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मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों ने बेची चाय, क्योंकि इनका वेतन स्टूडेंट के स्टाइपेंड से भी कम


रायपुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को प्रदेश का सबसे बड़ा मेडिकल संस्थान माना गया है। यहां पढ़ाने वाले शिक्षक वेतन विसंगती से नाराज हैं। शनिवार को कैंपस के बाहर डॉक्टर्स ने चाय और भजिया बेचा। आस-पास मौजूद जरुरतमंदों को मुफ्त में चाय पिलाई। यह विरोध प्रदर्शन था, इन्हें नजरअंदाज कर रहे प्रशासन के खिलाफ। डॉक्टर पुष्पेंद्र ने बताया कि यहां के स्टूडेंट को दिया जाने वाला स्टाइपेंड पढ़ाने वालों से ज्यादा है। जो स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं, प्रशासन को उनके वेतन के बारे में सोचना चाहिए। हम डेढ़ साल से इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश में हैं। मगर कोई सुनने को राजी नहीं है।

डॉ पुष्पेंद्र ने आगे कहा कि पिछले 19 दिनों से संविदा शिक्षक संघ के बैनर तले हम सत्याग्रह कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन सिर्फ कमेटियां बना रहा है मगर जमीनी स्तर पर हमारी समस्याएं जस की तस हैं। इसलिए हम अपने विरोध प्रदर्शन के जरिए वेतन से जुड़ी विसंगती दूर करने की मांग की है । बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 15 दिन पूर्व यहां की कोविड वार्ड में काम करने वाली नर्सों ने क्वारैंटाइन की सुविधा ना मिलने और यूज किए हुए मास्क देने, चश्में देने की शिकायत की थी।

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फोटो रायपुर के मेडिकल कॉलेज के बाहर की है। डॉक्टर्स ने यहां टी स्टॉल लगाकर विरोध जताया।

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