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डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस को 110वें जन्मदिन पर याद किया गया, उन्होंने दूसरे वर्ल्ड वार में चीन की मदद की थी, कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल भी हुए थे


चीन ने रविवार को भारतीय डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनिस को उनके 110 वें जन्मदिन पर याद किया। चीन सरकार के चाइनीज पीपुल्स एसोसिएशन फॉर फ्रेंडशिप विद फॉरेन कंट्रीज (सीपीएएफएफसी) ने इस मौके पर एक ऑनलाइन कार्यक्रम किया। इसमें पेकिंग यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के डायरेक्टर भी शामिल हुए।

डॉ कोटनिस महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले थे। उन्होंने दूसरे वर्ल्ड वार के समय चीन की मदद की थी। वे 1942 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल भी हुए थे, लेकिन इसी साल महज 32 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी। उन्हें चीन में के डिहुआ के नाम से जाना जाता है।

1938 में चीन गए थे डॉ. कोटनिस

1938 में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने चीन की मदद के लिए पांच डॉक्टरों की टीम चीन भेजी थी। इनमें डॉ कोटनिस भी शामिल थे। चीन ने उनकी याद में एक ऑनलाइन कार्यक्रम किया। इसमें भारत स्थित चीनी दूतावास के सीनियर ऑफिसर मा जिया और दोनों देशों की कई यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स और टीचर शामिल हुए। इस मौके पर सीपीएफएफसी के चेयरमैन लिन सोंगटियान ने कहा, ‘मौजूदा समय में डॉ कोटनिस के विचारों को समझने की जरूरत है।’

‘डॉ. कोटनिस चीन के अच्छे दोस्त थे’

लिन ने कहा, ‘डॉ. कोटनिस ने क्रांति के मुश्किल समय में चीन की मदद की। उनके कामों की चीन के नेता माओ जेडोंग ने भी तारीफ की थी। हम आज चीन के इस अच्छे दोस्त और एक इंटरनेशनल फाइटर को याद कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवता से जुड़े काम किए थे। हम चीन और भारत की युवा पीढ़ी से अपील करते हैं कि डॉ कोटनिस के विचारों को आगे ले जाएं।’

चीन में डॉ. कोटनिस के कई मेमोरियल हैं

चीन के शिजियाझुआंग और हुबेई राज्य में डॉ कोटनिस के मेमोरियल बनाए गए हैं। शिजियाझुआंग के डिहुआ मेडिकल साइंस सेकंड्री स्पेशलाइज्ड स्कूल का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है। उन्होंने चीन की गुओ किंगलाम से शादी की थी। 2012 में किंगलाम का निधन हो गया। इस साल सितंबर में शिजियाझुआंग में डॉ कोटनिस की कांसे की मूर्ति लगाई गई है।

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चीन के शिजियाझुआंग में डॉ कोटनिस की यह मूर्ति इस साल सितंबर में लगाई गई थी। यहां पर दो जगहों पर उनके मेमोरियल बनाए गए हैं। -फाइल फोटो

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