Our website is made possible by displaying online advertisements to our visitors. Please consider supporting us by whitelisting our website.

आने वाले 10 दिनों में श्राद्ध पक्ष की तीन तिथियां रहेंगी बेहद खास, दा से ज्यादा दीन-दुखियों की सेवा में जुटे सामाजक संगठन


गौरव शर्मा | श्राद्ध पक्ष के 6 दिन बीत चुके हैं। जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि काे हुई थी उनका श्राद्ध सोमवार काे किया गया। तर्पण का यह सिलसिला इसी तरह 17 सितंबर तक चलेगा। इधर, कई संगठनों ने पितरों के निमित्त दीन दुखियों की सेवा की मुहिम शुरू की है। ये संगठन बेसहारा लोगों और पशु-पक्षियों के भोजन की व्यवस्था के लिए सामाजिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वैसे भी धर्मग्रंथों में कहा गया है कि… श्रद्धा दीयते यत् तत् श्राद्धम‌् यानी श्रद्धा से दिया गया पदार्थ दान ही श्राद्ध है।
ऑल इंडिया ब्राह्मण संगठन की महिला प्रदेश अध्यक्ष बबीता दुबे ने बताया कि हाल ही में समाज की तरफ से डीडीनगर की 2 अनाथ बच्चियों को कपड़े, अनाज और साइकिल दिए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उन्हें मोबाइल भी दिलाने वाले हैं। वहीं 9 सितंबर को समाज की तरफ से दूधाधारी मठ की गौशाला में चारे के लिए राशि दी जाएगी। समाज के लोगों से भी अपील की जा रही है कि पितृ पक्ष पर जरूरतमंदों की मदद और सेवा करें क्योंकि ऐसा करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है और धार्मिक मान्यता भी। छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के शहर अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने बताया कि अग्रवाल समाज ने भी सामाजिक स्तर पर जरूरतमंदों की सेवा की मुहिम चलाई है। समाज के लोगों से कहा गया है कि वे रोज अतिरिक्त खाना बनाएं और आसपास रहने वाले किसी जरूरतमंद को दें।

आने वाले 10 दिनों में श्राद्ध पक्ष की ये तीन तिथियां रहेंगी बेहद खास…

11 सितंबर – मातृनवमी
जिन महिलाओं की विवाहित रहते मृत्यु हो जाती है उनका श्राद्ध नवमी पर किया जाता है।

13 सितंबर – संन्यासी श्राद्ध
जो लोग ब्रह्मचर्य जीवन को अपना लेते हैं उन मृतात्माओं का श्राद्ध इस तिथि पर किया जाता है।

17 सितंबर – सर्वपितृ मोक्ष
जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो उनका श्राद्ध कर सकते हैं। इसे पितर खेदा भी कहते हैं।

पितरोें को ऐसे मिलती हैं श्राद्ध की वस्तुएं
छोटे से पिंड से पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है? इस सवाल के जवाब में ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे बताते हैं कि एक बार राजा करन्धम ने महाकाल से पूछा- मनुष्यों द्वारा पितरों के लिए तर्पण या पिंडदान किया जाता है, तब जल-पिंड आदि तो यहीं रह जाता है। पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है? इस पर महाकाल ने कहा कि विश्वनियंता ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि देवता और पितृ, गंध व रस तत्व से तृप्त होते हैं। शब्द तत्व से रहते हैं और स्पर्श तत्व को ग्रहण करते हैं। इस प्रकार परिजनों द्वारा किए गए श्राद्ध से पितृ तृप्त होते हैं।

चरामेति… जरूरतमंदों में बांट रहे हैं भोजन
चरामेति फाउंडेशन द्वारा पितृ पक्ष के दौरान पशु-पक्षियों व जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

पितृ पक्ष को लेकर समाज में फैली 5 भ्रांतियां और उसकी सच्चाई
1. पितृपक्ष के दौरान घर में रोज होने वाली सामान्य पूजा नहीं करें?
श्राद्ध करने का मतलब कतई यह नहीं है कि 15 दिन तक घर की पूजा बंद कर दें। यह शास्त्रोक्त नहीं है।
2. माता-पिता नहीं, वे ही श्राद्ध करें?
श्राद्ध में सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि सभी पूर्वजों को तर्पण दिया जाता है। सबके लिए ये अनिवार्य है।

3. गया जाकर लौट गए हैं क्या वे श्राद्ध न करें?
समाज में फैली यह सबसे बड़ी भ्रांति है। यदि गयाजी जाने से पितृ कभी वापस नहीं लौटते तो विवाह के दौरान किन पितरों को आमंत्रित किया जाता है?

4. इस वर्ष घर में किसी की मृत्यु हो गई तो श्राद्ध नहीं करना चाहिए?
दशगात्र आदि में जब तर्पण दिया जाता है तो पितृ पक्ष जैसे पुण्य अवसर पर क्यों नहीं किया जा सकता।
5. संस्कृत नहीं आती, तर्पण कैसे करें?
पूर्व दिशा में देवता, उत्तर में ऋषियों, दक्षिण में पितरों के निमित्त नामोच्चारण कर तर्पण कर सकते हैं।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


In the coming 10 days, three dates of Shraddh Paksha will be very special, social organizations working in service of the more afflicted than Da

Powered by WPeMatico

%d bloggers like this: