सावन की जलधारा में शिव का अलौकिक श्रृंगार

शिवजी की आराधना का पर्व सावन सोमवार से शुरू हो गया है। वैसे तो शिव की पूजा के लिए हर दिन श्रेष्ठ है, लेकिन सावन खास है। इस महीने में दर्शन-पूजन से ज्यादा महत्व जलाभिषेक का माना गया है। पर कोरोना के चलते फिलहाल मूर्तियों को स्पर्श करने पर पाबंदी है। ऐसे में शिवजी का जलाभिषेक कैसे करें? भक्तों की इसी दुविधा को दूर करते हुए महादेवघाट स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर में पंजीयन कर जलाभिषेक किया जा रहा है। यहां सोमवार को 100 से ज्यादा भक्तों के नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए भगवान का जलाभिषेक किया। इसके बाद बाबा हटकेश्वरनाथ ने तिरंगे का त्रिपुंड लगाकर भक्तों को दर्शन दिए। दिनभर में 5 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ भगवान के दर्शन किए।

सबसे ऊंची शिव प्रतिमा के सामने विराजे नर्मदेश्वर
मोतीबाग के पास बैजनाथ धाम में 51 फीट ऊंची शहर की सबसे बड़ी शिव प्रतिमा बनकर तैयार है। पहले सावन सोमवार को नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग की स्थापना कर धाम भक्तों के लिए खोल दिया गया। इससे पहले पंडितों और मंदिर समिति के सदस्यों ने जलाभिषेक किया। इस दौरान घनश्याम चौधरी, श्याम चावला, मनोज प्रजापति, विश्वदिनी पांडेय आदि मौजूद रहे।
100 भक्तों ने कराया हटकेश्वरनाथ का जलाभिषेक
पुजारी सुरेश गिरी गोस्वामी ने बताया कि पहले सावन सोमवार को 6 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। जिन 100 भक्तों ने पंजीयन कराया था, उनके नाम से सुबह भगवान का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद फिजिकल डिस्टेंसिंग रखते हुए भक्तों को बारी-बारी दर्शन करने दिया गया। हर भक्त की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। मास्क पहनकर आए लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

चांदी के आभूषण पहन बूढ़ेश्वर ने दिए दर्शन
बूढ़ापारा स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में पहले सावन सोमवार को भगवान का चांदी के आभूषणों से शृंगार किया गया। राजकुमार व्यास ने बताया कि पहली बार सावन सोमवार के दिन सिर्फ 300 भक्त ही मंदिर पहुंचे। फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ सबने दर्शन किया। जलाभिषेक की अनुमति नहीं है।



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Shiva’s supernatural adornment in the spring

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