Our website is made possible by displaying online advertisements to our visitors. Please consider supporting us by whitelisting our website.

वो कारसेवक जिसकी आंखों के सामने गिराया गया विवादित ढांचा, सियासी पहचान और अब दो वक्त की रोटी को मोहताज


बच्चा-बच्चा राम का, जन्म भूमि के काम का… यही नारा उन दिनों लगाया जाता था। सन 1992 में एक पैंट और शर्ट साथ लेकर मैं यूपी के लिए निकल गया। वहां मेरी आंखों के सामने ही वो विवादित ढांचा गिराया गया, जय श्री राम के नारे लगाए जा रहे थे, और मंदिर बनाने का जुनून सवार था लोगों पर । पुलिस के डंडे और गोलियों की आवाज के बीच वो ढांचा गिराया गया। आज खुशी है कि बाबरी मसले पर कोर्ट से फैसला दिया और आरोपी बरी हुए, ये बातें कहीं रायपुर के संजय श्रीवास्तव ने। देशभर से अयोध्या में जुटे कारसेवकों में संजय भी शामिल थे। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और धार्मिक घटना उनकी आंखों के सामने घटी। संजय आरएसएस और भाजपा से ताल्लुक भी रखते हैं।

हमें आतंकवादी कहा गया
कारसेवक संजय ने बताया कि 6 दिंसबर 1992 को विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। इसके लिए कई लोगों ने जानें दी, उनका खून बहा। मुझे याद है, कारसेवकों को रोकने के लिए पुलिस रबर की गोलियां मार रही थी। मेरे साथ वहां मौजूद कई लोगों को गोलियां लगी। पुलिस हमें आतंकवादी कहती थी और जब कोई हाथ आ जाए तो उसे पीटा जाता था। मुझे राम मंदिर आंदोलन के दौरान में 10 दिन तक बांदा जिले की हमीरपुर उपजेल में रखा गया था। पीट पर अब डंडों के वो निशान तो नहीं हैं जो पुलिस ने उस वक्त पीटकर दिए थे। हमारे कई साथियों के हाथ-पैर बांधकर पुलिस ने नदी में फेंक दिए थे। वो दस दिन बस हंसते-हंसते झेल गया था मैं।

यह वो दस्तावेज हैं जो राम मंदिर के आंदोलन से जुड़े हैं, संजय श्रीवास्तव के पास जेल का सर्टीफिकेट भी है।
यह वो दस्तावेज हैं जो राम मंदिर के आंदोलन से जुड़े हैं, संजय श्रीवास्तव के पास जेल का सर्टीफिकेट भी है।

कुछ लोगों ने नाम की वजह से फायदा उठा लिया
संजय ने बताया कि शहर में कुछ दूसरे नेताओं का नाम भी संजय श्रीवास्तव है। उन्होंने बताया कि इसका उन्हें फायदा मिला । जब छत्तीसगढ़ में 2003 के बाद भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व बढ़ा तो संगठन के पदों और नगर निगम के चुनावों में मेरे नाम पर कुछ नेताओं ने फायदा उठा लिया। मगर मैं उपेक्षा का शिकार ही रहा। हमारी मेहनत का फल डॉ रमन सिंह को मिला जो 15 साल राज्य में राज करते रहे। मगर जो जमीन से जुड़े कार्यकर्ता थे उनकी उपेक्षा हुई, यही नतीजा है पार्टी 15 सीट पर आकर सिमट गई। मगर मैं जब तक जीवित हूं, भगवान राम की सेवा के काम में जुटा और डटा रहूंगा।

संजय श्रीवास्तव ने बताया कि राम मंदिर का बनना और बाबरी मामले में कोर्ट का फैसला उनकी जिंदगी में काफी मायने रखता है, इससे उन्हें बेहद खुशी है।
संजय श्रीवास्तव ने बताया कि राम मंदिर का बनना और बाबरी मामले में कोर्ट का फैसला उनकी जिंदगी में काफी मायने रखता है, इससे उन्हें बेहद खुशी है।

बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई
संजय ने बताया कि जेल में रहने का वो प्रमाण पत्र दिखाकर कभी कोई फायदा लेने की कोशिश मैंने नहीं की। आज ऑटो चलाता हूं। लॉकडाउन लागू हुआ तो सभी लोगों का व्यवसाय खत्म हुआ। मेरी तो रोज होने वाले आमदनी रुक गई। किराए के मकान में रहता हूं, इसके भी पैसे नहीं है। बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है। आज मैं बेकारी और लाचारी की जिंदगी जीने को मजबूर हूं। मेरी जो जिंदगी कटनी थी कट गई, आने वाला समय अच्छा हो यही चाहता हूं। देश और धर्म के लिए जान न्योछावर करने को तैयार रहने वाले हम जैसों को सम्मान मिले, ताकि लोग भी हमें याद रखें। बस यही चाहता हूं।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


फोटो रायपुर में रहने वाले कारसेवक संजय श्रीवास्तव की है। नस्कार, या हैलो की जगह ये जय श्री राम ही कहते हैं।

Powered by WPeMatico

%d bloggers like this: