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सिर्फ एक निजी हॉस्पिटल में ही होगा आयुष्मान से इलाज


केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को प्राइवेट हॉस्पिटल के माध्यम से मिले इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कोशिश अब तक कारगर नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि बस्तर जिले में कुछ महीनों पहले केवल दो प्राइवेट हॉस्पिटल में चल रही यह योजना अब एक हॉस्पिटल तक सीमित होकर रह गई है। शहर के काले नर्सिंग होम में यह योजना अब बंद हो गई है।
अचानक इलाज बंद किए जाने से इसका खामियाजा सबसे अधिक गरीब परिवार के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक काले नर्सिंग होम में बच्चों और महिलाओं का इलाज किया जा रहा था। आयुष्मान योजना के प्रभारी पृथ्वी साहू ने कहा कि इस हॉस्पिटल ने योजना के संचालन को आगे के लिए एमओयू नहीं किया। जिसके चलते इस योजना को इस हॉस्पिटल में बंद कर दिया गया है ।
इन हॉस्पिटल के संचालकों ने नहीं दिखाई थी रुचि: आयुष्मान योजना को लेकर जिले में चल रहे बंसल और मनोरमा नर्सिंग होम के संचालकों ने शुरू से ही रुचि नहीं दिखाई थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कई बार इन हॉस्पिटल में इस योजना को शुरू करने के लिए कोशिश की लेकिन वह इसे सफल नहीं कर सके। नतीजतन लोगों को इन हॉस्पिटल में महंगा इलाज कराने की मजबूरी अब भी बनी हुई है।
होगा नुकसान: केंद्र की इस योजना का लाभ निजी अस्पतालों में नहीं मिलने से जिले के लोगों को दूसरे शहरों में जाना पड़ेगा या दूसरे महंगी फीस देनी होगी। इससे लोगों को परेशानी होगी।

300 प्रकार की बीमारियों का इलाज योजना से बंद
केंद्र सरकार ने इस योजना के पैकेज से 3 सौ प्रकार की बीमारियों को हटा दिया। जिसका असर इस योजना पर सबसे अधिक पड़ रहा है। पैकेज में बीमारियों के कम होने से प्राइवेट हॉस्पिटल के संचालक इस योजना को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। शहर का दूसरे निजी एमपीएम हॉस्पिटल में भी यह योजना इन दिनों केवल खानापूर्ति तक सीमित होकर रह गई। हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने बताया कि शुरुआती दौर में इस योजना का लाभ हर दिन करीब 2 से ढाई सौ परिवारों मिलता था जो अब कम होकर 25-30 परिवार तक रह गई है।

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