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म्यूचुअल फंड में रिटर्न पाने के मिलते हैं 2 ऑप्शन, यहां जानें ग्रोथ और डिविडेंड में कौन-सा विकल्प आपके लिए रहेगा सही


अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करने का प्लान बना रहे हैं तो इससे पहले आपका इस स्कीम के बारे में सही से जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि स्कीम में निवेश करने से पहले आपको तय कर लेना चाहिए कि स्कीम से फायदा पाने के लिए आपको कौन सा ऑप्शन चुनना है। निवेशकों को म्यूचुअल फंड में दो तरह के ऑप्शन मिलते हैं। इनमें पहला है ग्रोथ और दूसरा है डिविडेंड पे आउट (डिविडेंड)। जहां ग्रोथ ऑप्शन में पैसा लगातार स्कीम में रहता है, वहीं डिविडेंड ऑप्शन में कंपनियां समय-समय पर लाभांश के रूप में फायदा बांटती रहती हैं। हम आपको इनके बारे में बता रहे हैं।

ग्रोथ ऑप्शन क्या है?
यह ऑप्शन चुनने का मतलब है कि आपकी स्कीम पर मिलने वाला डिविडेंड ( लाभांश) आपको नहीं मिलता। ये फायदा आपको तभी मिलेगा जब आप अपनी यूनिट्स रिडीम करते हैं। यानी उन्हें बेचते हैं। इसका फायदा यह है कि इस विकल्प में आपका निवेश बढ़ता रहता है।

इसे उदाहरण से समझें
उदाहरण के लिए अगर आपने 10 रुपए एनएवी की दर से म्यूचुअल फंड की 1000 यूनिट्स खरीदी है और आप इसे दो साल बाद 15 रुपए की एनएवी पर बेचते हैं तो 5 हजार रुपए इस निवेश पर आपका रिटर्न हुआ। यानी आपको 5000 रुपए का फायदा होगा।

किसे चुनना चाहिए ये ऑप्शन?
लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों के लिए ये ऑप्शन सही रहता है। क्योंकि इसमें रिटर्न पर बार-बार कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं देना पड़ता। इसके अलावा जब आप ग्रोथ ऑप्शन चुनते हैं तो बीच में पैसा न निकालने के कारण लंबी अवधि में रिटर्न बढ़ जाता है। इसमें निवेशक को कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलता है। इसलिए यह विकल्प उन निवेशकों के लिए सही है, जिन्हें अपने निवेश पर नियमित आय नहीं चाहिए। जो निवेशक पैसे पर ज्यादा रिटर्न चाहते हैं उन्हें ग्रोथ ऑप्शन चुनना चाहिए।

डिविडेंड पे आउट ऑप्शन क्या है?
डिविडेंड ऑप्शन में निवेशक को म्यूचुअल फंड हाउस समय-समय पर डिविडेंड का भुगतान करती है। ये फंड हाउस के ऊपर है कि वो अपने शेयरधारकों को कब और कितना फायदा देती है।

किसके लिए सही है ये विकल्प
यह विकल्प ऐसे निवेशकों के लिए सही है, जो छोटी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड की स्कीम में पैसा लगाना चाहते हैं। इसके अलावा जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है उनके लिए ये ऑप्शन सही है। हालांकि इस स्कीम में आपके पैसे की वैल्यू ग्रोथ ऑप्शन की तुलना में कम बढ़ती है। क्योंकि इसमें आपको कंपाउंडिंग का फायदा उतना नहीं मिलता है, जितना ग्रोथ ऑप्शन चुनने पर मिलता है।

कब मिलता है डिविडेंड?
डिविडेंड तब दिया जाता है जब कंपनियों को फायदा होता है और वो अपने निवेशकों को अपना मुनाफा बांटना चाहती है। इसका कोई समय या नियम नहीं है कि कब और कितना दिया जाएगा। ये कंपनी के ऊपर है कि वो अपने शेयरधारकों को कब और कितना फायदा देती है।

डिविडेंड में मिलता है री-इन्वेस्ट का ऑप्शन
डिविडेंड में निवेशक को डिविडेंड री-इन्वेस्ट का ऑप्शन भी मिलता है। इसमें निवेशक को ग्रोथ और डिविडेंड दोनों का ही फायदा मिलता है। इसमें डिविडेंड की रकम निवेशक की जेब में नहीं जाती है। उसके बदले निवेशक को यूनिट्स आवंटित कर दी जाती है।

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ग्रोथ ऑप्शन में पैसा लगातार स्कीम में ही रहता है

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