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वर्क फ्रोम होम के बीच मेल और मैसेज कर रहे परेशान, इनबॉक्स पर नियंत्रण रखें यूजर; 5 तरीकों से जानिए कैसे संभालें अपना मेलबॉक्स


सारा अरीदी. वर्क फ्रॉम होम के दौरान डिजिटल कम्युनिकेशन यानी ई-मेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी चीजों में काफी इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं, ऑफिस और बच्चों के स्कूल के मेल के अलावा आपके पास लगातार खबरों के मैसेज भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में अगर आप मैसेज को बेहतर ढंग से संभालना चाहते हैं तो आपको थोड़ा प्रोडक्टिव होना होगा। इस काम में एक्सपर्ट्स की कुछ टिप्स आपकी मदद कर सकती हैं।

मैसेज को अलग कर लें

  • कई लोग काम के साथ-साथ ही किसी भी मेल पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं। एक समय में वे बच्चों के टीचर से आए मेल का जवाब दे रहे होते हैं, तो अगले ही पल कॉन्फ्रेंस कॉल में शामिल हो जाते हैं।
  • इस तरह की चीजों से बचने के लिए एक डिजिटल शेड्यूल तय करें, जो यह बताए कि आप कब काम कर रहे हैं और कब निजी मामले निपटा रहे हैं। खबरों के बारे में सुबह ही पढ़ लें, ताकि आपको काम के दौरान बीच में खबरें न देखनी पड़ें।

साथियों से बात करें

  • अपनी प्रतिक्रिया को लेकर अपने स्टूडेंट्स, ऑफिस के सहकर्मियों या बच्चे के टीचर्स से बात करें। ऑनलाइन लर्निंग कंसोर्टियम में रिसर्च और इनोवेशन की डायरेक्टर लिनेट ओ कीफी का कहना है कि “सभी के लिए उम्मीदों को तय कर दें।” इससे आपको मैसेज की संख्या कम करने में मदद मिलेगी। अपने साथियों को यह बता दें कि आपका शेड्यूल दूसरों के साथ नहीं मिलेगा।
  • कोलंबिया यूनिवर्सिटी में टीचर्स कॉलेज में कम्युनिकेशन की प्रोफेसर आइओआना लिटेरेट कहते हैं कि “हमसे ज्यादा उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है। हमारे पास काफी ज्यादा जिम्मेदारियां हैं और हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है।” इस बात को दिमाग में रखें और सभी को बता दें कि आप किस तरह से संपर्क साधना चाहती हैं। अगर आपको डर है कि बच्चा जूम मीटिंग खराब कर देगा तो बॉस से बताएं कि आप ऑडियो कॉल करना चाहती हैं।
  • हो सकता है कि आप किसी ट्विटर मैसेज, मेल या स्लैक मैसेज का रिप्लाई करने पर मजबूर महसूस करें, लेकिन कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डाएन बैले का कहना है कि यह याद रखना जरूरी है कि “जो चीज आपके लिए व्यवधान है, वो किसी के लिए मदद हो सकती है।”
  • कुछ रिक्वेस्ट जरूरी होती हैं, जबकि कुछ नहीं। सोचें कि आप दूसरों की मदद करने के लिए कब वक्त निकाल पाएंगे और आपके पास खुद के लिए वक्त कब होगा। उदाहरण के लिए अगर आपके पास किसी काम को खत्म करने के लिए एक घंटा है, तो ईमेल बंद करें और काम पूरा होने तक न खोलें।

इनबॉक्स पर नियंत्रण रखें

  1. अपने इनबॉक्स को खाली करने का सबसे अच्छा तरीका है खुद को मेलिंग लिस्ट से अनसब्सक्राइब कर लेना। जीमेल और एप्पल के मेल में आप एक क्लिक से मेलिंग लिस्ट से खुद को हटा सकते हैं।
  2. आप ईमेल्स को सेंडर और सब्जेक्ट लाइन के हिसाब से फिल्टर भी कर सकते हैं। साथ ही आप अपने निजी इनबॉक्स के लिए ऐसा फिल्टर भी तैयार कर सकते हैं, जहां अप्वाइंटमेंट्स या बिल की जानकारी होगी, ताकि आपके ये जरूर मेल दूसरों के साथ खो न जाएं।
  3. अगर हो सके तो अपने पर्सनल और प्रोफेशनल ईमेल को एक ही इनबॉक्स में ले आएं। अगर आपको नोट्स खोने की चिंता है तो उन्हें एक ही मेल एड्रेस में डाल दें। ऐसा आप जीमेल के फीचर ऑप्शन की मदद से कर सकते हैं।
  4. मीटिंग्स शेड्यूल करने के लिए मेल के बजाए शेयर्ड कैलेंडर का सहारा लें। इस कैलेंडर में आपके सहकर्मी देख सकेंगे कि आप कब फ्री हैं और मीटिंग में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको एक ही तरह का रिप्लाई बार-बार देना होता है, तो एक टेम्प्लेट तैयार कर लें। इससे आपके समय की काफी बचत होगी।
  5. अगर आप ईमेल को टू-डू (किए जाने वाले काम) लिस्ट समझकर काम करेंगे तो इनबॉक्स कभी खाली नहीं कर पाएंगे। इनबॉक्स में अनरीड मैसेज होना आम बात है। नहीं पढ़े गए मैसेज का इस्तेमाल रिमाइंडर के तौर पर करें।

आपके जीवन में शामिल डिजिटल टूल्स की जांच करें
डॉक्टर ओ कीफी आपके जीवन में शामिल सभी डिजिटल टूल्स की जांच करने की सलाह देती हैं। उन्होंने कहा “जांच करें और खुद से सवाल करें कि इन टूल्स का आपके जीवन में क्या काम है।” अगर आप 24/7 कॉल पर नहीं रहना चाहते हैं तो एक बार काम बंद कर देने के बाद ऑफिस के ईमेल और चैट नोटिफिकेशंस को रोक दें। अगर आप स्मार्ट वॉच की मदद लेते हैं तो काम के तुरंत बाद इसे हटा दें।

स्मार्टफोन बड़े काम के होते हैं, लेकिन यह याद रखें कि आप तय करेंगे कि इनका इस्तेमाल कैसे करना है। डॉक्टर लिटेरेट ने अपने फोन पर कुछ भी पढ़ना या देखना बंद कर दिया है। इसके लिए वे किंडल की मदद लेती हैं। अगर आप लगातार इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खोए हुए हैं तो उन अकाउंट्स को अनफॉलो कर दें, जो आपके जीवन के लिए बहुत ज्यादा जरूरी नहीं हैं। ऐसा ही अपने ऐप्स के साथ भी करें।

कुल मिलाकर बात यह है कि आप तय करेंगे कि कितनी बार ईमेल और खबरों को देखना है। बेहतर होगा कि आप अपने स्टूडेंट्स या बॉस के मैसेज को अनदेखा न करें।

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