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निजी लैब से जांच में कोरोना पॉजिटिव आने पर फोन बंद, पता भी आधा-अधुरा, एक व्यक्ति को ढूंढ़ने टीम को करने पड़ रहे 100 से ज्यादा कॉल


राजधानी के जिला पंचायत में कोविड कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए बनाए गये कॉल सेंटर में 40 लोगों की टीम के एक सदस्य को दिन में सौ से ज्यादा कॉल करने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगो की कांटेक्ट ट्रेसिंग में आ रही है, जो निजी लैबों में जाकर जांच करवा कर आ रहे हैं या घर पर लैब असिस्टेंट को बुलवाकर सैंपल दे रहे हैं। ज्यादातर मामलों में मरीज पूरा पता देने की जगह केवल रायपुर लिखवा रहे हैं। इसके कारण ऐसे लोगो की ट्रेसिंग नहीं हो पा रही है। यही नहीं, कांटेक्ट में दिए गये नंबरों को बहुत से पॉजिटिव मरीजों ने बंद कर दिया है। इससे भी सरकारी एजेंसियां परेशान हैं।
कॉल सेंटर में सुबह 9 से तीन और तीन से नौ बजे रात की शिफ्ट में ट्रेसिंग टीम काम कर रही है। हर दिन करीब पचास से ज्यादा ऐसे केस होने के कारण रोजाना कांटेक्ट की पेंडेंसी बढ़कर 700 से ज्यादा हो गयी है। क्योंकि टीम हर दिन की नयी लिस्ट के अलावा इतने अतिरिक्त लोगों को और ट्रेस करना पड़ रहा है। वहीं कुछ मरीज कॉल करने पर अपने अस्पताल में भर्ती होने की फर्जी सूचना तक दे रहे हैं। जब तबियत बिगड़ने लगती है तो खुद फोनकर कह रहे हैं कि उनको लेने चार दिन से गाडी़ या एंबुलेंस नहीं पहुंची। कहीं-कहीं एंबुलेंस पहुंचने के आधा और एक घंटे बाद भी मरीज घर से बाहर नहीं आते हैं। इससे रूट में दिए गये बाकी मरीजों का पिकअप भी लेट हो रहा है।

250 से ज्यादा मोबाइल बंद
जुलाई में केस बढ़ने के बाद से जोन, पेशेंट, एंबुलेंस डॉक्टर और अस्पताल के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 26 तारीख से प्रशासन ने ये कॉल सेंटर शुरु किया। करीब ढा़ई सौ से ज्यादा पॉजिटिव लोगो के ऐसे नंबर हैं जो बीते महीने से लगातार स्विच ऑफ आ रहे हैं। हर दिन दो शिफ्ट में एक हजार से ज्यादा कॉल किए जा रहे हैं। यानी पूरे दिन में दो शिफ्ट में दो हजार के लगभग कॉल हो रहे हैं।

कोरोना में लापरवाही बरतना घातक
“कोरोना टेस्ट करवाने के दौरान लोग अपना सही और पूरा पता जरूर दें, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी पूरी मदद की जा सके। ट्रेसिंग नहीं होने का नुकसान मरीज को भी उठाना पड़ सकता है। क्योंकि कोरोना में लापरवाही बरतना घातक या जानलेवा तक हो सकता है।”
-केदार पटेल ,सहायक नोडल अधिकारी

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फाइल फोटो।

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