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मोहल्ला क्लास, लाउडस्पीकर जैसे चार तरीकों से कराई जा रही पढ़ाई, फिर भी 77 फीसदी बच्चे अभी भी शिक्षा से वंचित


कोरोना संक्रमण काल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें शिक्षा मिलती रहे, इस उद्देश्य से सरकार ने पढ़ई तुहंर दुआर योजना शुरू की। वर्तमान में योजना के तहत चार अलग-अलग माध्यमों (पढ़ई तुहंर पारा, लाउड स्पीकर पढ़ई, ऑनलाइन क्लासेस और पढ़ई बुलटू) से बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन इन सभी का जिले में बुरा हाल है।

कुल 1.65 लाख बच्चे रजिस्टर्ड

जिले में कक्षा पहली से बारहवीं तक कुल 1.65 लाख बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 38 हजार बच्चे ही ऑनलाइन, मोहल्ला क्लास, लाउड स्पीकर क्लास के जरिए शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वहीं 1.26 लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन तक न तो ऑनलाइन क्लासेस पहुंच पा रही है और न ही पढ़ई तुहंर पारा। नेटवर्क की समस्या और शिक्षकों की रुचि नहीं होने के कारण ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासेस दोनों का जिले में बुरा हाल है। क्योंकि जिले में केवल 13929 बच्चे ही ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं मोहल्ला क्लास के अंतर्गत पढ़ई तुहंर पारा के तहत अब तक 22718 बच्चे और लाउड स्पीकर के जरिए केवल 2260 बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इधर, इस मामले में पढ़ई तुंहर द्वार के नोडल अफसर विवेक वर्मा का कहना है कि नेटवर्किंग व आर्थिक समस्या होने के कारण बच्चे ऑनलाइन से जुड़ नहीं पा रहे हैं। इसके अलावा अन्य तरीकों से भी पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन आर्थिक समस्या के कारण बच्चों पर दबाव भी नहीं बना सकते हैं। जिसके कारण कमी है।

82 हजार बच्चों के पास स्मार्टफोन

जिले में 82 हजार बच्चों के पास स्मार्टफोन होने का दावा, हकीकत केवल 13929 बच्चे ही ऑनलाइन जुड़ रहे : महासमुंद जिले में प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल की संख्या 1917 है। यहां कुल 1 लाख 65 हजार 463 बच्चों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज है। ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने से पहले शिक्षा विभाग ने एक सर्वे किया था। सर्वे के अनुसार जिले में 82 हजार बच्चों के पास स्मार्टफोन है। पर हकीकत ये है कि इनमें से 13 हजार बच्चे ही ऑनलाइन क्लासेस में शामिल हो रहे हैं। शेष बच्चे ऑनलाइन माध्यम से जुड़े ही नहीं है। हालांकि शिक्षा विभाग के अफसर इसके पीछे नेटवर्क की समस्या को बड़ी वजह मानते हैं। साथ ही कई घरों में एक फोन का होना भी बताया जा रहा है।

1.65 लाख में से 82 हजार बच्चों का पंजीयन
पढ़ई तुहंर दुआर योजना शुरू करने के दौरान शिक्षकों को बच्चों का पंजीयन कराने का जिम्मा सौंपा गया था। जिले में कक्षा-1 से लेकर बारहवीं तक कुल 1 लाख 65 हजार 463 बच्चे हैं। इनमें से 82092 बच्चों के पंजीयन का दावा किया गया था। पर वर्तमान समय में केवल 38907 बच्चे ही विभिन्न माध्यमों से पढ़ाई कर रहे हैं।

इन कारणों से समझिए क्यों हो रहा ऐसा…
1. नेटवर्क की समस्या : आज भी जिले के शहरी इलाकों को छोड़ दिया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है। बागबाहरा, कोमाखान, पिथौरा, सरायपाली और बसना अंचल के कई अंदरूनी गांव के बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस के लिए काफी समस्या हो रही है।

2. शिक्षकों की रुचि नहीं : जहां ऑनलाइन क्लासेस में नेटवर्क की समस्या है, वहां ऑफलाइन क्लासेस लगाने के निर्देश हैं। पर अधिकांश शिक्षक न तो मोहल्ला क्लास ले रहे हैं और न ही लाउड स्पीकर से पढ़ाई में रुचि दिखा रहे हैं।

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