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सुविधाओं की कमी पर विपक्ष ने घेरा, एजेंडे में लॉकडाउन भी, सीएम आज करेंगे रिव्यू


राजधानी और प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या और इलाज की सुविधाओं की कमी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरेबंदी की है। भाजपा के वरिष्ठ विधायकों ने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा कर सुझाव दि‍ए है वहीं संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भी सीएम से निजी अस्पतालों की शिकायत की है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 6 सितंबर को दोपहर एक बजे प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बचाव और उपचार की समीक्षा करेंगे।
बघेल वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी कमिश्नर, कलेक्टर, आईजी,जिला पंचायतों के सीईओ, निगम के आयुक्तों और सीएमओ के साथ चर्चा करेंगे। बैठक के एजेंडे में अन्य विषयों के साथ शहरों में लॉकडाउन भी शामिल है। दूसरी ओर भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर में कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए सीएम बघेल, स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव व एसीएस स्वास्थ्य से चर्चा की। अग्रवाल ने इस दौरान मरीजों के इलाज के लिए बिस्तरों की कमी को दूर किया जा सके व संक्रमण को रोकने कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि एक निजी मेडिकल कालेज/ हॉस्पिटल में पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजुद है। इसलिए इसे तुरन्त 500 बेडेड अस्पताल बनाया जाए तो रायपुर के लोगों को सुविधा तत्काल मिल सकेंगी।
वहीं दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर जैसे बड़े-बड़े शहरों सर्वसुविधा युक्त नर्सिंग होम, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से तत्काल बातचीत कर एक निर्धारित रेट में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इन्हें अनुमति दी जाये। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार अब पल्ला झाड़कर अपना नाकारापन स्वीकार कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के लगातार आ रहे बयानों पर अग्रवाल ने सवाल किया कि जब स्वास्थ्य मंत्री को यह पता था कि आंकड़ा 60 हज़ार तक पहुंचेगा तो सरकार ने वैसा वर्क प्लान क्यों नहीं बनाया।

मध्यप्रदेश समेत अनेक प्रदेशों की तुलना में छत्तीसगढ़ का रिकवरी रेट बेहद कम है, टेस्ट रिपोर्ट भी कम है। इसी प्रकार होम आइसोलेशन को लेकर भी कोई स्पष्ट नीति नहीं है। अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोरोना रोकथाम के झूठे दावे करके आत्ममुग्ध हुए जा रहे हैं, और ज़मीनी सच यह है कि अब प्रदेश के अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भर्ती करने में दिक्कतें आ रही हैं और अस्पतालों में भी इलाज की पर्याप्त व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। अब सवाल यह है कि दोनों में सच कौन बोल रहा है? अग्रवाल ने इस बात पर भी हैरत जताई कि लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों को देखते हे प्रदेश सरकार अब जाँच का काम भी बाधित कर रही है। कोरोना के कारण लोगों में बढ़ रही दहशत और आक्रोश को दबाने के लिए प्रदेश में कोरोना टेस्ट कम किया जा रहा है ताकि कोरोना संक्रमितों की संख्या कम नज़र आए, जबकि कोरोना की पर्याप्त रोकथाम के लिए जांच ज़्यादा-से-ज़्यादा कराई जानी चाहिए और पॉज़ीटिव संक्रमितों को तत्काल आइसोलेट कर दिया जाकर कोरोना के संक्रमण को रोका जाना चाहिए।

वसूली पर अस्पतालों के लाइसेंस कैंसिल करें: विकास
संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने राजधानी में स्थित निजी अस्पतालों पर कोविड-19 के मरीजों से मनमाने तरीके से पैसे वसूली करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसे अस्पताल के संचालक ‘मेडिकल क्लीनिक कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट’ का खुला उलंघन कर रहे हैं। उपाध्याय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि वे वर्चुअल मीटिंग लेकर संचालकों को हिदायत दी जाए कि जनता के साथ किसी तरह की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उसके बाद और मनमानी जारी रही तो ऐसे अस्पतालों के लाइसेंस कैंसिल किया जाए। विकास उपाध्याय ने कहा कि 90 फीसदी पीड़ितों द्वारा लगातार ये शिकायत मिल रही है कि निजी अस्पतालों में कोरोना का डर दिखा कर उनसे मनमाने तरीके से लाखों रुपए वसूली की जा रही है। कई मरीज तो ऐसे भी हैं जो इन निजी अस्पतालों में महज 3 दिन का फीस 6 लाख रुपये तक चुकाए हैं।

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फाइल फोटो।

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