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प्राइमरी कांटेक्ट कोरोना फैलने की सबसे बड़ी वजह, 30 दिन में 18 हजार केस, 63% प्राइमरी कांटेक्ट से संक्रमित


संदीप राजवाड़े | राजधानी में कोरोना के तेजी से फैलने की सबसे बड़ी वजह संपर्क ही है, और वह भी प्राइमरी कांटेक्ट। स्थिति यह है कि जो व्यक्ति पाजिटिव आ रहे हैं, उनके परिवार के सदस्य भी संपर्क की वजह से संक्रमित हो रहे हैं। इस मामले में हेल्थ विभाग और भास्कर की स्टडी के मुताबिक पिछले 30 दिन में राजधानी में 18494 कोरोना पॉजिटिव मिले। इनमें से 63.43% लोग ऐसे थे, जिनके परिवार में कोई न कोई पाजिटिव हुआ और वो संपर्क में आ गए। बाकी संक्रमित ऐसे हैं, जिन्हें स्त्रोत का पता नहीं है यानी वे बाहर किससे संक्रमित हुए होंगे, उन्हें इसका अंदाजा नहीं है। इस स्टडी के आधार पर विशेषज्ञों का दावा है कि अगर किसी के परिवार में कोई पाजिटिव निकलता है, तो सबका आइसोलेट रहना जरूरी है क्योंकि 15 दिन बाद वैसे भी वायरस के कमजोर पड़ने से पाजिटिव व्यक्ति भी संपर्क वालों को संक्रमित करे, इसकी आशंका नहीं के बराबर हो जाती है।
भास्कर ने 12 सितंबर से राजधानी में पाजिटिव आए मरीजों के दिनवार आंकड़े जुटाए, फिर हेल्थ अफसरों के साथ प्राइमरी कांटेक्ट वालों की पहचान की। उस आधार पर यह बात निकली है कि पाजिटिव अाए दो-तिहाई लोगों को घर के ही किसी न किसी व्यक्ति से संक्रमण मिला, जो सबसे पहले पाजिटिव आया। दरअसल प्राइमरी कांटेक्ट के पाजिटिव होने की संख्या में वृद्धि की एक और वजह यह भी है कि पिछले कुछ दिन से टेस्ट करवाने वालों की संख्या में थोड़ी कमी दर्ज की गई है। पिछले 15 दिन के भीतर कोरोना टेस्ट करवाने वाले ज्यादातर लोग वह हैं, जिनके परिवार में कोई न कोई पाजिटिव निकल गया, या जो किसी पाजिटिव के सीधे संपर्क में आ गए। रायपुर में 10 सितंबर 2020 से 11 अक्टूबर 2020 के बीच 18494 मरीज पॉजिटिव मिले। स्टडी बता रही है कि इनमें से 11731 लोग किसी न किसी पाजिटिव के संपर्क में आए और अधिकांश का प्राइमरी कांटेक्ट घर में रहनेवाले लोग ही थे।

अक्टूबर में अनुपात बढ़ा

तारीख केस कांटेक्ट
01 अक्टूबर 463 277
02 अक्टूबर 336 240
03 अक्टूबर 311 205
04 अक्टूबर 268 176
05 अक्टूबर 197 130
06 अक्टूबर 365 253
07 अक्टूबर 335 236
08 अक्टूबर 272 181
09 अक्टूबर 265 195
10 अक्टूबर 314 190
11 अक्टूबर 233 163

कोरोना पॉजिटिव के परिवार के लोगों और संपर्क में रहने वालों को रिस्क ज्यादा
हेल्थ अफसरों के अनुसार अभी पाॅजिटिव आने वाले ज्यादातर लोग प्राइमरी कांटेक्ट वाले ही हैं। इनमें भी दो तरह के संपर्क वाले लोग हैं। पहला हाई रिस्क प्राइमरी कांटेक्ट, जिसमें वे लोग शामिल हैं जो मरीज के सीधे संपर्क में हैं जैसे एक ही घर में रहनेवाले। अभी इसी की ट्रेसिंग पर फोकस है। इसके बाद लो रिस्क ग्रुप है, अर्थात वे मरीज के साथ एक ही घर में नहीं रहते लेकिन एक ही दफ्तर में काम करते हैं या फिर एक ग्रुप में रहते हैं। इनके सैंपल भी जांचे जा रहे हैं, लेकिन एक साथ रहनेवालों की तुलना में लो रिस्क वाले लोगों में पाजिटिव केस कम निकल रहे हैं।

कोरोना नियंत्रण के लिए तीन माह के सर्वे प्लान में फोकस संपर्क पर ही
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के त्योहारी सीजन में कोरोना संक्रमण के फैलाव रोकने पर काम करने के निर्देश दिए हैं, इसके मद्देनजर हेल्थ अमले ने राजधानी और प्रदेश के लिए 90 दिन का नया एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान में भी सामुदायिक यानी घर-घर सर्वे पर फोकस है, लेकिन इस बार प्रक्रिया अपग्रेड की गई है। इस दौरान संपर्क में आने वाले लोगों का डाटा कलेक्ट किया जाएगा। यही नहीं, हर त्योहार के पहले और बात के सात-सात दिन के लिए हेल्थ तथा अन्य विभागों की टीम को अलर्ट पर रख दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नवरात्रि के सीजन में इसके लिए विशेष सतर्कता का प्लान बनाया है, जिसमें नियंत्रण का प्रयास तीन स्तरों पर होगा। इसमें मास्क पहनने, हाथ धोने और फिजिकल दूरी रखने के लिए कहा जाएगा।

कस्बे-गांव में असावधानी
हेल्थ विभाग के मुताबिक बीते 15 दिन में कस्बों और ग्रामीण इलाकों में सावधानी नहीं बरतने का ट्रेंड सामने आया है, इसलिए वहां मरीज भी बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले पूरे हुए सामुदायिक सर्वे के अनुसार 60 फीसदी से ज्यादा लोग छोटे शहरो गांव में तीन तरह की सावधानी रखने में चूक कर रहे हैं। परिणाम के तौर पर ऐसे क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ रहा है। अक्टूबर के पहले पखवाडे़ में 2400 केस के प्रदेश के औसत में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्हीं इलाकों से है। हेल्थ विभाग 24 घंटे में संदिग्ध की पहचान का सिस्टम भी और ज्यादा फोकस के साथ लागू कर रहा है।

“हर त्योहार के बाद व्यापक रूप से कोरोना की स्थिति का विश्लेषण करेंगे। जरूरत के मुताबिक नियंत्रण के लिए सतत ट्रेनिंग और अपग्रेड करने का काम भी होगा।”
-प्रियंका शुक्ला, एमडी-एनएचएम

एक्सपर्ट – प्राइमरी कांटेक्ट हैं, तो कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए पूरे परिवार को

  • जिस व्यक्ति को सूचना मिलती है कि पॉजिटिव हो गया, उसे ठीक उसी वक्त आइसोलेट होना चाहिए।
  • घर के बाकी लोगों को जांच करवानी चाहिए। नेगेटिव आए तो भी सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें।
  • कई लोग लक्षण का इंतजार करते हैं। अगर वे ऐसा कर रहे हैं तो भी खुद को पाजिटिव मानकर दवा लें।
  • बुजुर्ग पॉजिटिव आ गए तो उनके लिए यथासंभव होम आइसोलेशन नहीं लें, अस्पताल में भर्ती करवाएं।
  • अगर मरीज होम आइसोलेशन में हैं तो उनके कपड़े अलग धुलें। संभव है तो मरीज खुद ही इन्हें धो लें।
  • परिवार के बाकी सदस्य आइसोलेशन में रहें और सावधानी बरतें। डाक्टर से पूछकर दवाइयां शुरू कर दें।
  • होम आइसोलेशन वाला कमरा बिलकुल अलग न हो तो कुछ दिन के लिए मेड को घर में नहीं बुलवाएं।

मुझे नहीं होगा ये नहीं समझें
“राजधानी में सर्वाधिक मरीज प्राइमरी कांटेक्ट वाले ही हैं। विभाग उन्हें ट्रेस कर रहा है, लेकिन कई लोग खुद भी आ रहे हैं। किसी परिवार में एक को पॉजिटिव आया, तो यह जरूरी नहीं है कि बाकी सभी को आए। लेकिन यह बिलकुल नहीं समझें कि मुझे कोरोना हो ही नहीं सकता। घर में कोई पाजिटिव निकले तो पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।”
-डॉ मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

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एक के पॉजिटिव आने के बाद जांच कराने लाया गया पूरा परिवार।

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