्घा), पुरातत्व दीर्घा, प्रतिमा (कल्चुरि) दीर्घा, शिलालेख दीर्घा, प्राकृतिक वन्य प्राणी एवं अस्त्र शस्त्र दीर्घा, पेंटिंग दीर्घा, लोक संस्कृति दीर्घा, आदिवासी दीर्घा शामिल है।


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Only 32 people enter at a time, the notes doing the name-number of every visitor, the time limit to roam here is 60 minutes

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