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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- कोरोना संकट के बीच घरों में बुजुर्ग बच्चों को कहानियां सुना रहे, लेकिन हैरान हूं कि देश में यह परंपरा खत्म हो रही है


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 69वीं बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के कालखंड में दो गज की दूरी जरूरी बन गई है। यह परिवार के लोगों को जोड़ने-पास लाने का काम भी कर रही है। इस दौरान कई परिवारों को दिक्कतें भी आईं। परिवारों के बुजुर्गों ने बच्चों को कहानियां सुनाकर समय बिताया, लेकिन देश में यह परंपरा खत्म हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कहानियां संवेदनशील पक्षों को सामने लाती हैं। जब मां बच्चे को खाना खिलाने के लिए कहानी सुनाती है, उसे देखना दिलचस्प होता है। लंबे समय तक में घुमंतू रूप में रहा। कई घरों में जाता था। मैं बच्चों को कहानियां सुनाता था। वे कहते थे, अंकल चुटकुले सुनाइए। मैं हैरान रह गया कि घरों में कहानियों की परंपरा खत्म हो गई। हमारे यहां तो हितोपदेश, पंचतंत्र जैसी कहानियों की परंपरा रही है। दक्षिण भारत में ही ऐसी परंपरा है, जिसे विल्लूपाट कहते हैं। कई लोग इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। अमर व्यास कहानियों को आगे बढ़ाने में कोशिश में जुटे हुए हैं।’

अपर्णा ने मोदी को सुनाई तेनालीराम की कहानी

मोदी ने स्टोरी टेलर अपर्णा अत्रेया से बात की। अपर्णा ने कहा कि मैं बैंगलोर स्टोरी टेलिंग सोसाइटी की ओर से आपको बधाई देना चाहती हूं। मेरे पति एयरफोर्स में हैं, मैं पैशनेट स्टोरी टेलर हूं। मुझे बच्चों को कहानी के जरिए शिक्षा देने का मौका मिला। दादी से कहानियां सुनने के दौरान ही मुझे लगा कि बच्चों के साथ ऐसा करना कितना दिलचस्प होगा। अपर्णा के साथ उनकी टीम की कई महिलाओं ने मोदी से स्टोरी टेलिंग को लेकर बात की। अपर्णा ने मोदी को विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय और उनके मंत्री तेनालीराम की कहानी सुनाई।

​​​​​​​पिछले महीने देश की टॉय इंडस्ट्री को बेहतर बनाने पर जोर दिया था
पिछले महीने मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘कोरोना काल में देश कई मोर्चों पर एकसाथ लड़ रहा है। यह भी ख्याल आता है कि घर में रहने वाले बच्चों का समय कैसे बीतता होगा? मैंने कहीं पढ़ा कि खिलौने के संबंध में रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि खिलौना वही अच्छा होता है जो अधूरा हो। बच्चे उसे खेल-खेल में तैयार करें। ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री सात लाख करोड़ रुपए की है, लेकिन भारत की इसमें हिस्सेदारी काफी कम है।

खिलौना वो हो जिसे बचपन खेले भी, खिलखिलाए भी। अब कंप्यूटर गेम्स का दौर है। इनमें ज्यादातर की थीम भारतीय होती है। आत्मनिर्भर भारत में टॉय इंडस्ट्री को बड़ी भूमिका निभानी है। असहयोग आंदोलन के समय गांधीजी ने कहा था कि यह भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने का आंदोलन है। ऐसा ही आत्मनिर्भर भारत आंदोलन के साथ भी है।’

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