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एक दिन की बच्ची को खेत में छोड़ गई मां, काट रही थी चीटियां, किसान ने बचाया और नाम रखा कंगना


उडुमकेला में जीवितपुत्रिका के व्रत के दिन मैनपाट में एक निर्मोही मां ने 9 महीने तक अपनी कोख में रखने के बाद जब कंगना को जन्म दिया तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि खेत में छोड़कर चली गई।
जब बच्ची को मातृछाया पहुंचाया गया तो यहां उसका नाम कंगना रखा गया। खेत मालिक की नजर कंगना पर पड़ी तो उसे चीटियां काट रही थी, जिससे वह रो रही थी। यह देखकर खेत मालिक का दिल पसीज गया और उसने पुलिस और चाइल्ड लाइन को जानकारी दी। बच्ची का वजन ढाई किलो है और वह स्वस्थ है। मैनपाट के उडुमकेला में सुबह एक किसान फसल देखने पहुंचा तो खेत के मेढ़ से लगी झाड़ी के पास उसे बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। वहां उसे मासूम कंगना दिखी। उसने उसके शरीर में चल रही चीटियों को हटाया फिर गोद में उठा लिया। इसकी खबर चाइल्ड लाइन को दी। पुलिस वाहन से उसे सीतापुर अस्पताल में लाया, जहां बच्ची स्वस्थ मिली।

18 माह में 25 मासूमों को छोड़ा इनमें 15 बेटियां व 10 बेटे शामिल
मातृ छाया संस्थान में पिछले 18 माह में 25 दुधमुंहे बच्चों को जन्म के तत्काल बाद लावारिस हालत में खेत, झाड़ियों और सड़क किनारे फेंक दिया गया, लेकिन वे बच्चे स्वस्थ मिले। खास बात है कि इन 25 मासूमों में 15 बेटियां थीं और 10 बेटे।

जोखिम में थी कंगना की जिंदगी नाश्ता छोड़ रेस्क्यू के लिए पहुंचे
चाइल्ड लाइन वर्कर बलजीत कुजूर ने बताया सुबह उन्हें लावारिस बच्ची के मिलने की जानकारी मिली। वे बिना नाश्ता किए बच्ची को रेस्क्यू करने निकल गए। मितानीन और एएनएम की मदद से उसे वंदना स्थित हेल्थ सेंटर लेकर पहुंचे। यहां नाल बांधा। सीडब्ल्यूसी में पेश कर उसे मातृछाया लेकर पहुंचे।

गांव में जीवितपुत्रिका का व्रत और इधर एक मां बच्ची छोड़ गई
जब सुबह लावारिस हाल में बच्ची के मिलने की खबर गांव में फैली तो महिलाओं का कहना था कि हम सब बेटा-बेटियाें की लंबी उम्र के लिए यहां निर्जला उपवास हैं और ये कैसी मां है, जिसने गर्भ से बाहर आते ही बेटी को यहां छोड़ गई।

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The mother left one day old girl in the field, the ants were being cut by the farmer and named Kangana, will be looked after in Matruchaya

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