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पुटका पहाड़ के जंगल में तितलियों की 100 से अधिक प्रजाति, 40 को किया चिन्हित


जिले के जंगल में तितलियों की कई प्रजातियां हैं। पहले 100 से अधिक प्रजाति होने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक 40 प्रजातियों की पहचान की गई है। यहां पुटकापहाड़ जंगल में दुर्लभ प्रजाति की तितली कामन ओनिक्स, इंडिगो फ्लेस भी पायी जाती हैं। लेकिन उनके संरक्षण के लिए अभी तक कोई उपाय नहीं किए गए हैं। तितलियों को सबसे अधिक खतरा फूलों व फसलों में कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल होने से है। पुटका पहाड़ के साथ ही चैतुगढ़, लामपहाड़ क्षेत्र में भी अनेक प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं। पर्यावरण विद डॉ.दिनेश सिंह ने बताया कि तितलियों की जानकारी एकत्र की जा रही है। शहर क्षेत्र में भी पहले जैसे तितली नजर नहीं आती।

इसका मुख्य कारण कीटनाशक दवाओं का प्रयोग है। हालांकि जंगल में इनकी संख्या अधिक है लेकिन फूल वाले पेड़ों की कटाई होने से भी उनका प्रभाव पड़ रहा है। जंगल में कॉमन बार्न, बैरनेट सुलेय्ड नाविक, तावी कोस्टर, ग्रे काउंट, कॉमन कैस्टर, ग्रेट लेओमन पैंसी, ब्लू पैंसी आम नाविक, कमांडर कॉमन लेपर्ड, बुश ब्राउन में ब्लू टाइगर, कॉमन टाइगर बुश ब्राउन, कॉमन काउ प्लेन टाइगर, ग्रास यलो, डार्क ग्रास ब्लू, सिल्वर लाईन कॉमन जेजेबेल, कॉमन टाइसा प्रमुख रूप से पाई गई हैं।

बायोडावर्सिटी पार्क में हो तितलियों का संरक्षण

केएन कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर निधि सिंह का कहना है कि केसला में बायोडायवर्सिटी पार्क बनाया जा रहा है। जो बटरफ्लाई पार्क की तरह होगा। तितलियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक किया जा सकता है। वे अपने घरों में फूलों के पौधे लगाएं साथ ही फूलदार व फलदार पौधे लगाने के साथ ही पेड़ों की कटाई पर रोक लगे। शहर में वायु व ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम किया जाए।

पारिस्थितिकीय तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका

तितलियों व पौधों के बीच सह विकास संबंध होता है। तितलियों को उड़ने वाला फूल भी कहा जाता है। जो इसकी सुंदरता को प्रदर्शित करती है। ये कीड़े अपने उत्तम पंखों के रंगों से पर्यावरण के सौंदर्य को बढ़ाते हैं। तितलियां फूलों के पौधों पर निर्भर रहती हैं। साथ ही जैव विविधता परिवर्तन सूचक भी इन्हें जाना जाता है। वातावरण में बदलाव का असर भी तितलियों पर पड़ता है। डॉ.दिनेश का कहना है कि पहाड़ों की तराई में ऐसी कई तितलियां हैं जो हिमालय के तराई परिक्षेत्र में पाई जाती हैं।

छत्तीसगढ़ में तितलियों की 159 प्रजातियां

छत्तीसगढ़ में तितलियों की 159 प्रजातियां पायी जाती हैं। पहले इनकी संख्या 174 थी। जो शोध में भी दर्ज है। तितलियों की कुछ प्रजातियां लंबी दूरी का प्रवास करती हैं। इस प्रकार यह दो पौधों के बीच दूर दूर तक पराग को साझा करती हैं। परागों का यह प्रवास पौधों की प्रजातियों में आनुवांशिक विभिन्नता को प्रेरित करता है और विभिन्न रोगों के खिलाफ बेहतर मौका देता है। ये जैविक कीट नियंत्रण के लिए भी मदद करते हैं।

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More than 100 species of butterflies in the forest of Putka mountain, 40 identified

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