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शिक्षकों को अब पांच साल की संपत्ति बतानी होगी, गोपनीय रिपोर्ट, डीई और कोर्ट केस भी बताने होंगे


शिक्षा विभाग व्याख्याताओं को पदोन्नति तो दे रहा है। उससे पहले उनसे संपत्ति का ब्योरा भी मांग लिया गया है। हालांकि वे इनकम टैक्स भरते ही हैं। उनसे कहा गया है कि पांच सालों में अर्जित की गई संपत्ति बताएं। साथ ही पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली भी मांगी है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और अदालती प्रकरणों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। कई शिक्षकों ने सीआर व जानकारियां जमा करा दी हैं अब उन्हें स्कूलों में घंटों बैठाकर यही काम करवाया जा रहा है वो भी दो-दो प्रतियों में। उनसे नाम, कार्यरत संस्था का नाम, जन्मतिथि, नियुक्ति तिथि भी पूछी जा रही है। 2016 से 2020 तक गोपनीय चरित्रावली का वर्षवार वर्गीकरण किया जा रहा है। अचल संपत्ति साल-दर-साल कैसे बढ़ी, का भी वर्षवार विवरण मांगा जा रहा है। इनमें से सैकड़ों ऐसे व्याख्याता हैं जिन्होंने स्कूल दफ्तरों में जमा कराएं हैं। इस बारे में बरसों से शिक्षकों को शिकायत हैं कि सीआर गुमा दी जाती है और इससे उनकी पदोन्नति और दूसरी सुविधाएं अटका दी जाती हैं।

पद व वेतन की लड़ाई
विभाग में उच्च स्तर पर पद की लड़ाई चल रही है। रायगढ़ के डीईओ मनींद्र श्रीवास्तव को विभाग ने जुलाई में संभागीय संयुक्त संचालक बनाकर रायपुर भेजा। उनकी जगह उप संचालक आरपी आदित्य को रायगढ़ का डीईओ बनाया। आदित्य ने वहां ज्वाइनिंग भी दे दी। श्रीवास्तव शासन के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। 27 जुलाई को यथा स्थिति बनाए रखने कोर्ट ने कहा है। उन्हें स्टे नहीं दिया। डीपीआर ने सोमवार को कहा कि रायगढ़ में उप संचालक का एक पद है। आदित्य का रायगढ़ से वेतन निकल रहा है। ऐसी स्थिति में श्रीवास्तव का वेतन रायगढ़ डीईओ से नहीं हो सकता। इसलिए उन्हें अगस्त की तनख्वाह संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय रायपुर से स्वीकृत की जाती है।

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