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रस्सी व टहनियों से बनाया पुल, यहीं से आते-जाते हैं 20 गांव के ग्रामीण


ये तस्वीर दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिलों की सीमा पर स्थित मांडर नाले की है। जिस पर पुल नहीं बना है। ऐसे में मजबूर होकर ग्रामीणों ने पेड़ की टहनियों को रस्सी से गूंथकर जुगाड़ से पुल तैयार किया है। नारायणपुर जिले के 20 से ज्यादा गांवों के करीब 10000 ग्रामीण यहीं से आना-जाना करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक ग्रामीण पानी से भरे नाले को पैदल ही पार करते थे। बारिश में नाले का जलस्तर बढ़ने से समस्या होती है। ऐसे में करीब दो महीने पहले ही इसे ग्रामीणों ने ही मिलकर तैयार किया है। अबूझमाड़ का यह पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में है और सरकार की पहुंच से कोसो दूर है।

इन गांवों के ग्रामीण करते हैं आवाजाही
इंद्रावती नदी पार बसे नारायणपुर ज़िले के ओरछा ब्लॉक के 20 से ज्यादा गांवों की दूरी बारसूर से कम है। ऐसे में ग्रामीण 60 किमी दूर ओरछा जाने की बजाए करीब 30 किमी दूर बारसूर आना ज़्यादा पसंद करते हैं। नाले को पार करने के बाद इंद्रावती नदी भी पार करनी पड़ती है। हालांकि इसके लिए दंतेवाड़ा प्रशासन ने मोटरबोट की व्यवस्था की है। यहां से जाटलूर, थुलथुली, इकुल, तोयनार, बेडमा, लूंगा, हांदावाड़ा सहित अन्य कई गांवों के ग्रामीण आना-जाना करते हैं।

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Rope and twigs bridge, 20 villagers come here

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