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कोरोना टेस्ट में निगेटिव मिले 400 लोग, तब खींचा फूल रथ


दशहरा पर्व में रविवार से फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई। सालों से चली आ रही इस परंपरा में कोरोना संक्रमण के कारण कुछ बदलाव हुआ। ऐसा पहली बार हुआ जब रथ की साज-सज्जा पूरी होने के बाद फायर ब्रिगेड के वाहन से पहले पूरे रथ को सैनिटाइज किया गया।
इतना ही नहीं, रथ के परिक्रमा पथ को भी सैनिटाइज किया गया। रस्म के पहले दिन दंतेश्वरी देवी के छत्र को ससम्मान पूजा-अर्चना करने के बाद पुजारी इन्हें लेकर फूल रथ पर सवार हुए। इसके बाद मावली मंदिर से निकलकर गोलबाजार होते हुए रथ ने राजमहल की सिंहड्योढ़ी तक पहली परिक्रमा पूरी की। रथ का संचालन आने वाले 5 दिनों तक जारी रहेगा।
फूलरथ को गेंदे के फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। दंतेश्वरी मंदिर के पुजारियों ने राजपरिवार के सदस्य कमल चंद भंजदेव एवं दशहरा कमेटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी में देवी का पूजन किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ माईजी का छत्र सिरासार स्थित मावली देवी मंदिर ले जाया गया। यहां से छत्र जगन्नाथ मंदिर परिसर स्थित राम मंदिर में लाया गया। यहां नजर उतारनी रस्म के बाद देवी के छत्र को लेकर पुजारी फूल रथ में आरूढ़ हुए।

कोरोना टेस्ट में निगेटिव आने पर शामिल हुए
फूल रथ की परिक्रमा की जिम्मेदारी सालों से जिले के जगदलपुर ओर तोकापाल के 36 गांव के लोगों को दी गई है। इस साल कोरोना के चलते फूलरथ खींचने वाले ग्रामीणों की कोरोना जांच कराई गई। जिसमें निगेटिव पाए गए 400 ग्रामीणों को ही रथ खींचने की अनुमति दी गई है। आरआई सतीश मिश्रा ने बताया कि जिन लोंगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है उन्हें ही इस रस्म में शामिल होने का मौका दिया गया है। फूलरथ परिक्रमा विधान को जिला प्रशासन के द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत पूरा किया जा रहा है।

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400 people found negative in corona test, then pulled flower chariot

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