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कोरोनाकाल में आइसोलेशन, पेंडेमिक, क्वारेंटाइन जैसे अंग्रेजी के कई शब्द जुबां पर, जुड़ गए जीवन से


(जॉन राजेश पॉल) हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। सरकारी दफ्तरों से लेकर स्कूल-कॉलेजों और सामाजिक कार्यक्रमों में हम शपथ लेते हैं… ज्यादा से ज्यादा हिंदी का इस्तेमाल करेंगे। पर ऐसा होता नहीं है, बल्कि इसके विपरीत होता है। बातचीत के दौरान अंग्रेजी के शब्द इस्तेमाल करने का चलन लोगों में तेजी से बढ़ा है। आम बोलचाल में वैसे तो हर साल अंग्रेजी के कई शब्द शामिल होते हैं, लेकिन इस बार कोरोना काल के दौरान यानी मार्च से अब तक, एक दर्जन से ज्यादा अंग्रेजी के शब्द लोगों की जुबां पर चढ़े और हर किसी के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।

कोरोना से पहले इन शब्दों का इस्तेमाल शायद ही सार्वजनिक रूप से किया जाता रहा होगा। क्वारेंटाइन और आइसोलेशन जैसे कई शब्द ऐसे भी हैं जिन्हें डिक्शनरी लेकर खोजने पर भी मुश्किल से ही मिलेंगे। जनता से लेकर केंद्र व राज्य सरकारें अपने कामकाज व चिट्‌ठी-पत्रियों में इन्हें लिख रहीं हैं।

क्वारेंटाइन जैसे शब्दों का उपयोग बरसों पहले पानी जहाज, सीपोर्ट और एयरपोर्ट में सफर करने वाले बीमार यात्रियों के लिए होता था। वर्तमान में लोगों की जुबान पर चढ़े इन शब्दों से अफसरों व कर्मचारियों में भ्रम भी पैदा हुआ है। इस वजह से भास्कर ने इसके सही मायने तलाशे।

15वीं सदी में जहाज में यात्रा कर रहे बीमार लोगों के लिए इस्तेमाल होता था क्वारेंटाइन
क्वारेंटाइन की बात करें तो पंद्रहवीं शताब्दी में पानी के जहाज में काफी लोग सफर करते थे। इनमें से कोई बीमार होता तो उसे 13-14 दिन के लिए पोर्टपेज में रखा जाता था। तब क्वारेंटाइन शब्द का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता था। वैसे हवाई यात्रा करने पर बीमार यात्रियों के लिए भी इसी तरह रखने के इंतजाम एयरपोर्ट में किए जाते हैं।

क्वारेंटाइन का सीधा सा अर्थ है कि व्यक्तिगत या सामूहिक, किसी भी रूप में लोगों को एक निर्धारित जगह पर रखना। जीएडी के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह की मानें तो यह पुरानी व्यवस्था है। सालों बाद फिर इन शब्दों का उपयोग हो रहा है। देश में विशेष आपदा कानून लागू है और इन शब्दों का उपयोग अपरिहार्य है।

ऐसे भी शब्द जो हेल्थ स्टाफ ही जानता था… अब सब बोलते हैं
पाॅजीटिव-नेगेटिव, टेस्टिंग, ऑक्सी टेस्ट, सर्वे, सैंपल, ट्रेसिंग, संक्रमण, इंफेक्शन, वैक्सीन, मास्क, एन-95 ये ऐसे शब्द हैं जो अमूमन हेल्थ डिपार्टमेंट का स्टाफ ही रोजाना करता था। अब नगर निगम स्टाफ, शिक्षक, मितानिन आदि भी प्रतिदिन इसे बोल रहे हैं। सर्वे में वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। वे कोरमोबीडिटी, एसएआरआई, आक्सीजन लेवल, सैंपल का काम भी कर रहे जो मेडिकल स्टाफ ही करता रहा है।

जानिए… ऐसे ही और शब्द और उनके सही मायने

  • आइसोलेशन: यानी एकांतवास। इंसान में बीमारी के लक्षण मिलने पर ऐसा किया जाता है, ताकि दूसरे संक्रमित न हों।
  • सोशल डिस्टेंसिंग: यानी लोगों को किसी एक जगह पर इकट्‌ठा नहीं होना है। बाजार आदि पर प्रतिबंध।
  • फिजिकल डिस्टेंसिंग: किसी से मिलते हैं तो उससे एक निश्चित दूरी रखनी है। वर्तमान में यह दूरी 6 फीट होनी चाहिए।
  • लॉक डाउन: यानी सब बंद। कुछ नहीं खुलेगा। इस दौरान सिर्फ वे ही बाहर निकल सकते हैं जिन्हें प्रशासन से अनुमति हो।
  • गाइडलाइन: सरकारी चिट्ठियों में आमतौर पर दिशा-निर्देश कहा जाता है, लेकिन मार्च से गाइडलाइन ने इसकी जगह ले ली है।
  • एसओपी: मतलब मानक प्रक्रिया। लॉक डाउन, कंटेंटमेंट जोन अन्य संबंधित गतिविधियों को संचालित करने बना खाका।
  • कंटेंटमेंट जोन: यह आइसोलेशन का ही रूप है। जहां ज्यादा संक्रमित मिलते हैं उसे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है।
  • कोविड सेंटर : यह यह शब्द अपने आप चलन में आ गया है। जानकार बताते हैं कि यह शब्द डिक्शनरी में भी नहीं मिलेगा।
  • एचसी-क्यू: हाइड्रो-क्सोक्लोरोक्वीन। ये मलेरिया की दवा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे दुनियाभर में फेमस कर दिया।
  • प्रिकॉशन: सीधा मतलब सावधानी। अभी महामारी से बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के रूप में इसे प्रयुक्त किया जा रहा है।
  • हॉट स्पाट: यानी ऐसा इलाका जहां बहुत संक्रमित हों। हॉट स्पॉट को लेकर अभी केंद्र व राज्य, दोनों सरकारें सूची जारी कर रहीं हैं।
  • सार्स वायरस: डेढ़ दशक पहले यह वायरस फैला था। भारत में पहुंचा, पर फैला नहीं। तब भी इस शब्द का उपयोग ज्यादा नहीं हुआ।

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प्रतीकात्मक फोटो।

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