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संरक्षित धरोहर नहीं होने के कारण तोड़ा कोतवाली भवन


ब्रिटिश काल की एक सदी पुरानी सिटी कोतवाली की इमारत को स्मार्ट सिटी के द्वारा तोड़ने पर पुरातत्व और धरोहर संरक्षण के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। ऐतिहासिक इमारत के रातों रात जमींदोज होने के अगले दिन पुरातत्व विभाग ने भी साफ कर दिया है कि ये इमारत बेशक एक सदी पुरानी थी, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार की ओर से घोषित पुरातात्विक धरोहर सूची में ये थी ही नहीं लिहाजा इसको तोड़ा जाना नियमों का उल्लंघन नहीं है। स्मार्ट सिटी के जीएम एसके सुंदरानी ने बताया कि इस चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किया जा रहा है। बहुमंजिला परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लेस कर स्मार्ट कोतवाली का नया स्वरूप सामने आएगा। स्मार्ट सिटी गांधी मैदान के पास सिटी कोतवाली के इस पुराने परिसर के 14 हजार वर्ग फीट जगह पर 5 करोड़ की लागत में पांच मंजिला हाइटेक स्मार्ट कोतवाली बना रहा है़। एक नवंबर को सीएम भूपेश बघेल इसका उद्घाटन करेंगे। स्मार्ट कोतवाली का काम अंतिम चरण में है। यही नहीं स्मार्ट सिटी के अगले प्लान के तहत सिटी कोतवाली के इस चौराहे पर बेतरतीब ट्रैफिक को व्यवस्थित करने की योजना भी है।

“सिटी कोतवाली की इमारत राज्य या केंद्र की ओर से प्रदेश की धरोहर सूची में नहीं थी। लिहाजा इमारत के तोड़े जाने पर नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।”
-अमृत विकास तोपनो, डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग

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Cotwali building broken due to lack of protected heritage

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