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पर्यावरण के लिए भी खतरनाक हैं ड्रग्स, अमेरिका में एक साल में गांजा उत्पादन से 30 लाख कारों जितना कार्बन डाय ऑक्साइड फैलता है


टिम शाओनबर्ग. दुनियाभर में नशे का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कोकेन का उत्पादन बड़े स्तर पर हो रहा है, बीते दशक से अफीम भी ट्रेंड में बनी हुई है। इसके अलावा नीदरलैंड्स में सिंथेटिक ड्रग्स का मार्केट बढ़ता जा रहा है और कुछ देशों में गांजा (कैनेबिस) को लीगल किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, साल 2018 में दुनिया भर में 26.9 करोड़ लोग ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे थे। अब यह बात तो सभी जानते हैं कि ड्रग्स हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन यह जानकारी रखने वाले बहुत ही कम लोग होंगे कि ड्रग्स पर्यावरण को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिका में गांजा उत्पादन में देश की कुल एनर्जी का 1% खर्च होता है
2018 में गांजा का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 19.2 करोड़ थी और तंबाकू और शराब को हटा दिया जाए, तो दुनियाभर में यह नशा सबसे ज्यादा पॉपुलर भी है। अमेरिका में मेरीजुआना को लीगल करने की कोशिशें भी जोरों पर हैं। देश में इसका बाजार अरबों डॉलर का है। हालांकि, इसके उत्पादन में देश के संसाधनों का बहुत बड़ा हिस्सा खर्च होता है। एक अनुमान के मुताबिक, गांजा के उत्पादन में देश की कुल एनर्जी का 1% खर्च होता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस की रिपोर्ट बताती है “अमेरिका में एक साल के भीतर गांजा के इंडोर प्रोडक्शन में लगभग 1.5 करोड़ मैट्रिक टन कार्बन डाय ऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ है। यह हर साल 30 लाख कारों से होने वाले उत्सर्जन के बराबर है।”

पानी पर भी बढ़ता है तनाव
कैनेबिस के पौधे को काफी पानी की जरूरत पड़ती है। इस पौधे को टमाटर या अंगूर के मुकाबले दोगुने पानी की जरूरत होती है। अमेरिका में उपयोग में लाए जाने वाले 70% गांजे का उत्पादन अकेले कैलिफोर्निया में होता है। इतनी बड़े खेती में प्रति दिन हर एक पौधे को 22 लीटर पानी की जरूरत होती है। कैलिफोरनियन डिपार्टमेंट ऑफ फिशरीज एंड वाइल्डलाइफ के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि बाहर की जा रही इस अवैध खेती ने कई जगहों पर जलस्तर कम कर दिया है।

कोकेन के लिए साफ किए जा रहे हैं जंगल
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, साल 2018 में कोलंबिया के पास 1120 टन शुद्ध कोकेन के उत्पादन की क्षमता थी। 2001 से लेकर अब तक कोका (कोकेन बनाने वाला पौधा) की खेती के लिए 3 लाख हेक्टेयर (करीब 74 करोड़ 10 लाख एकड़) से ज्यादा जंगलों को साफ किया जा चुका है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगोन में जियोग्राफर पाउलो सेंडोवल का ताजा सैटेलाइट डेटा बताता है कि कोका के 50 हजार हेक्टेयर की खेती कोलंबिया के केवल अमेजन क्षेत्र में हो रही है।

कोका की पत्तियां केवल जंगल में ही नहीं उगाई जा रही हैं। इनका उत्पादन खुफिया लैब में भी होता है। इस काम में अमोनिया, एसीटोन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसे कई खतरनाक कैमिकल्स का इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि लाखों लीटर पदार्थों को मिट्टी और नदियों में फेंक दिया जाता है। 2015 की ईयू रिपोर्ट बताती है कि ऐसे प्रदूषित पानी में रहने वाले पौधों और जानवरों की संख्या थोड़ी ही बची है।

हालांकि, कोलंबिया सरकार कोका के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। इस अभियान में हवाई जहाजों से हाई कंसन्ट्रेटेड हर्बिसाइड ग्लायफोसेट का छिड़काव किया गया। इस तरीके से कोका की काफी फसल तो खत्म हो गई, लेकिन इसने नजदीकी जंगलों और खेतों को भी नुकसान पहुंचाया है।

कोका के बागानों का सर्वे करते हुए कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक। उनकी सरकार कोका को हर्बिसाइड की मदद से खत्म कर रही है।

बॉलीवुड में चल रहे ड्रग्स विवाद में भी आया था एमडीएमए का नाम
हाल ही के कुछ वर्षों में कथित पार्टी ड्रग्स काफी पॉपुलर हुए हैं। बेल्जियम और नीदरलैंड्स, सिंथेटिक ड्रग्स के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। एक किलो एमडीएमए के उत्पादन में 10 किलो जहरीला वेस्ट निकलता है। इस तरह के वेस्ट में सोडियम हाइड्रॉक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड्स और एसीटोन शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर इन पदार्थों को प्रोटेक्टिव सूट पहनकर डिस्पोज किया जाता है।

डच वॉटर रिसर्च इंस्टीट्यूट (KWR) ने अनुमान लगाया है कि 2017 में करीब 7 हजार टन पदार्थ को या तो कहीं ड्रम में डालकर फेंक दिया गया है या जमीन और नदियों में बहा दिया गया है। डच पब्लिक ब्रॉडकास्टर NOS की एक रिपोर्ट चलाई गई थी, जिसमें यह दिखाया गया था कि ये लिक्विड कितने खतरनाक हो सकते हैं। इस रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने पीले सोडियम हाइड्रॉक्साइड सॉल्यूशन में चिकन का पैर डुबोया था। दो दिन बाद मांस पूरी तरह घुल गया और केवल हड्डी ही बची थी।

अफगानिस्तान में पानी का स्तर हो रहा है कम
यूएन के अनुसार, 2019 में दुनिया में 3 लाख 37 हजार फुटबॉल फील्ड जितनी जमीन पर अफीम की खेती हो रही थी। यह इलाका पेरिस के कुल आकार से 23 गुना ज्यादा है। अफीम के मुख्य उत्पादक म्यांमार, मैक्सिको और अफगानिस्तान हैं। इन देशों में दुनिया की 84% अफीम उगाई जाती है।

अफगानिस्तान के दक्षिण-पश्चिम इलाकों में अफीम के खेत ज्यादा फैले हैं। इन इलाकों में 1990 के समय में रेगिस्तान के अलावा कुछ नहीं था, लेकिन अब यहां कुछ 14 लाख लोग अफीम और दूसरी खेती से अपना घर चला रहे हैं। इन क्षेत्रों को हरा बनाने में बहुत बड़ा हाथ सोलर एनर्जी से चलने वाले 50 हजार पानी के पंप का है।

सोशियो-इकोनॉमिस्ट डेविड मैन्सफील्ड की एक रिपोर्ट में पता चला है कि क्षेत्र में ग्राउंड वॉटर का स्तर हर साल 3 मीटर कम हो रहा है। इसके अलावा किसान खरपतवार को रोकने के लिए कैमिकल फर्टिलाइजर और मजबूत कीटनाशकों का भी उपयोग करते हैं। ग्राउंड वॉटर टेस्ट से पता चला है कि यहां नाइट्रेट का स्तर ज्यादा है। इससे ब्लू बेबी सिंड्रोम का जोखिम बढ़ता है, जिससे दिल में परेशानियां और नवजातों की मौत हो सकती है।

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दक्षिणी अफगानिस्तान में करीब 14 लाख लोग अफीम की खेती करते हैं। यहां इस खेती की वजह से पानी का स्तर तेजी से कम हो रहा है।

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