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21 साल पहले करगिल जिताने वाली बोफोर्स लद्दाख में तैनात होगी; फॉरवर्ड लोकेशन पर साजो-सामान सप्लाई कर रहे हैं ग्लोब मास्टर और चिनूक


पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव बढ़ने के साथ ही सेना ने सर्दियों के सीजन में लंबे टकराव की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय सेना वहां बोफोर्स होवित्जर तोपें तैनात करने की तैयारी कर रही है। उधर, फॉरवर्ड लोकेशन पर साजो-सामान की सप्लाई के लिए वायुसेना ने सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-17 ग्लोबमास्टर और आईएल-76 ल्यूशिन को तैनात किया है। इनके साथ ही चिनूक हेलिकॉप्टर भी इस काम में लगा है।

फास्ट सप्लाई के लिए मैकेनिज्म तैयार किया

  • सेना ने फॉरवर्ड लोकेशन पर बिना रुकावट और तेज सप्लाई का मैकेनिज्म डेवलप किया है। सी-17, आईएल-76 एयरक्राफ्ट रोज टेंट, कपड़े,खाने का सामान, पानी की बोतलें जैसी चीजें लेकर लद्दाख जा रहे हैं।
  • लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में सी-17 और आईएल-76 सामान पहुंचाते हैं। वहां इन्हें आर्मी सैनिटाइज करती है और इसके बाद चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए इन्हें फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचाया जाता है।
  • दिनभर चिनूक के जरिए विभिन्न फॉरवर्ड लोकेशन पर सप्लाई का काम चलता है। आर्मी अफसर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि विभिन्न राज्यों से ये सामान लद्दाख लाने और फिर फॉरवर्ड लोकेशन पर भेजने में कुछ घंटों का वक्त लगता है।

सेना के इंजीनियर बोफोर्स तोपों की सर्विसिंग में जुटे

न्यूज एजेंसी एएनआई ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, सेना के इंजीनियर बोफोर्स तोपों की सर्विसिंग में जुटे हैं। ये तोपें कुछ दिनों में बॉर्डर पर तैनात कर दी जाएंगी। फॉरवर्ड लोकेशंस पर आर्मी की तैयारियों के सिलसिले में सर्विसिंग और मेंटेनेंस के काम को लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति कंवर ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि वर्कशॉप में आर्मी के इंजीनियर उन हथियारों के मेंटेनेंस का ध्यान रखते हैं, जिनकी विशेष परिस्थितियों में जरूरत होती है। टेक्निकल स्टोर ग्रुप्स एक टैंक की फायरिंग पिन से लेकर इंजन तक हर चीज मुहैया करवाते हैं। मोबाइल स्पेयर्स वैन के जरिए हम फॉरवर्ड इलाकों में टेक्नीशियंस को कंपोनेंट पहुंचाते हैं।

बोफोर्स तोपों ने पाकिस्तान का भारी नुकसान किया था
बोफोर्स तोपें 1980 में सेना में शामिल की गई थीं। ये लो और हाई एंगल से फायरिंग कर सकती हैं। ये तोपें युद्ध जिताने में मददगार रही हैं।

1999 में पाकिस्तान के खिलाफ करगिल की जंग जिताने में भी इनकी अहम भूमिका रही थी। बोफोर्स तोपों ने बहुत ज्यादा ऊंची पहाड़ियों पर बने पाकिस्तान के बंकरों और ठिकानों को आसानी से तबाह कर दिया था। इससे पाकिस्तान की सेना को भारी नुकसान हुआ था।

भारत-चीन सीमा पर पिछले 20 दिन में 3 बार गोलियां चलीं
लद्दाख में भारत-चीन के बीच मई से तनाव बना हुआ है। 15 जून को गलवान में दोनों देशों की झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए, लेकिन उसने कबूला नहीं। ताजा विवाद 29-30 अगस्त की रात से शुरू हुआ, जब चीन ने पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों नाकाम कर दी। बीते 20 दिन में दोनों तरफ से 3 बार हवा में गोलियां चल चुकी हैं।

पहली बार: 29-31 अगस्त के बीच पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर पर।
दूसरी बार: 7 सितंबर को मुखपारी हाइट्स इलाके में।
तीसरी बार: 8 सितंबर को पैंगॉन्ग झील के उत्तरी छोर पर।

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बोफोर्स तोपें 1980 में सेना में शामिल की गई थीं। ये लो और हाई दोनों एंगल से फायरिंग कर सकती हैं। (फाइल फोटो)

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