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भूख से 12 घोड़ियों की मौत, कोरोना संकट के  चलते मालिकों के पास चारे के भी पैसे नहीं, कोई डिलिवरी बॉय बना तो कोई बेच रहा सब्जी


शहर में बीते 24 घंटे में 2 और जुलाई महीने से अब तक 12 घोड़ियों की मौत हो चुकी है। इनके मालिकों का कहना है कि हम अपनी आर्थिक तंगी के कारण चारे का बंदोबस्त नहीं कर पा रहे, भूख से इन जानवरों की मौत हो रही है। दरअसल लॉकडाउन के बाद से ही शादी समारोह पर कई तरह के नियमों की बंदिश है। घोड़ी-बग्गी के व्यवसाय से जुड़े लोगों का काम बंद पड़ा है। इस वजह से यह हालात बने हैं। कोई अब फूड डिलिवरी बॉय बन गया तो किसी ने सब्जी और तालाब से पकड़कर मछलियां बेचनी शुरू कर दी है।

हमारे भूखे मरने की नौबत

फोटो रायपुर के एक घोड़ी व्यवसाय से जुड़े युवक की है, चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा सकती है ये खामोशी एक सवाल भी लिए हुए है कि आखिर सब कुछ कब ठीक होगा।
फोटो रायपुर के एक घोड़ी व्यवसाय से जुड़े युवक की है, चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा सकती है ये खामोशी एक सवाल भी लिए हुए है कि आखिर सब कुछ कब ठीक होगा।

रायपुर के घोड़ी-बग्गी व्यवसाय से जुड़े मो मजहर ने बताया कि हर महीने या हफ्ते में घोड़ियों की मौत हो रही हैं। जानवर भूखे हैं, हमारी भी भूखे मरने की नौबत आन पड़ी है। हम किसी तरह से कर्ज लेकर गुजारा कर रहे हैं। जो सेविंग्स थीं सब खत्म हो गई। शहर में 13 मुझ जैसे व्यवसायी हैं सभी की यही स्थिति है। घोड़ियों को खिलाने के लिए चारे तक के पैसे नहीं हैं, दिन में 4 बार चारा दिया करते थे, अब 2 बार दे रहे हैं, जानवर कमजोर हो रहे हैं, और हमारी माली हालत भी।

कोविड जागरुकता में हो घोड़ी-बग्गी का इस्तेमाल

फोटो रायुपर के तेलीबांधा इलाके की है। कभी एडवांस बुकिंग में इस्तेमाल होने वाली यह बग्गी बीते कई महीनों से ऐसे ही खड़ी है।
फोटो रायुपर के तेलीबांधा इलाके की है। कभी एडवांस बुकिंग में इस्तेमाल होने वाली यह बग्गी बीते कई महीनों से ऐसे ही खड़ी है।

मजहर ने कहा कि हाल ही में कलेक्टर, महापौर, पशुपालन विभाग के लोगों को अपनी समस्या सभी व्यवसाइयों ने बताई है। मगर कोई मदद नहीं मिली, पिछले दिनों वन मंत्री ने सभी घोड़ी व्यवसाइयों को 10-10 हजार रुपए की मदद दी थी। हमारी परेशानी दूर करने के लिए या तो सरकार हमें काम करने की अनुमति दे या कोरोना जागरुकता के लिए बग्गी और पोस्टर लगी घोड़ियों का इस्तेमाल करे, जो हर मुहल्ले में जाकर प्रचार का काम करते हुए रोजगार के मौके भी मुहैया कराएगा।

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फोटो रायपुर की है। सोमवार की सुबह भी एक घोड़ी को मौत के बाद दफनाया गया, मार्च महीने में लगे लॉकडाउन के बाद से अब तक घोड़ी-बग्गी व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला।

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