गांव की महिलाएं बना रहीं बांस और गोबर की राखियां, बच्चों के लिए कार्टून और बड़ों के लिए मॉडर्न डिजाइन का दे रहीं लुक

जिले की स्व सहायता समूह की महिलाएं गोबर और बांस से राखियां बना रही हैं। यह पहला मौका होगा जब बाजार में इस तरह की अनूठी राखियां मिलेंगी। इन राखियों को बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इनकी सराहना की है। मुख्यमंत्री की तारीफ से उत्साहित महिलाएं चार तरह की राखियां बना रही हैं। ये राखियां आद्य बंधन नाम से तैयार की जा रहीं हैं। इनमें बच्चों के लिए राखियां, बांस की राखियां, गोबर की राखियां और भाई-भाभी के लिए कुमकुम-अक्षत बंधन राखियां बनाई जा रही हैं। इन राखियों को बाजार में 20 रूपए से लेकर 200 रूपए तक बेचा जाएगा।

जिला पंचायत सी.ई.ओ. नम्रता गांधी ने बताया कि कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य के निर्देश पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बिहान योजना के तहत यह काम हो रहा है। जिले के छाती गांव स्थित मल्टी युटिलिटी सेंटर में महिलाओं को इस तरह की राखी बनाना सिखाया गया था। नगरी विकासखण्ड के छिपली और कुरूद के नारी गांव के कुल 20 समूहों की 165 महिलाएं अब राखी तैयार करने में जुट गई हैं। इन समूहों को अब तक 1200 नग राखियों के लिए ऑर्डर मिल चुका है।

महिलाएं इस तरह की राखी बना रही हैं। जिले में कई तरह स्टॉल लगाकर इन राखियों को बेचा जाएगा।
महिलाएं इस तरह की राखी बना रही हैं। जिले में कई तरह स्टॉल लगाकर इन राखियों को बेचा जाएगा।

इन राखियों की खासियत यह है कि बच्चों की राखी को क्रोशिया के एम्ब्रायडरी धागों से तैयार किया जा रहा है, जिसे ओज राखी का नाम दिया गया है। इसमें मुलायम इरेजर, शार्पनर, की-चेन, छोटा भीम, गणेशा, सेंटाक्लॉज जैसे डिजाइंस शामिल हैं। बांस के बीज से राखियां बनाई जा रही हैं। ननद-भाभी की भी राखियां बन रहीं हैं। कुमकुम-अक्षत और बांस को मिलाकर इन राखियों को तैयार किया जा रहा है। चूंकि इस तरह की राखियों का कॉसेप्ट नया है इसलिए लोगों का रिस्पॉन्स भी अच्छा है। जिला प्रशासन इन राखियों की मार्केटिंग में भी मदद करेगा ताकि महिलाओं के आय के जरिए को बढ़ाया जाए।



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तस्वीर धमतरी के छाती गांव की है। महिलाएं पिछले कुछ दिनों से इस काम में जुटी हुई हैं। इन प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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