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किसानों, आदिवासियों को दिए गए 70 हजार करोड़ बेरोजगारी दर भी घटी


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है। उन्होंने कहा कि हमने यह देखा कि किसी भी तरह किसानों, ग्रामीणों, आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं की जेब में नगद राशि डाली जाए। यह राशि डेढ़ साल में 70 हजार करोड़ रु. तक पहुंच गई। इस तरह प्रदेशवासियों को मान-सम्मान के साथ उनके स्वावलंबन का रास्ता बनाया है।

हमारी योजनाओं से हर तबके को लाभ मिला। बिजली बिल हाफ, छोटे भू-खंडों की खरीदी-बिक्री, गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत कमी, पंजीयन शुल्क में कमी, राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा, भूमिहीनों को भूमि प्रदाय और ऐसे अनेक सुधार किए जिसके कारण आम आदमी का जीवन आसान हुआ। इस तरह लाखों लोगों के हाथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मददगार बने।
रेडियोवार्ता लोकवाणी में सीएम ने कहा कि समावेशी विकास की अवधारणा को छत्तीसगढ़ में लागू किया करने के संबंध में कहा कि समाज के जो लोग चाहे वे छोटे किसान हों, गांव में छोटा-मोटा काम-धंधा करने वाले लोग हों, खेतिहर मजदूर हांे, वनोपज पर आश्रित रहने वाले वन निवासी ऐसे सभी लोगों की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था करना ही समावेशी विकास का मूलमंत्र है।

उन्होंने कहा कि किसान न्याय योजना’ से प्रदेश के 19 लाख किसानों को लाभ मिल रहा है। दो किस्तों में 3 हजार करोड़ का भुगतान हो चुका है। अब जल्दी ही पूरे 5700 करोड़ रु. भुगतान का वादा भी पूरा हो जाएगा। हमने न सिर्फ धान के किसानों को 2500 रूपए प्रति क्विंटल देने का वादा पूरा किया है, बल्कि मक्का, गन्ना के साथ छोटी-छोटी बहुत सी फसलों का भी बेहतर दाम देंगे।

राज्य सरकार ने कर्ज माफी की, सिंचाई कर माफ किया और अब न्याय योजनाओं का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। सीएमने कहा कि हमने कोरोना संकट के बीच, एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की, वहीं प्रवासी मजदूरों सहित उद्योग, व्यापार और कारोबार जगत पर विश्वास किया। उसी के कारण खेती भी चली और उद्योगों के पहिये भी चले। इससे वित्तीय तरलता बनी रही जिससे लोगों को रोजगार मिला और बेरोजगारी की दर घटी। देश में मनरेगा के तहत काम और मजदूरी देने वाले अग्रणी राज्य बने।

तेंदूपत्ता की संग्रहण मजदूरी 4 हजार रु. करके ही चुप नहीं बैठे, बल्कि लघु वनोपजों की खरीदी 7 से बढ़ाकर 31 वस्तुओं तक पहुंचा दी। जो महुआ 17 रु. में बिकता था उसे 30 रु. किलो में खरीदा। ऐसे तमाम काम जनता की जरूरतें और दुख-दर्द को समझने वाली सरकार ही कर सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है।

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सीएम को सुनती गृहणियां।

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