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विडंबना यह है कि चीन से सैन्य बातचीत का स्तर तो बढ़ा लेकिन, तनाव कम करने की उनकी क्षमता कम हो गई…


भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच इस हफ्ते मास्को में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच हालात सुधरने की उम्मीद जगी है। लेकिन, फिर भी यह इम्तहान का वक्त है। पिछले चार महीने से लगातार लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध बना हुआ है। हमने वह सब कुछ आजमाया जो हम पहले भी आजमा चुके हैं। कई एक्टिविटीज पहली बार की, लेकिन हम अभी भी वहीं हैं जहां थे।

दोनों देशों के जवानों के बीच एलएसी पर धक्का-मुक्की भी हुई। यहां तक कि मुक्केबाजी भी। जिसके बाद दोनों देशों के बॉर्डर पर्सनल की मीटिंग हुई। इसमें कुछ सामरिक कदम उठाए जा सकते थे, लेकिन बड़े मुद्दों का हल नहीं निकाला जा सका।

हम इस बात पर गर्व करते थे कि तमाम मतभेदों और गतिरोध के बाद भी सीमा पर पिछले चार दशकों में फायरिंग नहीं हुई, किसी की जान नहीं गई। लेकिन, 2020 की इस गर्मी में ये दोनों चीजें खत्म हो गईं। सरहद पर फायरिंग भी हुई और मौतें भी हुईं। हालांकि दोनों पक्षों ने इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। पहली बार, सैन्य वार्ता को लेफ्टिनेंट जनरल लेवल पर अपग्रेड किया गया है।

विडंबना यह है कि लेवल तो बढ़ा लेकिन, तनाव कम करने की उनकी क्षमता कम हो गई। पिछले हफ्ते, भारतीय सेना ने सामरिक युद्ध के मैदान में और बातचीत की मेज, दोनों पर एडवांटेज बनाए रखने के लिए दक्षिण पैंगॉन्ग त्सो और दूसरे हिस्सों में कुछ चोटियों पर कब्जा कर लिया। इसने चीनी पीएलए को निराशा हाथ लगी है।

क्योंकि, उसने कभी इसकी कल्पना नहीं की थी कि हम यह कदम उठाएंगे। इससे उन्हें नुकसान भी हुआ है। यही कारण है कि हमारे सैनिकों को डराने के लिए उसने फायरिंग की। हालांकि, यह हास्यास्पद है, क्योंकि जीवित गोलियां और लाशें भारतीय सैनिकों को नहीं रोक सकती हैं।

हाल ही में मॉस्को में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात हुई थी जिसमें पर जारी गतिरोध को लेकर बातचीत हुई थी।

दोनों के बीच अभी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। दो परमाणु सम्पन्न देश अपनी सेना के साथ सीमा के पार एक दूसरे का सामना कर रहे हैं। कई दौर में बातचीत भी हुई है और अभी भी जारी है लेकिन कुछ खास सफलता हाथ नहीं लगी है। दुनिया सांसें थाम के देख रही है। कई लोगों ने मध्यस्थता का प्रस्ताव भी दिया, जिसे विनम्रता से मना कर दिया गया।

ऐसे समय में, सेना और सरकार को अपने फैसले बेहद सावधानी और परिपक्वता के साथ लेने चाहिए। सरकार के सभी अंगों और देश की शक्ति के सभी उपकरणों के बीच तालमेल होना जरूरी है। इस तरह के हालात में देश को एक होना चाहिए।

इस विषय पर देश में भारी गुस्सा है। इसको लेकर सभी की अलग-अलग राय भी हैं। मीडिया हाउस सबसे तेज रिपोर्ट करना चाहते हैं, जरूरत पड़ने पर तथ्यों की जांच और विश्वसनीयता की कीमत पर भी। क्योंकि टीआरपी को लेकर उनकी अपनी मजबूरियां हैं।

लेकिन, सेना के विषय में सूचनाओं को लेकर उनके पास थोड़ा खालीपन है। इसलिए वे एक्सपर्ट्स, रिटायर्ड मिलिट्री ऑफिसर और रक्षा विश्लेषकों की मदद लेते हैं। ये एक्सपर्ट वे होते हैं जिन्होंने क्षेत्र में काम किया है, उन्हें उस विषय में जानकारी है और ऑपरेशन्स की अच्छी समझ है। लेकिन, परेशानी तब शुरू होती है जब उनमें से कुछ लोग फैक्ट को वास्तविकता से दूर रखना शुरू कर देते है।

ऐसा करना ऑपरेशन में सैनिकों के जीवन को भी खतरे में डाल सकता है। कुछ कट्टर राष्ट्रवादी मीडिया, एक्सपर्ट्स और कुछ लोग सोशल मीडिया पर सर्जिकल स्ट्राइक और अंदर घुसकर सबक सिखाने जैसी बातें करने लगते हैं। तो कुछ लोग हर सामरिक कदम पर सेना और सरकार पर सवाल उठाने लगते हैं।

लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि चीन ने हमारे एक हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, उस पर सर्जिकल स्ट्राइक कर देना चाहिए, उसे सबक सिखाना चाहिए, इस तरह की गलत सूचनाओं को फैलाने से बचना चाहिए।

मुझे लगता है कि ऐसे समय में हम सभी को शांति और संतुलन बनाए रखना चाहिए। सभी भारतीयों को सेना पर भरोसा करने की जरूरत है। क्योंकि, सेना ने हमें कभी भी निराश नहीं किया है और भविष्य में भी नहीं करेगी, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े। इसलिए उनको सपोर्ट की जरूरत है, उन्हें लगाना चाहिए कि 130 करोड़ देशवासी उनके साथ हैं। आज जरूरत है कि मीडिया संयम बरते। मैं भी सभी से परिपक्व नागरिक बनने की अपील करूंगा।

जिम्मेदार देशों के पास संभावित टकराव या युद्ध से बचने के लिए एक मैकेनिज्म होता है। युद्ध एक घातक व्यवसाय है। यह किसी भी देश को दस साल या उससे अधिक समय पीछे ले जा सकता है। कोई भी संघर्ष या युद्ध तभी होना चाहिए जब हमारे पास कोई और विकल्प न हो।

यह भी जरूरी है कि भारतीय सेना और सरकार को बॉर्डर के हालात से देश को अवगत कराना चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से कुछ सीमाएं हो सकती हैं लेकिन अफवाहों को रोकने के लिए लगातार लोगों को अपडेट करते रहना भी जरूरी है। क्योंकि, इन्फॉर्मेशन एक स्पेस है। इसमें यदि आप खाली जगह छोड़ेंगे तो यह दूसरी तरफ से भर जाएगा। इसे इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर कहते हैंं।

उम्मीद है कि हम सभी कुछ सीखने के अनुभवों के साथ इससे बाहर आएंगे। भारत एक विविधतापूर्ण देश है, हमने अक्सर विविधता में एकता और सभी चुनौतियों के खिलाफ एक साथ उठने की क्षमता साबित की है। भारत हमेशा से जीत सकता है। सत्यमेव जयते!

यह भी पढ़ें :

1. एक्सपर्ट कमेंट / चीन को लेकर भारत के पास ये 4 मिलिट्री ऑप्शन हैं, क्योंकि सेना की तैयारी तो सिर्फ मिलिट्री ऑप्शन की ही होती है

2.एक्सपर्ट एनालिसिस / बॉर्डर मीटिंग में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल के सामने चीन से मेजर जनरल आने पर देश में गुस्सा, लेकिन यह बात रैंक नहीं, रोल की है

3. एनालिसिस / हमारे देश में लोकतंत्र है इसलिए हम बता देते हैं, लेकिन चीन कभी नहीं बताएगा कि उसके कितने सैनिक मारे गए हैं

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Expert Satish Dua comment : Ironically, the level of military interaction with China increased but their ability to reduce tensions decreased.

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