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लागत 4 गुना फिर भी मरीजों को नहीं मिल रही ‘ऑक्सीजन’; एमसीएच में मई में ऑक्सीजन वाले 35 बेड तैयार कराए गए


प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी ऑक्सीजन वाले बेड तैयार कराने को लेकर में स्वास्थ्य विभाग सुस्त है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी अफसरों ने 19 सितंबर को बैठक में 10 दिन के भीतर 100 ऑक्सीजन बेड तैयार करने का दावा किया था लेकिन 20 अक्टूबर से पहले इसके पूरा होने की संभावना कम है। मेडिकल कॉलेज इस पर खर्च भी सामान्य से चार गुना कर रहा है। टालमटोल ज्यादा गंभीरता कम- मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग के निर्माण के वक्त ड्राइंग डिजाइन में गलती के कारण ऑक्सीजन पाइपलाइन और सेंट्रल एसी की व्यवस्था नहीं रखी गई है। पांच सालों में मंत्री, शासन के सचिव, कलेक्टरों ने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया, लेकिन मेडिकल कॉलेज ने जरूरी सुधार नहीं किया।

पहले कोविड अस्पताल (एमसीएच) में 35 बेड पर ऑक्सीजन पाइपलाइन मई में लगवाई गई। मरीज बढ़े और ऑक्सीजन वाले बेड की जरूरत पड़ी तो कलेक्टर भीम सिंह ने समीक्षा की, हफ्ते में एक बार जाकर निरीक्षण कर रहे हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी के अफसर कहते हैं कि साइट क्लियर नहीं है इसलिए काम में देर हो रही है। कलेक्टर की डांट, फटकार से 127 बेड पर ऑक्सीजन पाइपलाइन का काम शुरू किया गया, इसे पूरा होने में कम से कम 20 दिन और लगेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर बार-बार झूठ बोल रहा है।

इसलिए अटकते हैं सरकारी काम

जानकारी के मुताबिक ऑक्सीजन पाइपलाइन के काम के लिए पीडब्ल्यूडी ने 12 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बनाया था। मेडिकल कॉलेज के अफसर अपनी पसंद के ही वेंडर से काम कराने की जिद में प्रोजेक्ट महीनों अटका कर रखा। 127 बेड पर ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाने के लिए एक करोड़ 40 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। 60 लाख रुपए की निविदा भरने वाले कंपनी को काम नहीं दिया गया। रायपुर और भुवनेश्वर में ऐसे काम करने वाली कंपनी से जानकारी ली गई तो पता चला कि अस्पताल में 100 बेड पर ऑक्सीजन पाइपलाइन के साथ प्वाइंट देने में अधिकतम दो महीने लगेंगे। 25 लाख रुपए तक पाइपलाइन डाली जा सकती है और 15 लाख रुपए में ऑक्सीजन प्लांट लग सकता है। इस काम पर मेडिकल कॉलेज ने 6 महीने गंवा दिए और खर्च भी चार गुना हो रहा है।

निजी अस्पतालों की सुविधा गिना रहे हैं सीएमएचओ

600 बेड तैयार करने के सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश को एक महीना बीत गया है। स्वास्थ्य विभाग अभी तैयारी में ही जुटा है। सीएमएचओ डा. एसएन केशरी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन वाले 150 बेड, लाेइंग अस्पताल में 30 बेड, सिद्धेश्वर नेत्रालय में 50 तथा परसदा के जिंदल अस्पताल में 50 ऑक्सीजन बेड की तैयारी चल रही है। जिसे जल्द ही पूरा करा दिया जाएगा। जिले में 25 बेड एमसीएच ऑक्सीजन, 30 बेड अपेक्स, 20 फोर्टिस, मेट्राे हास्पिटल 10, जेएमएजे मिशन अस्पताल में 10 तथा मेडिकल कॉलेज में 50 ऑक्सीजन वाले बेड चालू हैं।

शासन की मंशा के अनरूप हो रहा काम

मेडिकल कॉलेज में नया सेटअप चालू करने के लिए 20 दिन का समय मांगा गया है। प्राइवेट अस्पतालाें में एक सप्ताह के अंदर ऑक्सीजन बेड तैयार करने के लिए कहा गया है। शुक्रवार से 50 ऑक्सीजन बेड शुरू करा दिए गए है। गंभीर मरीजाें काे देखते हुए अभी पर्याप्त ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है।”
डाॅ. एसएन केशरी, सीएमएचओ

15 दिन में चालू हाेंगे 128 ऑक्सीजन बेड

काेविड मरीजाें के लिए ऑक्सीजन पाइप लाइन बनाने के जाे टेंडर कराया गया है। इसमें 128 प्वाइंट पर काम चल रहा है।15 दिन के अंदर ऑक्सीजन पाइप लाइन चालू करने की बात कही गई है। मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग में सेंट्रल एसी का काम जब तक पूरा नहीं हाेगा, तब तक ऑक्सीजन पाइप लाइन का काम नहीं हाे सकता। नई बिल्डिंग बनी थी तब के प्रोजेक्ट में ऑक्सीजन पाइप लाइन व सेंट्रल एसी का काम शामिल नहीं था। इसलिए देरी हाे रही है।’’
डाॅ. पीएम लूका, डीन मेडिकल कॉलेज

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4 times the cost yet patients are not getting ‘oxygen’

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