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सुरक्षा का हवाला देकर पहले-दूसरे फ्लोर के मकानों में नहीं जा रही सर्वे टीम, चार महीने से जारी है सर्वे लेकिन नहीं मिली कामयाबी


कोरोना के फैलाव को रोकने चलाए जा रहे कम्युनिटी सर्वे में शुरुआत से ही दिक्कतों की गिनती शुरु हो गयी है। पहला तो ये कि सर्वे टीम केवल ग्राउंड फ्लोर पर बने मकानों तक ही जा रही है। पहले, दूसरे तीसरे फ्लोर पर बने मकान तक सर्वे टीमें सुरक्षा का हवाला देकर जाने से इंकार तक कर रही हैं। जून से अब तक चार महीने से सर्वे दर सर्वे का चक्र चल रहा है लेकिन अपेक्षित कामयाबी अभी तक नहीं मिल पा रही है़। हर बार केवल सतही पूछताछ ही हो पा रही है। जून के बाद एक बार फिर सर्वे में मितानिन और हेल्थ वर्करों की एंट्री हुई है। लेकिन लगातार सर्वे कर ऊब चुके अन्य विभागों के कर्मचारी डाटा एंट्री और रजिस्टर भरवाने जैसे काम मितानिनो को सौंप रहे हैं। भास्कर पड़ताल में पता चला है कि शहर में एक हजार से अधिक मितानिन कार्यकर्ताओं में से अधिकांश अच्छी तरह लिखा पढ़ी नहीं कर पाती है।
मितानिन कार्यकर्ता सर्वे में डाटा एंट्री फॉर्म भरने जैसी जिम्मेदारी अन्य विभाग के लोग संभाले इसकी भी मांग कर रही हैं। शहर में अब तक नये सामुदायिक सर्वे में टीमें करीब 50 हजार से ज्यादा घरों तक जा चुकी है। मितानिन सर्वेयर को उनके मूल वार्डों से भी शिफ्ट कर दिया गया है। इसलिए नये मोहल्लों वार्डों में जानकारी जुटाने में उनको वक्त भी लग रहा है। जबकि अपने मोहल्ले वार्ड में मितानिन को हर घर की जानकारी रहती है।

सामुदायिक संक्रमण की भी पड़ताल : 2 अक्टूबर से शुरु किये गये सर्वे के माध्यम से सामुदायिक संक्रमण की स्थिति को भी परखा जा रहा है। सर्वे में 6 बीमारियों के साथ हाई रिस्क लोगों का डाटा भी जुटाया जा रहा है। 24 घंटे के अंदर सैंपल और पाजिटिव आने पर अस्पताल या होम आइसोलेशन में इलाज शुरु करवाने पर भी फोकस है।

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