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सुशांत सिंह राजपूत केस में सीबीआई की जांच पर एम्स की रिपोर्ट का क्या असर होगा? क्या मर्डर की थ्योरी पूरी तरह खारिज हो गई है? जानिए क्या कहते हैं सीबीआई के पूर्व अधिकारी


सुशांत सिंह राजपूत की मौत की मिस्ट्री भी एक सनसनीखेज सस्पेंस थ्रिलर बनती जा रही है। सुशांत के परिवार के वकील का दावा है कि एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें कुछ बताया और मीडिया में कुछ बता रहे हैं। दरअसल, विवाद शुरू हुआ था एम्स के डॉक्टरों की पैनल के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के बयान से, जो यह कह रहे हैं कि सुशांत ने सुसाइड किया है, उनका मर्डर नहीं हुआ।

क्या एम्स के डॉक्टर के बयान से मर्डर की थ्योरी पूरी तरह खारिज हो गई है? क्या है इस रिपोर्ट के मायने? क्या सीबीआई की जांच डेड-एंड पर खड़ी हो गई है? इन सवालों का जवाब समझने के लिए हमने दिल्ली में सीबीआई के पूर्व सीनियर लॉ ऑफिसर वीके शर्मा और पूर्व सीनियर एसपी मुकेश साहनी से बात की। उनका कहना है कि सीबीआई हमारे देश की प्रीमियर जांच एजेंसी है। उसकी जांच अपनी जगह है और एम्स की कथित रिपोर्ट अपनी जगह।

सुशांत केस में क्या कहती है एम्स की रिपोर्ट?

  • एम्स के सात डॉक्टरों की टीम ने सुशांत सिंह राजपूत की पोस्टमार्टम, विसरा रिपोर्ट को दोबारा परखा। इस टीम के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि टीम के सभी सातों सदस्यों का मानना है कि सुशांत की मौत सुसाइड है, मर्डर नहीं।
  • यह टीम 22 अगस्त को बनी थी। एम्स की टीम मुंबई पहुंची, तो उनके पास क्राइम सीन की तस्वीरों का एक्सेस नहीं था। शुरुआत में मुंबई के अस्पताल ने कोऑपरेट नहीं किया और जांच सितंबर में शुरू हुई। एम्स की टीम ने मुंबई के कूपर अस्पताल के डॉक्टरों से बात की, जिन्होंने पीएम किया था।
  • एम्स के डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट 29 सितंबर को सीबीआई को सौंपी। यह रिपोर्ट भी कूपर अस्पताल की रिपोर्ट के जैसी ही थी, जिसने सुशांत की मौत को हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या माना। वैसे, भी सीबीआई की एफआईआर हत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जांच के लिए दर्ज हुई थी।
  • सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह का दावा है कि डॉ. गुप्ता ने ही उन्हें कहा था कि सुशांत की 200 प्रतिशत गला दबाकर हत्या की गई थी। जो रिपोर्ट सुशांत के परिवार को अभी तक नहीं दी गई है उसे मीडिया में लीक कैसे कर दिया गया। उन्होंने एम्स के उस रवैये पर आपत्ति जताई थी।

…तो क्या सीबीआई की जांच खत्म हो जाएगी?

  • सीबीआई के पूर्व सीनियर लॉ ऑफिसर शर्मा के मुताबिक इंडियन एविडेंस एक्ट के सेक्शन 45 के अनुसार एक्सपर्ट की ओपिनियन रेलेवंट है। उसे कोर्ट में स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट लॉ कहता है कि एक्सपर्ट ओपिनियन सिर्फ कोरोबोरेटिव के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
  • उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसी के पास कोई सबूत है तो उसे साबित करने में एक्सपर्ट ओपिनियन मदद कर सकती है। इस केस में सुशांत फंदे से लटका मिला था। उसने वह खुद किया या किसी ने मारकर लटकाया, इसमें डॉक्टर की एडवाइज महत्वपूर्ण होगी।
  • रिटायर्ड लॉ ऑफिसर का कहना है कि पोस्टमार्टम मौत का कारण जानने के लिए होता है और विसरा की जांच जहर की मौजूदगी जानने के लिए। इस मामले में भी डॉक्टर कॉज ऑफ डेथ बता सकते हैं, मर्डर है या नहीं, यह नहीं बता सकते। बाकी काम सीबीआई का है, उसे ही करना है।

क्या एम्स की रिपोर्ट का जांच पर कोई असर पड़ेगा?

  • सीबीआई के पूर्व एसएसपी मुकेश साहनी कहते हैं कि जांच का दायरा बहुत बड़ा है। जांच टीम ने क्या-क्या सबूत जुटाए हैं, उस पर निर्भर करेगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। एम्स की रिपोर्ट सहायक दस्तावेज है, जांच में उससे ज्यादा कोई महत्व नहीं है।
  • इस पर सीनियर एडवोकेट शर्मा कहते हैं कि डॉक्टर के ओपिनियन एविडेंस और डायरेक्ट एविडेंस में यदि कोई विरोधाभास है तो कोर्ट डायरेक्ट एविडेंस को महत्व देती है, ओपिनियन एविडेंस को नहीं
  • एम्स के डॉक्टरों की बयानबाजी से केस पर क्या असर पड़ेगा? इस पर पूर्व अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई जांच चल रही है। ऐसे में किसी भी तरह की बयानबाजी जांच को प्रभावित कर सकती है। जांच एजेंसी को उसका काम करने देना चाहिए, यह ज्यादा जरूरी है।

सीबीआई तक केस आने में बहुत देर लग गई, क्राइम स्पॉट डिस्टर्ब हुआ होगा?

  • इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। इससे जांच प्रभावित होगी। लेकिन, यह ध्यान देने योग्य बात है कि मुंबई पुलिस ने सुसाइड मानकर जांच की थी। तब मर्डर के तौर पर केस दर्ज होता तो क्राइम स्पॉट डिस्टर्ब नहीं होता।
  • सीबीआई के पूर्व अधिकारी ने कहा कि यदि कमरा सील होता और उसे तोड़कर कुछ किया होता तो उसे एविडेंस खराब करना माना जाता। उसे सर्कमस्टेंशियल एविडेंस माना जा सकता था। लेकिन, कोई केस ही नहीं था तो सबूतों से छेड़छाड़ की बात साबित करना सीबीआई के लिए बहुत मुश्किल रहने वाला है।

सीबीआई की जांच का भविष्य क्या है?

  • यह समझना आवश्यक है कि सुसाइड कोई अपराध नहीं है। सुसाइड के लिए उकसाना जरूर अपराध है। इसमें तीन बातों को देखा जाता है कि -1. क्या किसी ने ऐसा करने के लिए उकसाया, 2. क्या किसी ने इसमें उसकी मदद की, 3. क्या इसके लिए किसी तरह की साजिश रची गई?
  • सीबीआई ने अब तक जांच में क्या जुटाया, यह तो उसे ही पता है। लेकिन, इतना तय है कि इस मामले में जांच पूरी तरह से उसे मिले सबूतों पर ही निर्भर करेगी। उस आधार पर ही कुछ कहा जा सकेगा कि रिया चक्रवर्ती और उसके परिजनों ने सुशांत को सुसाइड के लिए उकसाया।
  • सीबीआई के पास तीन ऑप्शन है। यदि उसके पास सबूत आते हैं तो वह चार्जशीट दाखिल करेगी। यदि सबूत नहीं मिलते और आशंका लगती है तो वह अनट्रेस्ड रिपोर्ट दाखिल करेगी। यह कहते हुए कि अपराध हुआ है लेकिन किसने किया, यह साबित नहीं कर सकते। तीसरा विकल्प है क्लोजर रिपोर्ट यानी मामले में जांच बढ़ाने की जरूरत नहीं है, यह एक सुसाइड केस था।

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