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ऑनलाइन पढ़ाई से बदल रहा व्यवहार, 6 माह से बंद हैं स्कूल, घर में चिड़चिड़े हो रहे हैं बच्चे


कोरोना के कारण लॉकडाउन से पहले ही स्कूल बंद कर दिए गए थे। 6 महीने से अधिक गुजर गए हैं, न स्कूल है और न दोस्त। दिन में 5 घंटे तक मोबाइल स्क्रीन और लैपटॉप पर आंख गड़ाकर पढ़ते हुए बच्चे ऊब गए हैं। घर में एकाकीपन और ऑनलाइन क्लास से बोरियत के कारण उनके व्यवहार में बदलाव होने लगा है। कुछ पालक बच्चों में आईक्यू और तर्क शक्ति कम होने की शिकायत कर डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं। 6 माह से बच्चे घराें पर ही रह कर चिड़चिड़े हो रहे हैं। स्कूल बंद हाेने के कारण घंटाें चलने वाली ऑनलाइन क्लास, ट्यूशन व कोचिंग के लिए बैठना पड़ता है। नेटवर्किंग की समस्या, स्पष्टता नहीं होने और कुछ टॉपिक को न समझ पाने या क्लास छूट जाने के कारण चिड़चिड़ापन हो रहा है। बच्चों के बदले व्यवहार से परिजन परेशान हैं। कुछ बच्चों में मोबाइल गेम्स और कार्टून की लत बढ़ने लगी है। इससे आंखों पर असर पड़ रहा है। इनसे भी बोरियत होने के कारण बच्चे गुमसुम हो रहे हैं। कुछ बच्चों में स्वभाव उग्र हो रहा है।

बच्चाें के लिए निकालें समय, गेम से हटाएं ध्यान
“बच्चाें काे काफी समय के लिए माेबाइल व लैपटॉप पर गुजारने के कारण उनका व्यवहार बदल रहा है। उन्हें रचनात्मक कार्यों की तरफ मोड़ें। पेंटिंग, कविता और कहानी लिखने, साइंस मॉडल बनाने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को पालक समय दें। उनके साथ बैठकर इनडोर गेम्स के जरिए भी सकारात्मक माहौल दे सकते हैं। इस तरह उनका एकाकीपन और व्यवहार बदला जा सकता है।”
-डा. रमेश कुमार अजगल्ले, मनाेराेग चिकित्सक

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