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राजधानी में कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर थी 45%, होम आइसोलेशन के बाद रिकवरी रेट बढ़कर 72 फीसदी


होम आइसोलेशन ने राजधानी समेत प्रदेश की रिकवरी दर बढ़ा दी है। 25 दिन पहले प्रदेश में कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर महज 45 फीसदी व रायपुर में 37 फीसदी थी। यह अब बढ़कर क्रमशः 77 व 72 फीसदी हो गई है। कुल मरीजों में 45 फीसदी की छुट्टी अस्पताल से व 32 फीसदी मरीज होम आइसोलेशन में ठीक हुए हैं। जबकि रायपुर समेत पूरे प्रदेश में होम आइसोलेशन 31 जुलाई से लागू किया गया है। यानी इसे लागू हुए केवल 2 महीने से कुछ दिन ज्यादा हुआ है।
खास बात है कि 23 सितंबर को 4772 व 25 सितंबर को 24 घंटे में 5835 मरीज डिस्चार्ज हुए। इसमें 5125 व 1471 मरीज होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए थे। 24 घंटे के भीतर इतने मरीजों के डिस्चार्ज का भी रिकार्ड है। आंकड़ों के मुताबिक होम आइसोलेशन में अब तक 40270 मरीज ठीक हुए हैं जबकि अस्पताल से 56797 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। दुर्ग में होम आइसोलेशन का मॉडल लागू करने के बाद इसे 31 जुलाई से रायपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया गया था।

हल्के लक्षण में भी फायदा
होम आइसोलेशन की सुविधा से उन मरीजों को काफी फायदा हो रहा है, जिनमें लक्षण नहीं है या हल्के लक्षण हैं। ऐसे मरीज होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं और 10 से 17 दिन बाद स्वस्थ भी हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल की बजाय अगर मरीज अपने घर के किसी आइसोलेटेड कमरे में रहे, तो जल्दी स्वस्थ होगा। कोरोना केयर सेंटर या अस्पताल में क्रास इंफेक्शन का डर रहता है, जो होम आइसोलेशन में बिल्कुल नहीं है। यही कारण है कि मरीज को घर में अच्छा माहौल मिलता है और वह जल्दी स्वस्थ भी हो जाता है।

13 दिनों में डिस्चार्ज मरीज

तारीख अस्पताल से घर से
5 अक्टूबर 564 2235
4 अक्टूबर 496 1724
3 अक्टूबर 505 1911
2 अक्टूबर 603 1983
1 अक्टूबर 678 1557
30 सितंबर 597 2239
29 सितंबर 563 2532
28 सितंबर 562 1355
27 सितंबर 519 441
26 सितंबर 643 2544
25 सितंबर 710 5125
24 सितंबर 589 1471
23 सितंबर 576 4196

अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी
होम आइसोलेशन को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए कई सुविधाएं बढ़ाई भी गई है। उदाहरण के लिए अब ऑनलाइन पंजीयन करवाया जा सकता है। जोनवार डाक्टरों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। घर में रहते अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो तो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, जिससे मरीज अपनी दिक्कत बता सकता है। शुरुआती दिनों में होम आइसोलेशन के लिए बहुत दिक्कत होती थी। बड़ी मुश्किल से यह सुविधा मिलती है, जिससे कई लोग परेशान भी हो जाते हैं। सरकार ने हाल में 2-बीएचके मकान की अनिवार्यता खत्म की। दो कमरे और अलग से टॉयलेट-बाथरूम हो, वहां भी कोरोना मरीज घर में रहकर इलाज करवा सकता है। इसलिए लोग कोरोना केयर सेंटर जाने के बजाय घर में रहकर इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

“हल्के या बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए होम आइसोलेशन बेहतर है। मरीज नियमों का पालन करे तो हफ्ते-दस दिन में ही स्वस्थ हो सकता है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों के स्वस्थ होने से रिकवरी दर काफी बढ़ी है। अस्पताल का तनाव घर में नहीं रहता, यह भी लाभ है।”
-डॉ. एस फुलझेले, एचओडी आर्थोपीडिक, अंबेडकर अस्पताल

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राजधानी के कोवि़ड केयर सेंटर में खाली पड़ी बेड।

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