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आंखों में खुजली, पानी आना, सिरदर्द हो तो अलर्ट हो जाएं और डॉक्टरी सलाह लें; बच्चे, बड़े और बुजुर्ग आंखें स्वस्थ रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें


हर 40 में से एक इंसान आंखों से जुड़ी कोई न कोई परेशानी से जूझ रहा है। आंखों की 90 फीसदी बीमारियों का इलाज संभव है। आमतौर पर लोग आंखों की देखभाल को नजरअंदाज करते हैं। इससे दिक्कतें बढ़ती हैं। आज वर्ल्ड साइट डे यानी विश्व दृष्टि दिवस है। इस साल की थीम है ‘होप इन साइट’। इसके लिए सबसे जरूरी है आंखों की देखभाल। इस मौके पर बंसल हॉस्पिटल की आई स्पेशलिस्ट और ग्लूकोमा एक्सपर्ट डॉ. विनीता रामनानी बता रही हैं, बच्चे, बड़े और बुजुर्ग कैसे रखें आंखों का ख्याल रखें…

बच्चों के लिए : गैजेट इस्तेमाल करते समय पलकें झपकाएं और दिन में 4 बार आंखों को धोएं

बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इससे सीधा असर उनकी आंखों पर पड़ता है। इनदिनों ऑनलाइन क्लासेस के कारण बच्चों का मोबाइल के साथ अधिक समय बीत रहा है। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • अगर आंखों में खिंचाव, खुजली, थकावट, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखने जैसी समस्या हो रही है तो अलर्ट हो जाएं। ये डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण हैं। ये लक्षण गैजेट को अधिक इस्तेमाल करने पर दिखते हैं।
  • डिजिटल गैजेट्स से निकलने नीली रोशनी आंखों पर लगातार पड़ने से इनमें पहले रुखापन आता है फिर मांसपेशियों पर जोर पड़ता है। ऐसे में उनसे गैजेट का इस्तेमाल करने के दौरान पलकें झपकाने के लिए कहें।
  • मोबाइल की स्क्रीन छोटी होने के कारण आंखों पर जोर अधिक पड़ता है। इससे निकलने वाली नीली रोशनी आंखों के सबसे करीब होने के कारण ज्यादा बुरा असर छोड़ती है।
  • आंखों में सूखेपन से बचने के लिए बच्चों को गैजेट और आंखों के बीच दूरी रखने के लिए कहें। इसके अलावा दिन में 4 से 5 बार आंखों को सादे पानी से धोने के लिए कहें।
  • ज्यादातर बच्चे पेरेंट्स के डर से रात में लाइट ऑफ करके मोबाइल या दूसरे गैजेट पर वीडियो गेम खेलते हैं। ये सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है क्योंकि कमरे में अंधेरा होने के कारण गैजेट की नीली रोशनी का बुरा असर सीधे आंखों पर पड़ता है। पेरेंट्स इन बातों का ध्यान रखें
  • रात में नींद न आने की समस्या, सुबह देर से उठने के कारण शरीर में भारीपन और सिरदर्द महसूस हो तो बच्चों के फोन इस्तेमाल करने की जानकारी रखें। ऐसा होने पर आई एक्सपर्ट की सलाह लें।
  • लम्बे समय तक ऐसा होने से आंखें कमजोर हो जाती हैं। इनकी दूर की नजर कमजोर होने का खतरा ज्यादा रहता है, इसे मायोपिया कहते हैं। लगातार ऐसा होने पर चश्मा लग सकता है और जो पहले से लगा रहे हैं उनका नम्बर बढ़ सकता है।
  • एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, अगर बच्चों में गैजेट का इस्तेमाल ऐसे ही बढ़ता रहा तो 2050 तक 50 फीसदी बच्चों को चश्मा लग जाएगा।
  • बच्चों में विटामिन-ए की कमी न होने दें। इससे रतौंधी और कॉर्नियल ब्लाइंडनेस का खतरा बढ़ता है। मध्य प्रदेश में इसके मामले लगभग 26% हैं।

बड़ी उम्र के लोगों के लिए :
इनदिनों युवा सबसे ज्यादा कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। देरतक कम्प्यूटर और लैपटॉप का इस्तेमाल उनकी आंखों को कमजोर कर रहा है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-

  • लैपटॉप की स्क्रीन और आंखों के बीच कम से कम 26 इंच की दूरी होनी चाहिए। मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह दूरी 14 इंच होनी चाहिए। हालांकि यह हाथों की लम्बाई पर भी निर्भर करता है।
  • आंखों को हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए तक 20 फीट तक देखें। इसके बाद वापस काम शुरू कर सकते हैं। आंखों को दिन में 4-5 बार पानी से धोएं।
  • आंखों को साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है, वरना कंजक्टिवाइटिस भी हो सकता है। इसे पिंक आई के नाम से भी जाना जाता है। आंखों को हाथ धोने के बाद ही छुएं।
  • कंजक्टिवाइटिस के मामले में आंखों से पानी निकलता है और खुजली होने लगती है। पहले एक आंख में संक्रमण होता है, फिर दूसरी आंख इससे प्रभावित हो जाती है। इसलिए अलर्ट रहें।
  • खाने में विटामिन-ए युक्त चीजें शामिल करें। ये आंखों की रोशनी को बढ़ाते हैं और रोगों से बचाते हैं। आंख या सिर का दर्द बना रहे, या फिर रंगों को पहचानने में दिक्कत आए तो डॉक्टरी सलाह लें।

बुजुर्गों के लिए : ब्लड शुगर और बीपी न बढ़ने दें, बॉडी को एक्टिव रखें

60 साल के बाद बुजुर्गों को खुद या परिजनों को इनका अधिक ख्याल रखने की जरूरत है। बढ़ती उम्र का असर आंखों पर होता है, रोशनी पहले की तरह नहीं होती। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

  • अगर डायबिटीज या ब्लड प्रेशर के मरीज हैं जो डॉक्टरी सलाह का पालन जरूर करें। कोशिश करें कि ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे।
  • अगर लगातार तेजी से आंखों की रोशनी कम हो रही है तो डॉक्टरी सलाह लें। शारीरिक रूप से खुद को सक्रिय रखें।
  • अध्ययन बताते हैं कि दृष्टि संबंधी समस्या से जूझ रहे बुजुर्ग अन्य रोगियों की तुलना में 90 प्रतिशत अधिक अवसादग्रस्त हो सकते हैं। रेटिना सम्बंधी रोगों के साथ जी रहे बुजुर्गों को गिरने और चोट लगने का खतरा भी अधिक होता है। ये सभी फैक्टर कोरोनाकाल में बुजुर्ग की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
  • पैदल चलने और घर में काम करने के रास्ते से खतरे वाली सभी चीजों को हटा दें। इससे खराब दृष्टि के कारण दुर्घटना से गिरने का जोखिम कम होगा।
  • अपने घर में रोशनी की बेहतर व्‍यवस्‍था करें। दिन के समय खिड़कियों को खुला रखा जा सकता है और रात के समय लाइट्स ऑन करके रखा जा सकता है। सोते समय भी, कुछ लाइट्स को ऑन रखें, ताकि यदि आप रात में निकलें तो किसी चीज से न टकराएं।
  • घर के कामों में परिवार के युवा सदस्यों की मदद लें। यदि आप अकेले रहते हैं, तो राशन का सामान और दवाएं रखने के लिए अपने पड़ोसियों से मदद लें।

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