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पहले जशपुर से जड़ी-बूटी लेते थे, अब रायपुर के डॉक्टर से दवा लेने लगे हैं साय


विष्णुदेव साय पहले जशपुर से जड़ी बूटी लेते थे अब वे रायपुर के डॉक्टर से दवा लेने लगे हैं। शायद उनका विश्वास आयुर्वेद पर कम हो गया है। यह बात चंद्रपुर के पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने भास्कर से चर्चा में सोमवार को कही। दरअसल, युद्धवीर ने रविवार को सोशल मीडिया पर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष साय के नाम एक पत्र लिख उन्हें स्वयं मरवाही उपचुनाव लड़ने की सलाह दी थी। इसके बाद प्रदेश भाजपा में राजनीति गरमा गई। साय ने युद्धवीर के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जूदेव परिवार से मेरे संबंध निजी है। युद्धवीर मेरा भला चाहते हैं इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने की सलाह दी। युद्धवीर की लोकप्रियता कम हो गई है ऐसा नहीं है, लेकिन वे भाजपा से खुश नहीं हैं। उन्होंने एक नया संगठन बनाया है, जिसे बहुजन हिन्दू महासभा जूदेव का नाम दिया है। हालांकि, अभी इस संगठन का विस्तार नहीं किया गया है। जूदेव ने इसी महासभा के अध्यक्ष के तौर पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को चिट्‌ठी लिखी है।

मरवाही में 40 फीसदी कंवर वोटर, साय खुद इस समाज से, जीत सकते हैं
“मैं विष्णुदेव का शुभचिंतक हूं। मरवाही में पहले दो दल लड़ते थे और कांग्रेस जीतती थी। अब वहां तीन दल मुकाबले में हैं। 40% कंवर वोटर हैं। साय खुद इस समाज से हैं। प्रदेश में बीच-बीच में आदिवासी नेतृत्व (मुख्यमंत्री) की मांग उठती रही है। ऐसे में साय खुद चुनाव लड़ेंगे तो जीत जाएंगे।’’
-युद्धवीर सिंह जूदेव

व्यक्ति नहीं केंद्रीय चुनाव समिति तय करती है कौन कहां से चुनाव लड़ेगा
“भाजपा में व्यक्ति तय नहीं करता कौन कहां से चुनाव लड़ेगा। केंद्रीय चुनाव समिति डॉ. गंभीर को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। दिलीप सिंह जूदेव मेरे आदर्श हैं। उस परिवार द्वारा मौखिक और पत्र द्वारा बहुत सी बातें बताई जाती हैं। राजपरिवार मेरा शुभचिंतक है और हमेशा मेरे हित में सोचता है।’’
-विष्णुदेव साय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

जूदेव के इस पत्र के बाद शुरू हुआ भाजपा में घमासान: जब-जब आप प्रदेशाध्यक्ष बने, विपरीत परिस्थितियों में भी आपने पार्टी को उच्च शिखर पर पहुंचाया। यही वजह है कि हमारी पार्टी की सरकार छत्तीसगढ़ में 15 साल रही। आप प्रदेशाध्यक्ष हैं और क्षेत्रवार, समाजवार और लोकप्रिय लोगों की टीम बनाई है।

मरवाही में चूंकि जातिगत समीकरण भी हैं और आप कंवर समाज के प्रदेश ही नहीं देश के प्रमुख नेताओं में से हैं। साथ ही आदिवासी भाई-बहनों में आपकी लोकप्रियता का कोई सानी नहीं। समय की मांग और कार्यकर्ताओं की इच्छा के साथ मेरी भी इच्छा है विष्णुदेव स्वयं मरवाही विधानसभा से उप-चुनाव लड़ें।

पत्र के जरिए कटाक्ष विष्णुदेव पर लेकिन निशाने पर पूर्व सीएम रमन
दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद रमन ‘राज’ में युद्धवीर हाशिए पर रहे। पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत पार्टी में वापसी हुई और रणविजय सिंह को तवज्जो मिली। रणविजय राज्यसभा भी भेजे गए। विधायक बनने के बाद युद्धवीर को मंत्री न बना संसदीय सचिव बनाया गया। तब से युद्धवीर भाजपा नेतृत्व और रमन सिंह पर निशाना साधते रहे हैं। उनका दर्द यह भी है कि विष्णुदेव का राजनीतिक कद बढ़ाने में दिलीप सिंह का हाथ रहा, लेकिन रमन के सीएम रहते पहली बार अध्यक्ष बनने के बाद विष्णुदेव रमन के नजदीक हो गए। पार्टी में जब उनकी अनदेखी हुई तो साय ने मुखरता से साथ नहीं दिया। इस बार भी भले पत्र के जरिए कटाक्ष विष्णुदेव पर है, पर निशाना रमन सिंह हैं।

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विष्णुदेव साय और युद्धवीर सिंह जूदेव।

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