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कोयला खदानों में ब्लास्टिंग से 100 करोड़ की शुगर मिल पर संकट, तेज कंपन से दीवारों में आ रहीं दरारें


लव दुबे। प्रतापपुर क्षेत्र के केरता इलाके की कोयला खदान में उत्खनन के लिए ब्लास्टिंग से 100 करोड़ से अधिक की लागत से स्थापित केरता शुगर मिल पर संकट खड़ा हो गया है। ब्लास्टिंग जब होती है तब मिल तक तेज कंपन होता है। इससे मिल की दीवारों में दरारें आ गईं हैं। वहीं खेतों में सिंचाई के लगे बोरवेल ब्लास्टिंग से धंस रहे हैं।
शुगर मिल प्रबंधन और ग्रामीण इस पर कई बार आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान को रोकने कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। सुबह 11 बजे से बजे दोपहर 3 तक ब्लास्टिंग के लिए समय निर्धारित है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी अपनी सुविधा से शाम 6 बजे तक ब्लास्टिंग करा रही है। भास्कर ने इन इलाकों की पड़ताल की तो शुगर मिल के साथ आसपास के घरों में दरारें मिली। शुगर मिल प्रबंधन इससे चिंतित है, वहीं ग्रामीण डरे हुए हैं। मिल के कर्मचारियों ने कहा कि ब्लास्टिंग से जब कंपन होता है, तो शुगर मिल के शेड टूटकर गिरने लगते हैं। इससे कर्मी कई बार घायल हो चुके हैं। वहीं जगन्नाथपुर निवासी राजनाथ, संतलाल, बलरामप, श्रीचंद और पंपापुर निवासी पुरण, गणेशराम, श्यामलाल, नारायाण सिंह, संदीप ने बताया खेती के लिए उधार लेकर बोर कराए थे, लेकिन कुछ माह में ब्लास्टिंग से धंस गया। शिकायत की गई लेकिन न मुआवजा मिला और न ही ब्लास्टिंग बंद हुई।

बोर धंसने से 30 लाख से अधिक का हाेता है नुकसान
खदानों में ब्लास्टिंग से सबसे अधिक नुकसान किसानों का हो रहा है। खेतों में सिंचाई के लिए लगाए गए बोरवेल ब्लास्टिंग के कंपन से धंस रहे हैं। केरता, पक्षीडांड, जगन्नाथपुर, पंपापुर इलाके में ही 60 बोर धंस चुके हैं। एक बोर पर 50 से 60 हजार खर्च होता हैं। बोर के साथ मोटर जमीन के भीतर धंस जाती है। क्षेत्र में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है और सिंचाई के लिए खेतों में बोरवेल लगाते हैं।

4 किलोमीटर के दायरे में 2 खदानें
केरता इलाके में महान 3 के अलावा 4 किलोमीटर के दायरे में महान 2 कोयला खदान भी है। महान-2 खदान में ब्लास्टिंग से लोग पहले से ही परेशान थे। महान-3 शुरू होने के बाद खतरा और बढ़ गया है। महान-3 खुली खदान है।

हैवी ब्लास्टिंग इसलिए हो रहा है नुकसान: जीएम
केरता शुगर मिल के एमडी अनिल तिर्की, जीएम विजय सिंह उइके व संचालक मंडल के अध्यक्ष विद्या सागर सिंह ने बताया एसईसीएल खदान में हैवी ब्लास्टिंग हो रही है। टाइम भी तय नहीं है। शिकायत पर जांच कराई थी, लेकिन जांच में जो यंत्र लगाते हैं, वह तीव्रता अधिक नहीं बताता। इसके बाद जब ब्लास्टिंग होती है तब मिल से लेकर दीवारें तक हिल जाती हैं। कलेक्टर को इसकी सूचना दे दी गई है।

एक्सपर्ट व्यू
ज्यादा मात्रा में विस्फोटक उपयोग पर परेशानी
पॉलीटेक्निक कॉलेज के माइनिंग व्याख्याता संजीव सिंह ने बताया कि जब विस्फोट किया जाता है तो उससे कंप्रेसिव वेव्स निकलती हैं। जो चट्‌टानों से होती हुई फ्री फेस तक जाती है और टेंसिल वेव के रूप में वापस आती हैं। यदि ज्यादा क्षेत्रफल के लिए ज्यादा विस्फोटक की मात्रा का उपयोग किया जाता है तो इसके कंपन अधिक होने के कारण घरों में दरारें आ जाती हैं। इससे बचने के लिए सीमित विस्फोटक का उपयोग करना चाहिए।

हम तो कंट्रोल ब्लास्टिंग करा रहे: मैनेजर
महान-3 काेयला खदान के सब एरिया मैनेजर संजय मिश्रा ने ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान पर कहा कि मापदंड के हिसाब से खदान में कंट्रोल ब्लास्टिंग हो रही है। समय-समय पर वाइव्रेशन की तीव्रता नापी जाती है। शुगर मिल में पता नहीं कैसे दिक्कत आ रही है। कारखाने में वाइव्रेशन मापक यंत्र लगाते भी हैं तो जांच तो हमारी ही टीम करेगी। वैसे भी जब शिकायत आती है टीम जांच करती है।

बिना सूचना ब्लास्टिंग नहीं करने के निर्देश
सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा ने मामले में बताया कि एसईसीएल के जीएम को निर्देश दिया गया है कि बिना सूचना के ब्लास्टिंग नहीं करेंगे। वहीं सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसपर अमल नहीं होता है तो कार्रवाई की जाएगी।

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प्रतापपुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर स्थित केरता में सड़क की एक ओर शुगर मिल है।

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