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कोरापुट से आए परिजन, दो दिन बाद यहीं किया बुजुर्ग का अंतिम संस्कार


ओडिशा के कोरापुट जिले के कुसमी के वृद्ध के कोरोना संक्रमित होने के बाद शनिवार को मौत हो गई थी और उनके शव को उनके गृहग्राम लेकर जाने में कोरापुट प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद बस्तर रेडक्रॉस सोसाइटी की मदद से आखिर जगदलपुर के खड़कघाट स्थित मुक्तिधाम में परिजन ने उनका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मृतक की पत्नी, बेटे, दो बेटियां और दो दामाद जगदलपुर पहुंचे थे। बेटे और दामादों ने पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार की परंपराएं निभाईं। इसके साथ ही यहां न आ पाने वाली उनकी बेटी को भी वीडियोकॉल पर अंतिम दर्शन करवाए गए।
मृत वृद्ध के परिजनों का कोरापुट प्रशासन के प्रति आक्रोश देखने को मिला, जबकि उन्होंने हिंदू परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करवाने के चलते भास्कर और बस्तर प्रशासन को धन्यवाद भी ज्ञापित किया है। परिजनों ने बताया कि जिस तरह से कोरापुट प्रशासन ने पिता के शव को लाने किसी भी तरह का सहयोग नहीं दिया, वहीं बस्तर प्रशासन ने यथासंभव मदद की है।

48 घंटे मेकॉज में ही पड़ा रहा शव, कोरापुट जिला प्रशासन ने नहीं दी लाने की अनुमति
शनिवार को कोरापुट जिले के कुसमी के रहने वाले वृद्ध की कोरोना से मौत के बाद करीब 36 घंटों से ज्यादा समय तक शव सिर्फ इसलिए मेकॉज में पड़ा रहा कि परिजनों को उनका शव तो सौंप दिया जाएगा लेकिन कोरापुट के प्रशासन के असहयोगात्मक रवैए ने वृद्ध के परिजनों को अंदर तक आहत किया। इसके बाद उन्हाेंने भास्कर के जरिए बस्तर जिला प्रशासन से मदद मांगी। बाद में रेडक्रॉस सोसाइटी ने बस्तर कलेक्टर के कहने पर सोमवार को खड़कघाट स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार करवा दिया।

भास्कर की पहल पर बस्तर प्रशासन और रेडक्रॉस ने करवाया अंतिम संस्कार
भास्कर की पहल पर बस्तर जिला प्रशासन और रेडक्रॉस सोसाइटी ने भरपूर सहयोग दिया। इसके लिए जीवनभर के लिए आभारी रहेंगे। अंतिम संस्कार के दौरान रेडक्रॉस सोसाइटी के उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर चेरियन ने बेटी को वीडियोकॉल कर पिता के अंतिम संस्कार को देख पाने की मौका दिया। पिता के जाने के दु:ख के बावजूद कोरापुट प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। अगर कोरापुट प्रशासन के भरोसे बैठे होते तो अब तक पिता का अंतिम संस्कार न हो पाता। भास्कर और बस्तर जिला प्रशासन की पहल पर पिता को मुक्ति दिलाई गई है। इसके लिए भास्कर और बस्तर जिला प्रशासन को कोटि-कोटि धन्यवाद।
(जैसा कि वृद्ध के परिजन ने भास्कर से कहा)

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Family members from Koraput, cremated elders here after two days

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