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कोरोना से प्रभावित हुए उद्योगों में अब 60 फीसदी उत्पादन हो रहा, उद्योगपति बोले- ट्रांसपोर्ट सुविधा बढ़ी तो मार्च में 100 फीसदी प्रोडक्शन होगा


कोरोना ने सबसे बड़े सेक्टर उद्योग क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसकी वजह से उत्पादन घटा है। वही लोगों की नौकरियां भी गई है। बता दें कि लॉक डाउन के दौरान भी उद्योगों को कुछ शर्तों के साथ चलाने की छूट दी गई थी, इसके बावजूद ये अभी भी प्रभावित हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि सभी ट्रेनें चालू हुई और ट्रांसपोर्ट की सुविधा पहले जैसी हुई तो मार्च के अंत तक उद्योगों में 100 फीसदी तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। अभी 60 फीसदी उत्पादन हो रहा है।
तिफरा, सिरगिट्टी व सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित तकरीबन एक हजार फैक्ट्रियों में कम हुआ उत्पादन थोड़ा बढ़ा है। कुछ माह पहले वे आधी क्षमता से ही उत्पादन कर रहे हैं। पर अब 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। बाहर से आकर यहां काम करने वाले मजदूर नहीं लौटे हैं पर उनकी जगह पर स्थानीय मजदूरों को ट्रेनिंग देकर काम पर लगाया गया है। मजदूरों से बातचीत करने पर यह पता चला कि महामारी के पहले जिस तेजी से फैक्ट्रियों में काम होता था अभी उतनी तेजी तो नहीं आई पर कोरोना की शुरुआत की तुलना में तेजी आई है। माल लेकर आने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ी है। बड़ी फैक्ट्रियों के सामने छोटे-छोटे भोजनालय सूने पड़े रहते थे, वहां चहल पहल शुरू हो गई है। उद्योगपतियों से चर्चा में यह बात सामने आई कि कोरोना के दो माह बाद कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन की क्षमता भी कुछ बढ़ गई थी लेकिन फिर 40 से 50 फीसदी ही उत्पादन फैक्ट्रियों में हो पा रहा था। ये वापस 60 फीसदी पर पहुंच गया है। उद्योगपति कह रहे हैं कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व बेंगलुरु जैसे महानगरों में लॉकडाउन होने का असर बिलासपुर की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा। अब स्थिति पहले से बेहतर हो रही है। कुछ ट्रेनें शुरू हुई है। ट्रांसपोर्ट के इंतजाम भी पहले से बेहतर हुए है। ट्रेनें और शुरू हुईं तो बाहर से माल देखने व खरीदने वाले आएंगे और इसका सकारात्मक असर उद्योगों पर पड़ेगा।

15 फीसदी नौकरियां भी निगल गया
पिछले चार-पांच महीनों में किसी भी उद्योग में 50 से 60 फीसदी से ज्यादा उत्पादन नहीं हो रहा है। शुरुआत में तो यह 30 से 40 फीसदी ही था। हालांकि अब स्थिति पहले से ठीक है लेकिन यदि उत्पादन नहीं बढ़ा तो घाटे की भरपाई जल्दी नहीं होगी। जिन फैक्ट्रियों में 100 मजदूर की जरूरत थी वहां 80-85 से काम चलाया जा रहा। यानी 15 फीसदी तक मजदूरों की नौकरी चली गई। इसका असर उनके परिवारों पर पड़ा है। पर फैक्ट्री संचालकों को जो घाटा हुआ, वह तो करोड़ों में है। उसका ठीक अनुमान लगा पाना भी मुश्किल है। यानी परेशान संचालक व कर्मचारी दोनों हैं।

सब कुछ ठीक रहा तो घाटे की भरपाई होगी-केडिया
छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया के अनुसार कोरोना में हुए नुकसान की भरपाई कर पाना इतना आसान नहीं होगा। लेकिन यदि आने वाले दिनों में सभी ट्रेनें शुरू हुई, ट्रांसपोर्ट की सुविधा बढ़ी तो उत्पादन में वृद्धि होगी। मुझे लगता है कि मार्च के अंत तक हम सौ फीसदी उत्पादन की स्थिति में पहुंच जाएंगे। इससे हमारे घाटे की भरपाई होगी। कोरोना के एक साल पूरे होने पर हम पुरानी हालत में वापस आ जाएंगे। पर यदि सुविधाएं नहीं बढ़ी तो मुश्किल है।

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औघोगिक क्षेत्रों में माल से भरे वाहनों की लाइन लगने लगी है।

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