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मोदी सरकार की चौथी बड़ी योजना से छत्तीसगढ़ वंचित, केंद्रीय ग्रामीण स्वामित्व योजना में भी राज्य शामिल नहीं


पी. श्रीनिवास राव/ मनोज व्यास| पीएम नरेंद्र मोदी ने दो दिन पहले ग्रामीण स्वामित्व योजना शुरू की। इस योजना में पड़ोसी मध्यप्रदेश सहित हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश तो हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ नहीं है। मोदी 2.0 में शुरू की गई यह चौथी ऐसी योजना है जिसमें छत्तीसगढ़ शामिल नहीं है। लॉकडाउन के दौरान जब पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना शुरू की, तब भी छत्तीसगढ़ का नाम नहीं था। जबकि दूसरे राज्यों में मजदूरी करने गए 5 लाख प्रवासी लौटे हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार से टकराव की शुरुआत धान बोनस से शुरू हुई थी। रमन सरकार में तो केंद्र ने बोनस देने की छूट दी थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनी तो चावल खरीदने से मना कर दिया। हालांकि भूपेश सरकार ने राजीव किसान न्याय योजना शुरू कर किसानों को धान का प्रति क्विंटल 2500 रुपए देने का वादा पूरा किया। इसी के साथ छात्रावास व दाल भात केंद्रों के लिए जो चावल दिया जाता था, उसे बंद कर दिया गया। इसके बाद कई योजनाएं शुरू हुईं, लेकिन उसमें छत्तीसगढ़ शामिल नहीं है।

किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा
किसान सम्मान निधि योजना का लाभ राज्य के सभी किसानों को नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि यहां से 34 लाख किसानों की सूची भेजी जा रही है, जबकि 18 लाख को शामिल नहीं किया जा रहा। इसमें कई तरह की तकनीकी दिक्कतें भी हैं। जबकि केंद्र सरकार का यह तर्क था कि पेंशन पाने वाले, इन्कम टैक्स रिटर्न जमा करने वाले और विधायक-मंत्रियों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए उन्हें बाहर किया गया है।

वन नेशन वन राशन कार्ड के दूसरे चरण में भी नाम नहीं
वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू होने के बाद पहले चरण में छत्तीसगढ़ को शामिल नहीं किया गया। उस समय यह तर्क दिया गया था कि छत्तीसगढ़ को दूसरे चरण में लिया जाएगा। कुछ महीने पहले ही दूसरे चरण का भी ऐलान किया गया, लेकिन इसमें भी छत्तीसगढ़ का नाम नहीं है। यहां भी बड़ी संख्या में मजदूर कमाने-खाने जाते हैं। इसे लेकर केंद्र सरकार तर्क दे रही है कि दूरस्थ इलाकों में कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ को शामिल नहीं किया जा रहा है।

टैक्स से लेकर अनुदान तक देने में भेदभाव, 52 की जगह 16 हजार करोड़ रु. ही मिले
केंद्र पर राज्य को हक देने के मामले में भी भेदभाव बरतने के आरोप लगते रहे हैं। भास्कर की पड़ताल के अनुसार सालभर में टैक्स शेयर के रुप में 26 हजार करोड़ रुपए मिलने थे लेकिन मात्र 10 हजार करोड़ ही दिए गए। इसी तरह से केंद्र की अन्य योजनाओं में से भी राज्यों को ग्रांट दिया जाता है। इसमें से छत्तीसगढ़ के हिस्से 26600 करोड़ रुपए आते हैं। इसमें भी अब तक राज्य को केवल 6 हजार करोड़ ही दिए जा सके हैं। इतना ही जीएसटी क्षतिपूर्ति देने में भी केंद्र ने छत्तीसगढ़ को सबसे पीछे रखा है। राज्य को करीब 9 हजार करोड़ मिलने हैं। लेकिन इस साल अब तक मात्र 350 करोड़ रुपए ही दिए गए हैं। साल 2020-21 के लिए यह पहला क्लेम था। राज्य की ओर से पहली किस्त के रुप में 1729 करोड़ की क्षतिपूर्ति का क्लेम किया गया था। लेकिन केंद्र ने दिया मात्र 350.17 करोड़ रुपए।
राज्य के जीएसटी मंत्री सिंहदेव का कहना है कि जब से राज्य में कांग्रेस की सरकार आई तब से क्षतिपूर्ति में केंद्र सहयोग नहीं कर रहा। जबकि राज्य ने केंद्र और राज्य दोनों ही जीएसटी में अच्छी वसूली की है। हाल के अगस्त और सितंबर महीनों में कुल 3800 करोड़ की टैक्स कलेक्शन हुआ है। इसके विरुद्ध हमने करीब 3400 करोड़ की क्षतिपूर्ति का दावा किया था। लेकिन हमें केवल 350 करोड़ ही दिए गए। इससे पहले साल 2019-20 में भी हमें 1116.99 करोड़ दिए गए थे।

44 फीसदी हिस्सा जंगलों से घिरा
राज्य का 44% हिस्सा जंगलों से घिरा है। यहां लोगों को वन अधिकार पट्टा देने के लिए लंबे समय से मुहिम चल रही है। मैदानी हिस्सों में भी आबादी जमीन पर रहने वालों को पट्टे के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने पहल की है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इस योजना में ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों को शामिल किया, लेकिन छत्तीसगढ़ को इसमें छोड़ दिया।

छत्तीसगढ़ की अनदेखी हो रही है
“केंद्र की योजनाएं सभी राज्यों के लिए होती हैं। पिछले कुछ महीनों से छत्तीसगढ़ की अनदेखी हो रही है। केंद्र को सभी राज्यों का ध्यान रखना चाहिए। दलगत राजनीति से राज्यों को नहीं देखना चाहिए। छत्तीसगढ़ को इन योजनाओं में शामिल करने हम लगातार दबाव बनाए हुए हैं।”
-मो. अकबर, कैबिनेट मंत्री एवं प्रवक्ता छत्तीसगढ़ सरकार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर को स्वामित्व योजना की शुरुआत की।

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