आपकी ईवनिंग ड्रेस को रॉयल लुक देगी केप, इन नए तरीकों को अपनाएं

लाइफस्टाइल डेस्क. सिंपल लुक में स्टाइलिश नजर आना है तो केप का ऑप्शन बेस्ट है। केप आपकी अपर बॉडी को कवर करने का बेहतरीन ऑप्शन है। इसे शियर, लेस, ब्रोकेड जैसे फैब्रिक में पसंद किया जा रहा है। इसे ट्रेडिशनल से वेस्टर्न ड्रेसेस में कैरी किया जा सकता है।

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fashion trends: Cape will give your evening dress a royal look, try these new methods

आई लाइनर का सही तरीका अपनाएं, आंखों को आकर्षक बनाएं

लाइफस्टाइल डेस्क. आप भी आई लाइनर लगाने के सही तरीकों से अपनी आंखों को सुंदर बना सकती हैं। इनमें से कोई एक तरीका अवसर के अनुकूल चुनें। परफेक्ट तरीके से लगाया गया आईलाइनर आपके लुक को बदल देगा।

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Fashion Trend: These types of eye liner help to make your eyes attractive, Fashion tips for eyes

10 मिनट पहले चिमनी चलाने से निकल जाएंगे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पार्टिकल, प्रदूषण भी होगा कम

लाइफस्टाइल डेस्क.घरों में चूल्हे के बजाय रसोई गैस का उपयोग तो बड़ी मात्रा में शुरू हो गया, लेकिन महिलाएं यहां भी प्रदूषण से सुरक्षित नहीं हैं। गैस का बर्नर चालू करते ही नॉक्स (नाइट्रोजन ऑक्साइड) निकलना शुरू हो जाती हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जबकि महिलाएं पराठे सेंकती, तलती व छौंक लगाती हैं।

ऐसा करते समय सबसे ज्यादा नॉक्स पैदा होतीहै और वह पीएम 2.5 व पीएम 10 के साथ मिलकर शरीर में पहुंचकर घातक साबित होता है। इससे बचने के लिए महिलाओं को किचन में काम शुरू करने से 10 मिनट पहले किचन की चिमनी व एग्जास्ट फेन चालू कर देना चाहिए।

इनडोर वायु प्रदूषण दस गुना अधिक घातक
श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय की प्रो. नम्रता जैन ने कहा इनडोर वायु प्रदूषण दस गुना अधिक घातक होता है। मौलाना आजाद राष्ट्रीय तकनीकी महाविद्यालय के डॉ. अनिल शर्मा ने कहा पुराने वाहनों से ध्वनि एवं वायु प्रदूषण की समस्या होती है।

इनको क्रमबद्ध रूप से फेजआउट करने की आवश्यकता है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके गुप्ता ने बताया इंदौर का 2009 से 2014 के बीच वायु प्रदूषण का स्तर मानक सीमा से काफी अधिक रहा, जिसके कारण 2009 में इंदौर को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली ने क्रिटिकली पॉल्यूटेड एरिया घोषित किया था।

इससे किचन में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 कण बाहर निकल जाएंगे। यह बात केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सुनील कुमार मीणा ने गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा किचन में चिमनी लगाने के बजाय एग्जास्ट फेन लगाने पर ध्यान देना चाहिए। वह चिमनी के मुकाबले चार गुना तेजी से प्रदूषित हवा को बाहर करता है



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kitchen management: switching on the chimney 10 minutes before will remove PM 2.5 and PM 10 particles from the kitchen, pollution will also reduce, Home Decore

प्राकृतिक एंटी एजेंट से भरपूर टमाटर के इस्तेमाल से दूर होंगे डार्क सर्कल

लाइफस्टाइल डेस्क.आंखों के नीचे काले घेरे एक आम समस्या है। बढ़ते स्ट्रेस और अधिक देर तक टी.वी. स्क्रीन के आगे बैठे रहने से यह समस्या बढ़ती जा रही है। अगर आप भी आंखों के नीचे काले घेरे यानि डार्क सर्कल्स से परेशान हैं तो टमाटर आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। प्राकृतिक एंटी एजेंट से भरपूर टमाटर काले घेरों की समस्या से आपको बहुत जल्द राहत दिलाता है। आप टमाटर को तीन तरीकों से आंखों पर अप्लाय कर सकते हैं।



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Beauty Tips: Remove Dark circles by using natural anti-agent tomatoes, dark circle, how to remove dark circle, Home remedies

सर्द मौसम में भी चेहरे की चमक बनाए रखेंगे ये कारगर 3 आसन, जानें क्या है इनके फायदें

लाइफस्टाइल डेस्क. योग का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, जिससे किसी भी तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन का मजबूती से सामना किया जा सकता है। इससे आपकी त्वचा पर मुंहासे, दाग धब्बे हट सकते हैं। यह सर्द मौसम में होने वाली स्किन की ड्रायनेस दूर करता है, जिससे चेहरे की चमक बनी रहती है।

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These 3 postures will maintain the glow of face even in cold weather, know what are their benefits

सर्द मौसम में भी चेहरे की चमक बनाए रखेंगे ये कारगर 3 आसन, जानें क्या है इनके फायदें

लाइफस्टाइल डेस्क. योग का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, जिससे किसी भी तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन का मजबूती से सामना किया जा सकता है। इससे आपकी त्वचा पर मुंहासे, दाग धब्बे हट सकते हैं। यह सर्द मौसम में होने वाली स्किन की ड्रायनेस दूर करता है, जिससे चेहरे की चमक बनी रहती है।

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These 3 postures will maintain the glow of face even in cold weather, know what are their benefits

बार- बार सेल्फी लेना भी है एक सिंड्रोम, आप भी हो सकते है ‘सेल्फाइटिस’ के शिकार

लाइफस्टाइल डेस्क.लोग रोज़ाना दो-तीन सेल्फी लेते हैं, तो कुछ इसकी सीमा तय नहीं कर पाते। सेल्फी लेना जब लत बन जाती है, तो ‘सेल्फाइटिस’बीमारी कहलाती है। यह एक तरह का मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति दिन भर में कई सेल्फी लेता है। इसका उसके दिमाग और व्यवहार दोनों पर असर पड़ता है। अगर आप एक दिन में चार-पांच से ज़्यादा सेल्फी ले रहे हैं तो इस पर गौर कीजिए, आप सेल्फी सिंड्रोम का शिकार बन सकते है।

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Taking a selfie again and again is also a syndrome, you can also be a victim of ‘selfitis’

कुछ आसान व्यायाम से पाएं अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा, पैरों के सुगठन के लिए करें आसान व्यायाम

लाइफस्टाइल डेस्क. रोज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते है। ऐसे में जरूरी है खुद के लिए समय निकाल कर कुछ वक्त अपनी सेहत पर खर्च करने का। आज हम आपको कुछ ऐसे आसान व्यायाम के बारे में बताएंगे, जो ना केवल आपको तंदरुस्त रखेगा, बल्कि मांस पेशियों के पुष्ट रखने के साथ ही फैट कम करने में भी आपकी मदद करेगा। अगर आप भी पैरों की अतिरिक्त चर्बी से परेशान हैं, तो कुछ आसान व्यायाम करके इनसे छुटकारा पा सकते हैं।



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Get rid of excess fat with some easy exercises, do easy exercises to make muscle stronger

नाखूनों में मजबूती से आएगा खूबसूरती में निखार, व्यक्तित्व को दर्शाता नाखूनों की सेहत और आकार

लाइफस्टाइल डेस्क.खुद को खूबसूरत रखने के लिए हम कई तरह के प्रयास करते है। इतना ही नहीं हम अपनी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए खुद का काफी खयाल भी रखते है। लेकिन कभी-कभी इन कोशिशों के बीच हम अपने नाख़ूनों को नजरअंदाज कर देते है।

नाख़ून ना केवल हमारी खूबसूरती में चार- चांद लगाता है, बल्कि इसका आकार और उसकी सेहत हमारे व्यक्तित्व को भी दर्शाता है। ऐसे में इनका स्वस्थ रहना ना केवल खूबसूरती के लिए, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी जरूरी है। हमारे नाख़ून रोजाना कई चीजों के संपर्क में आते है, इसलिए इनकी सेहत खासतौर पर इनकी सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

नाखूनों की देखभाल से जुड़ीऐसी टिप्सजिनसे बरकरार रहेगीइनकी खूबसूरती

  • जब हैंड वॉश का उपयोग करते हैं, तो लोशन को अपने नाख़ूनों और क्यूटिकल्स पर अच्छी तरह से रगड़ें। इसके बाद मॉइश्चराइज़र लगा ले।
  • पानी के संपर्क में अधिक रहने से नाख़ून कमज़ोर हो जाते हैं। ऐसे में हाथों को तुरंत पोछकर सुखा लें। रात में सोने से पहले नाख़ूनों की नारियल या जैतून के तेल से मालिश करें।
  • लंबे नाख़ून अक्सर जल्दी टूट जाते हैं। बहुत लंबे नाख़ून रखने के बजाय उन्हें समय- समय पर ट्रिम करते रहें। इससे वे जल्दी नहीं टूटेंगे।
  • नेल पॉलिश रिमूवर का अधिक इस्तेमाल न करें। एसीटोन-मुक्त रिमूवर का चुनाव करें। एसीटोन के इस्तेमाल से नाख़ून अपनी चमक खो देते हैं।
  • पैर के नाख़ून यदि मोटे और कठोर हों व काटने में समस्या आए तो गुनगुने पानी में नमक डालकर कुछ देर पैरों को डुबोकर रखें। नाख़ून मुलायम होने पर आसानी से कट सकेंगे।
  • डिब्बे, ढक्कन जैसी चीज़ों को खोलने के लिए नाख़ूनों का प्रयोग न करें। ऐसा करने से ये कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं।


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सुबह की भागदौड़ के बीच मुस्कुराएं कैसे?

लाइफस्टाइल डेस्क.सभी घरों में सुबह के वक्त भागदौड़ मची रहती है। बच्चों को उठाने का टेंशन, टिफिन बनाने का टेंशन, इन सब टेंशन और भागदौड़ के बीच आप अपने दिन की अच्छी शुरुआत कैसे सुनिश्चित कर सकती हैं? सिंपल-सा फंडा है, खुश रह कर। हालांकि ये कहना आसान है पर करना मुश्किल। शायद आपको अंदाजा भी नहीं है कि बच्चों के जागने से पहले आप कितने काम कर सकती हैं। इसलिए आज मैं आपके साथ कुछ ऐसी टिप्स शेयर कर रही हूं, जिन्हें मैंने भी अपनाया है। इनसे आप अपने दिन की शुरुआत मुस्कुराहट से कर सकती हैं।


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Tips to make busy routine easy with kidsstoppress editor Mansi Zaveri

त्वचा और बालों में चमक लाएगा सीरम, जानें क्या है सीरम के फायदें

ब्यूटी केयर. त्वचा और बालों में चमक लाने के लिए सीरम अच्छा जरिया साबित हो सकता है। जानिए, ऐसा क्यों है और कैसे करें सीरम का उपयोग। चमकदार बाल और दमकती त्वचा पाने के लिए प्रयुक्त कई सौंदर्य उत्पादों में से एक है सीरम।ये त्वचा और बालों की गुणवत्ता के लिए पोषण का एक शक्तिशाली स्रोत है।



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Serum will brighten skin and hair, know what is the benefits of serum

मकर संक्रांति पर पराेसें नए स्वाद, शेफ से जानिए कैसे बनाएं अखरोट की बर्फी और कॉकटेल समोसा

फूड डेस्क. इस बार मकर संक्रांति के मौके पर तिल के लड्डू के साथ नए स्वाद परोसें। अखरोट की बर्फी,हॉट जैगरी और वॉलनटकॉकटेल समोसा बनाकर फेस्टिवल को यादगार बनाएं। जाने माने शेफ से जानिए इसे कैसे तैयार करें…

अखरोट की बर्फी : शेफ सब्यसाची गोराई

अखरोट की बर्फी

सामग्री :1/2 कप कैलिफोर्निया अखरोट, 1/4 कप दूध, 250 ग्राम खोया /मावा, 1/4 कप चीनी, 1 टेबल स्पून और उससे अधिक चिकनाई वाला घी, 1/2 टी स्पून इलायची पाउडर।

तैयारी

  • 1/2 कप कैलिफोर्निया के अखरोट बाउल में लें, उसमें 1/4 कप दूध डालें और अखरोट को उसमें एक घंटे तक सूखने दें। अब इसे ब्लैंड करें और इसकी प्यूरी सी बना लें।
  • अब पैन में एक टेबल स्पून घी डालें। इसमें 1/4 कप अखरोट डालें और इसे तब तक सेकें जब तक लाल नहीं हो जाता। इससे घी निकाल लें और इसे अलग रख लें।.
  • अब इसी घी में खोया और चीनी ढंग से मिलाएं। अब इसमें अखरोट की प्यूरी मिलाएं और इसे ढंग से मिलाएं।
  • इसे तब तक ठंडा करें जब तक यह गाढ़ी नहीं हो जाए। इसमें इलायची पाउडर और भुनी हुए अखरोट ढंग से मिलाएं।
  • इसे तेल लगी हुई प्लेट पर फैलाएं और इसे कुछ घंटों के लिए छोड़ दीजिए ताकि यह सूख जाए।
  • इसके टुकड़े करें, घिसे हुए अखरोट के टुकड़े डालें। अब यह बर्फी तैयार है।

हॉट जैगरी एंड वॉलनट्स रोटी : शेफ अनाहिता धोंडी

हॉट जैगरी एंड वॉलनट्स रोटी

सामग्रीः 1 कप सादा आटा, 1/4 टीस्पून नमक, 2 अंडे फेंटे हुए, 1 टेबल स्पून पिघला हुआ मक्खन, चिकनाई के लिएतेल या मक्खन।
सॉस के लिए : 1 1/4 कप दूध, 1/2 कप गुड़, 1 कप दूध, 1/2 कपवॉलनट्स आधे टुकड़ों में टूटे हुए।
सजावट के लिए :छिड़कने के लिये शहद और खाने वाले फूल।

बनाने की विधि

  • एक बाउल में, सारी सामग्रियों को डालकर अच्छी तरह मिला लें।
  • एक नॉनस्टिक पैन को गर्म करें और उसमें तेल या मक्खनकी कुछ बूंदें डालें।
  • एक करछुल लें और पैनकेक बनाने के लिये पैन पर इसे डालें।
  • दोनों तरफ से पकायें। इसे पैन से उतारें और ठंडा कर लें।
  • एक अलग पैन में, गुड़ और दूध को सॉस बनाने के लिये पिघलायें।
  • इस सॉस को पैन में पैनकेक के ऊपर डालें और वॉलनट्स में मिलायें।
  • इसे और भी वॉलनट्स के टुकड़ों, शहद, खाने वाले फूल से सजायें और परोसें।

वॉलनट कॉकटेल समोसा : शेफ सब्यसाची गोराई

वॉलनट कॉकटेल समोसा

सामग्री : 1/2 कप मैदा, 1/2 कप गेंहू का आटा, स्वादानुसार नमक, 1/2 बडा चम्मच तेल, 2 छोटे चम्मच चीनी, जरूरतानुसार पानी।
स्टफिंग के लिए : 2 छोटे चम्मच तेल, 1/2 छोटा चम्मच धनिया के बीज, 1/2 बडा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट, 1 हरी मिर्च, 1 प्याज, 1/4 कप मटर, 1/2 कप कैलिफ़ोर्निया वॉलनट्स कटे हुए, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, थोड़ा सा नमक, 1/4 छोटा चम्मच गरममसाला, थोडी सी धनिया पत्ती कटी हुई, 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर, 2 उबले आलू।

विधि

  • स्टफिंगके लिए एक पैन में तेल गरम करें।
  • उस में धनिया के बीज डालें, फिर उसमे प्याज ,हरी मिर्च और अदरक लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह से चलाएं।
  • इसी बीच इसमें मटर और कैलिफ़ोर्निया वॉलनट्स डालें , फिर इस में उबले हुए आलू के साथ सभी मसाले डालकर तब तक चलाएं जब तक कि यह अच्छी तरह मिक्स न हो जाए।
  • तैयार मिश्रण को एक बाउल में निकाल कर एक तरफ रखें ,अब समोसा बनाने के लिए एक बाउल में मैदा,आटा, चीनी व नमक डालें और उसे घी व पानी से अच्छी तरह गूंदे, फिर उसकी छोटी छोटी लोइयां बनाकर पतला गोलाकार में बेलें।
  • इसके बाद चाकू की मदद से इन्हें दो भागों में बाटें, फिर एक भाग को उठाते हुए उस के किनारों को त्रिकोण आकार में मोड़ते हुए उस में स्टफिंग भरें।
  • किनारों से स्टफिंग बाहर न निकले इस बात का विशेष ध्यान रखें, फिर एक पैन में तेल गरम कर तैयार समोसों को सुनहरा होने तक तलें।
  • इमली व धनिया चटनी के साथ गरमगरम सर्व करें।


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वैक्सीनेशन गाइड से समझिए कब-कौन सा टीका लगवाएं क्योंकि टीका लगने के 10 दिन बाद बनता है सुरक्षा-चक्र

हेल्थ डेस्क. लां सेट ग्लोबल हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतें सर्वाधिक भारत में होती हैं। महिलाओं को होने वाले इस सर्वाइकल (गर्भाशय) कैंसर और कई तरह के संक्रमण से एचपीवी नामक टीके (वैक्सीन) से बचाव किया जा सकता है। इसी तरह बिहार के गोरखपुर और दूसरे इलाकों में बच्चों की मौतों के लिए जिम्मेदार जापानी बुखार से बचाव के लिए जेईवी (जापानी एंसेफेलाइटिस) नामक वैक्सीन दी जा सकती है। वैक्सीनेशन के बाद ढेर सारी बीमारियों और संक्रमण से 90 फीसदी तक बचाव किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी बात है कब-कौन सा टीका लगवाना चाहिए। फिजिशियन और बाल रोग एवं एलर्जी विशेष डॉ अव्यक्त अग्रवाल ने वैक्सीनेशन गाइड में बताया कब-कौन सा टीका लगवाएं…

वयस्कों को भी लगवाने चाहिए ये टीके
सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए लड़कियों को 10 से 45 वर्ष की उम्र तक एचपीवी का टीका लगता है। हालांकि इसे लगवाने की आदर्श उम्र 29 साल तक है, लेकिन 45 साल तक भी इसे लगवाया जा सकता है। इसे गर्भावस्था के दौरान नहीं लगवाना चाहिए। इसके अलावा टाइफॉइड, चिकनपॉक्स, हेपेटाइटिस-ए, स्वाइन फ्लू और मीजल्स, रुबेला और मम्प्स से बचने के लिए भी टीके लगवाने चाहिए। हालांकि इनमें अधिकांश टीके बचपन में लग जाते हैं, लेकिन अगर किन्हीं कारणों से नहीं लगे हैं, तो आप अभी भी लगवा सकते हैं।

  • टाइफॉइड कॉन्जुगेट : यह टाइफॉइड का नया टीका है। इसकी कीमत 1800 रुपए के करीब है। यह पांच वर्षों के लिए 90 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करता है। इसे 9 माह की उम्र या उसके बाद भी लगवाया जा सकता है।
  • हेपेटाइटिस ए : बच्चों व बड़ों में होने वाले पीलिया के 90 प्रतिशत मामले हेपेटाइटिस ए की वजह से होते हैं। इसके लिए इस टीके का एक डोज़ जीवन भर सुरक्षा देता है। इसकी कीमत 1500 रुपए के करीब है। एक अन्य प्रकार का टीका भी बाज़ार में उपलब्ध है। हालांकि इसके दो डोज़ लगवाने पड़ते हैं।
  • वैरिसेला वैक्सीन : यह वैक्सीन चिकनपॉक्स (छोटी माता) से बचाव करता है। अलग-अलग ब्रांड्स की दवाओं में इसकी कीमत 1600 से 2100 रुपए के बीच है। इसका एक डोज़ भी 90 प्रतिशत से ज़्यादा सुरक्षा देता है। लाइफटाइम में इसके दो डोज़ लगते हैं।
  • स्वाइन फ्लू वैक्सीन : यह वैक्सीन स्वाइन फ्लू के अलावा सामान्य फ्लू से भी रक्षा करता है, लेकिन यह सिर्फ एक साल के लिए ही सुरक्षा प्रदान करता है। इसका टीका हर साल लगवाना पड़ता है। इसे इंजेक्शन के अलावा स्प्रे रूप में भी ले सकते हैं। इंजेक्शन 6 माह से ऊपर किसी भी उम्र में लगवाया जा सकता है। वहीं स्प्रे 2 साल की उम्र के बाद लिया जा सकता है। इसकी कीमत 700 से 800 रुपए के लगभग है। गंभीर मस्तिष्क ज्वर और रक्त संक्रमण से बचाव में मैनिगोकोकल वैक्सीन सुरक्षा प्रदान करती है। इसकी कीमत लगभग 5000 रुपए है।

जन्म से लेकर 5 वर्ष तक के टीके

  • जन्म : बीसीजी, ओपीवी (पोलियो ड्रॉप), हेपेटाइटिस बी
  • 6 सप्ताह : डीपीटी, इंजेक्शन पोलियो, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, ओरल पोलियो, रोटावायरस, Pneumococcal (Pcv)
  • 10 सप्ताह : हेपेटाइटिस बी छोड़कर छठवें सप्ताह में लगे सारे वैक्सीन
  • 14 सप्ताह : छठवें सप्ताह में लगने वाले वैक्सीन दोबारा
  • 9 महीने : एमएमआर, टाइफॉइड कॉन्जुगेट वैक्सीन
  • 1 वर्ष : हेपेटाइटिस ए
  • 15 महीने : एमएमआर
  • 16 महीने : चिकनपॉक्स
  • 18 महीने : डीपीटी, इंजेक्शन पोलियो, ओरल पोलियो, पीसीवी बूस्टर
  • 2 साल : टाइफॉइड
  • 5 साल : टाइफॉइड, डीपीटी, चिकनपॉक्स
  • 10 साल : टिटनेस, टाइफॉइड

कैसे काम करते हैं टीके?
अधिकांश टीकों में मरे हुए वायरस अथवा बैक्टीरिया होते हैं या फिर कमज़ोर कर दिए गए जीवित वायरस मौजूद होते हैं, जिससे यह टीके शरीर में जाकर इन कीटाणुओं के ख़िलाफ़ लड़ने वाली प्राकृतिक एंटीबाडी बनाते हैं। हालांकि मरे हुए होने या कमज़ोर होने से ये खुद बीमारी की वजह नहीं बनते। अलग-अलग बीमारियों में उत्पन्न एंटीबाडी अलग-अलग समय तक जीवित रहती हैं। जैसे चिकनपॉक्स, खसरे, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस ए में जीवन भर सुरक्षा बनी रहती है, जबकि टिटनेस, टाइफॉइड जैसी बीमारियों में कुछ वर्ष सुरक्षा रहती है। वहीं इन्फ्लुएंजा, स्वाइन फ्लू वायरस साल दर साल खुद में बदलाव करता है, इसलिए यह वैक्सीन हर साल लगवानी पड़ती है। टिटनेस के टीके के बारे में भी लोगों को भ्रम है। अगर आपने टिटनेस का टीका लगवाया है, तो पांच साल के दौरान चोट लगने पर अलग से इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं है। वैसे लगवाते हैं तो नुकसान भी नहीं है।

वैक्सीन के 10 दिन बाद मिलती है सुरक्षा
कोई भी वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं देता। 90 प्रतिशत से ज़्यादा सुरक्षा देने वाला वैक्सीन बहुत अच्छा माना जाता है। वैक्सीन लगने के 10 दिन के बाद ही सुरक्षा मिलनी शुरू होती है। जैसे आज चिकनपॉक्स का टीका लगवाया है, लेकिन यदि आपने चिकनपॉक्स वायरस का संक्रमण एक हफ्ते पहले ग्रहण किया था तो अगले दो दिन में टीका लगा होने के बावजूद आप बीमार हो सकते हैं।

मुफ्त हैं यह टीके
बच्चों में उल्टी-दस्त होने का सबसे बड़े कारण रोटावायरस है। इससे बचने के लिए लगने वाला रोटावायरस वैक्सीन का डोज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त है। प्राइवेट में इसकी कीमत 700 से 1400 रुपए तक है। रोटावायरस वैक्सीन के डोज़ छह सप्ताह से ज्यादा के बच्चों को लगते हैं। इसके तीन डोज़ एक-एक महीने के अंतराल से और 6 माह की उम्र के भीतर तीनों डोज़ हो जाना चाहिए। इसके अलावा न्यूमोनिया, मस्तिष्क ज्वर, सेप्टिसमिया (गंभीर रक्त संक्रमण), कान एवं गले के इन्फेक्शन से रक्षा के लिए पीसीवी या pneumococcal नाम का टीका लगता है। यह भी मुफ्त है, वहीं अगर निजी रूप से लगवाना चाहते हैं, तो इसकी कीमत 1600 से 3800 रुपए तक है।



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Understand the vaccination guide when to get vaccinated because the safety cycle is made 10 days after the vaccine.

हांगकांग में बांस से बनी बास्केट में पकाया जाता है केक और फ्रांस में सबसे छोटे केक खाने का चलन

आशीष चोपड़ा, फूड हिस्टोरियन-लेखक और टीवी होस्ट
केक और पेस्ट्रीज़ के बिना सेलिब्रेशन अधूरा सा है। फ्लफी, लेयर्स वाले, चीज़ केक्स या फिर फ्रूट्स केक… इतनी विविधताएं और सबका इतना जुदा स्वाद है कि बस आप खाते जाइए और झट से ये मुंह में घुल जाएंगे। आप दुनिया के किसी भी कोने में हों, रेस्तराओं में केक और पेस्ट्रीज़ डिज़र्ट मेन्यू में मिल ही जाएंगे। केक खरीद रहे हैं या घर पर बनाने की सोच रहे हो, आपका अपना चुनाव है। यूट्यूब पर भी केक की ढेरों रेसिपीज़ मिल जाएंगी। तो आज हम बात दुनिया के सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक चर्चित केक की करेंगे।

  • इटैलियन डिज़र्ट में तिरामिसु केक खास जगह रखता है। किसी भी इटैलियन रेस्तरां में यह आसानी से मिल जाएगा। कॉफी फ्लेवर वाला यह इटैलियन डिज़र्ट कई सारी लेडीफिंगर्स (भिंडी नहीं) को कॉफी में डिप करके बनाया जाता है। स्ट्रॉबैरी और पिस्ताशियो जैसे कई और फ्लेवर्स भी तिरामिसु केक में मिल जाते हैं।
  • ब्लैक फॉरेस्ट केक जर्मनी का खास केक है। चैरीज़ के साथ चॉकलेटी स्पॉन्जी केक खाने पर लगता है कि जैसे किसी कॉकटेल पार्टी का मज़ा उठा रहे हों। अमेरिका में चीज़केक का कल्चर है। वैसे आज जो चीज़ केक हम खाते हैं, वह सत्रहवीं सदी में क्रीम चीज़ आने के बाद पॉपुलर हुए। प्राचीन ग्रीक लोग भी चीज़ को मीठे के साथ खाते थे। रोमन इसे बेक करके खाना पसंद करते थे। इसमें बहुत सारा शहद और महक के लिए तेज़ पत्ता भी मिलाते थे।
  • मलेशिया और सिंगापुर में कलरफुल पेन्डन केक आम और खास दोनों मौकों पर लोग खाते हैं। इसका मुख्य इंग्रेडिएंट पेन्डन के पौधे हैं। दक्षिण एशियाई कुकिंग में पेन्डन उतना ही आम है, जितना हमारे घरों में नमक। ये ग्रीन केक्स मलेशिया और सिंगापुर में लोग बहुत पसंद करते हैं। इसके अलावा पाइन गार्डन केक भी बहुत लोकप्रिय है।
  • फ्रांस के मेडेलीन्स केक्स पेस्ट्रीज़ के आकार में छोटे होते हैं। शीप के आकार के केक्स फ्रांस की परंपरा में गहरे तक जुड़े हुए हैं। सत्रहवीं शताब्दी से फ्रांस के राजा-महाराजों के कुज़ीन में भी मेडेलीन्स मौजदू था। 1920 में फ्रेंच दार्शनिक प्रोस्त ने मेडेलीन्स को पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया।
  • ऑस्ट्रेलिया में चॉकलेट कोटिंग और नारियल के साथ बना लेमिंग्टन केक वहां का नेशनल आइकन है। पावलोवा केक को लेकर न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच वैसी ही खटास पैदा हो गई थी, जैसे हमारे यहां रसगुल्ले को लेकर दो राज्यों में हुई थी। पावलोवा केक की लड़ाई में जीत न्यूजीलैंड की हुई। स्ट्रॉबैरीज़ और समर फ्रूट की इस पर टॉपिंग की जाती है।
  • हांगकांग का मा लाई गो केक लोग सुबह-सुबह खाते हैं। बांस से बनी हुई बास्केट में इस केक को पकाया जाता है। केक के सामान्य इंग्रेडिएंट्स के अलावा इसके बैटर को अतिरिक्त पफीनेस देने के लिए अधिक समय तक खमीर उठाकर रखा जाता है।
  • केक की फेहरिस्त बहुत लंबी है। मैक्सिको का ट्रेस लैसेस केक, ब्रिटेन का विक्योरिया स्पॉन्ज, तुर्की का बकलावा, इंडोनेशिया का लेपिस लेगिट, स्वीडन का स्वीडिश प्रिंसेस केक, जापान का दोरायकी, डेनमार्क का क्रानसीकेज केक भी बेहद लोकप्रिय हैं और लोग बड़े शौक से खाते हैं।


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cake history by food historian ashish chopra Cake is cooked in bamboo baskets in Hong Kong and the trend of eating the smallest cakes in France

खानपान में शामिल करें मोटा अनाज, हरी सब्जियां, ये मेटाबॉलिज्म सुधारकर वजन कंट्रोल करेंगे

हेल्थ डेस्क. शरीर की कार्यप्रणाली ठंड में भी शरीर को गर्म बनाए रखती है। लेकिन इसके लिए शरीर ज्यादा भोजन की मांग करता है, यानी इस मौसम में भूख अधिक लगती है। इससे कई लोगों का वजन भी बढ़ जाता है। तो सवाल यह है कि इस मौसम में क्या और किस तरह खाएं ताकि शरीर की गर्मी बनी रहे और वजन भी न बढ़े।

आज हम आपको सर्दी के मौसम में खान-पान की चीजें सुझाने के अलावा एक सामान्य डाइट प्लान भी बता रहे हैं। हमने इसमें ड्राई फ्रूटस या महंगे फलों जैसी चीजें नहीं सुझाई हैं ताकि सभी वर्ग के लोग इसका पालन कर सकें। इस प्लान में अधिकतर उन चीजों को शामिल किया गया है जो हेल्दी होने के साथ गर्म तासीर वाली भी हैं। डाइट एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. शिखा शर्मा से जानिए सर्दियों में कैसा हो खानपान-

ये खाने में करें शामिल

मोटा अनाज : ये शरीर को गर्म रखते हैं
सर्दी के मौसम में मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी का भरपूर सेवन किया जाना चाहिए। इन्हें दलिया, रोटी या डोसे के रूप में लिया जा सकता है। इससे गेहूं के उपयोग में अपने आप कमी आएगी जो न केवल हमारे वज़न को नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि मोटे अनाजों की गर्म तासीर की वजह से शरीर में गर्मी भी रहेगी। हां, इनके साथ घी बहुत ज्यादा न हो जाए, इसका विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

कच्चा लहसुन, हल्दी और अदरक : ये मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर वजन कंट्रोल करते हैं
सर्दी के मौसम में इन तीनों जड़ों का अधिक से अधिक सेवन किया जाना चाहिए। अदरक के अलावा हरी लहसुन और हरी हल्दी (कच्ची हल्दी) भी इस मौसम में ख़ूब आती हैं। इन तीनों में कई तरह के औषधीय गुण होने के अलावा इनकी तासीर भी गर्म होती है। ये मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाती है जिससे वजन नियंत्रण में रहता है। कच्चे लहसुन को चटनी और कच्ची हल्दी को अचार के रूप में खाया जा सकता है।

तिल, मूंगफली और गुड़ : स्किन मुलायम और चमकदार रहती है
इन तीनों को एक साथ या अलग-अलग भी खाया जा सकता है। ये न केवल तासीर में गर्म है, बल्कि आयरन के भी अच्छे स्रोत हैं जो ठंड में हमारे लिए जरूरी है। सर्दियों की एक बड़ी समस्या त्वचा का रूखा-सूखा होना है। तिल और मूंगफली के नियमित सेवन से त्वचा चमकदार और मुलायम बनी रहती है। इन दिनों चाय या गाजर के हलवे जैसी चीजों में भी शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

हरी पत्तेदार सब्जियां : खत्म करती हैं कफ
इस मौसम में मैथी, पालक, सरसों, बथुआ आदि हरी सब्जियां बहुतायत में मिलती हैं। इनमें विटामिन ए, ई, के, फॉलिक एसिड, आयरन, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व बहुतायत मात्रा में होते हैं। हर दो मील्स में से कम से कम एक में यानी लंच या डिनर में इन्हें किसी न किसी रूप में अवश्य लेना चाहिए। ये वजन को नियंत्रित रखने के साथ-साथ कफ नाशक भी होती हैं जो सर्दी के मौसम की एक अन्य बड़ी समस्या है।

ग्रीन सलाद : पाचन सुधरेगा और पोषक तत्वों की पूर्ति होगी
ठंड के मौसम में गाजर, मूली, टमाटर, खीरा, चुकंदर, हरा प्याज आदि भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। इन्हें लंच और डिनर दोनों समय के मील्स में जरूर शामिल करना चाहिए। ग्रीन सलाद से शरीर को न केवल कई तरह के विटामिन्स और मिनरल्स मिलेंगे, बल्कि इससे पाचन भी सुधरता है और मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है। मेटाबॉलिज्म में बढ़ोतरी हमारे वजन को नियंत्रित करने में मदद करेगी।



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चेहरे की रौनक बढ़ाऐंगे लिपस्टिक के नए रंग, कोरल, ब्राउन और पीच शेड से बदलेगा लुक

लाइफस्टाइल डेस्क.अगर आप भी अमूमन एक या दो रंगों की ही लिपस्टिक लगाना पसंद करती हैं, तो अब वक़्त है कुछ नया करने का। किस मौक़े पर कौन-से रंग की लिपस्टिक चुनना है, ये तय करना अब आसान होगा। लिपस्टिक के बिना मेकअप अधूरा रहता है। ऐसे में आज हम आपकों लिपस्टिक के उन शेड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनके बिना आपका मेकअप किट अधूरा है। जानिए लिपस्टिक के कौन से नए रंग ट्रेंड में हैं-

न्यूड शेड

इस शेड को दिन और रात दोनों समय लगाया जा सकता है। अगर आप न्यूड शेड की लिपस्टिक लगा रही हैं, तो आंखों का मेकअप बोल्ड रखें। न्यूड लिपस्टिक लेते समय इस बात का ख़्याल रखें कि लिपस्टिक का शेड आपकी त्वचा के रंग से एक शेड गहरा हो। हल्की या त्वचा के समान रंग के शेड वाली लिपस्टिक न ले।

बैरी कलर

दोस्तों के साथ आउटिंग, शॉपिंग या झटपट तैयार होने के लिए ऐसे शेड्स ही सोबर लगते हैं। इतना ही नहीं ये शेड हर मौक़े पर जंचते है। इसे हमेशा पर्स में साथ रखा जा सकता है। इसमें कई शेड्स मौजूद हैं, जिन्हें पसंद के अनुसार ले सकते हैं।

ब्राउन लिपस्टिक

पार्टी प्रेमियों के लिए एकदम सही इस लिपस्टिक का फैशन कभी नहीं जाता। बस आपको इसे सही कपड़ों के साथ मेच करना है। गहरे रंग के कपड़ों के साथ ब्राउन लिपस्टिक न लगाएं, इसलिए अगर गहरे ब्राउन रंग का परिधान है, तो हल्के ब्राउन शेड वाली लिपस्टिक लगाएं। यदि बाल हाइलाइट किए हैं तो ब्रॉन्ज़ ब्राउन या मैट ब्राउन लिपस्टिक आपके लुक में चार चांद लगा देगी।

कोरल लिपस्टिक

ख़ूबसूरत और नाज़ुक-सा दिखने के लिए लिपस्टिक का यह रंग बेहतरीन है। ईवनिंग पार्टी हो या दिन का कोई छोटा सा फंक्शन, इन मौक़ों पर इसे लगाया जा सकता है। ये हर तरह की स्किन टोन पर फबता है, इसलिए यह भी आपके मेकअप बॉक्स का अहम हिस्सा हो सकती है।

पीच लिपस्टिक

स्टाइलिश और सोबर दिखने के लिए लिपस्टिक का ये रंग अपने साथ रखें। और अगर मेकअप को सिंपल रखते हुए आकर्षक दिखना चाहती हैं तो भी इस रंग का चुनाव कर सकती हैं। ये शेड हर तरह के स्किन टोन वालों पर अच्छा लगता है। दिन में लगाने के लिए भी इस शेड का चयन कर सकती हैं।

मरून लिपस्टिक

हमेशा चलन में रहा यह शेड शादी, पार्टी या ऑफिस हर जगह सदाबहार रहता है। कमाल की बात तो यह है कि ये हर रंग के परिधान पर जंचता है। मैरून या लाल रंग के परिधान पर भी इस लिपस्टिक को लगा सकते हैं। यह हमेशा क्लासी लुक देती है।



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New colors of lipstick, coral, brown and peach shade will change the face

नई तकनीक से गार्डन होंगे गुलजार, वर्टिकल गार्डन और ग्रोथ स्प्रे से बढ़ेगी बगिया की रौनक

लाइफस्टाइल डेस्क. गार्डनिंग के लिए अक्सर वर्टिकल गार्डन, ग्रोथ स्प्रे जैसी कई नई तकनीकें पौधों की गुणवत्ता और उनकी साज-सज्जा के लिए अपनाई जाती हैं। आपने भी इनका नाम सुना होगा पर इन्हें इस्तेमाल करने के फ़ायदे हैं भी या नहीं, ये जानना भी ज़रूरी है। बागवानी विशेषज्ञ जुबेर मुहम्मद से जानिए इनका कैसे और कब करें प्रयोग-

ग्रोथ के लिए प्रमोटर
पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए ग्रोथ प्रमोटर नई तकनीक है। इसे मिट्‌टी में मिलाया जाता है, लेकिन प्राकृतिक ग्रोथ प्रमोटर का इस्तेमाल करना ज़्यादा बेहतर है। ये काफ़ी महंगे भी होते हैं।

घर पर बनाएं ग्रोथ प्रमोटर
आमतौर पर चायपत्ती, केले के छिलके, थोड़ा-सा सिरका, पानी और अंडे के छिलकों को मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा नारियल जूट का बुरादा, वर्मीकम्पोस्ट और गोबर को बराबर मात्रा में मिलाकर ग्रोथ प्रमोटर बना सकते हैं। इनमें सब्ज़ियों के छिलके या पत्ते भी मिला सकते है।

सजावट के लिए छ़ोटे प्लॉट
इन दिनों मेज़ पर पौधे सजाने के लिए टेस्ट ट्यूब आकार के पारदर्शी जार ट्रेंड में हैं। इनमें वही पौधे ठहर सकते हैं जो धीरे-धीरे बढ़ते हैं, हालांकि ये सिर्फ़ सजावट के लिहाज़ से ही बेहतर हैं।

ऑरगैनिक स्प्रे
इस स्प्रे का इस्तेमाल ख़ासतौर पर पौधों में लगे कीड़ों को ख़त्म करने के लिए किया जाता है। ये सस्ता होने के साथ-साथ जैविक भी है, इसलिए इसे इस्तेमाल करना आसान है। इसे आप घर पर भी बना सकते हैं।

प़ोषण के लिए ग्रीन स्टिक
पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए इन दिनों ग्रीन स्टिक इस्तेमाल की जा रही है। ये छोटी-छोटी डंडी की तरह होती हैं, जिन्हें पौधे के आसपास मिट्‌टी में खड़ा दबाया जाता है, जिससे पौधों को पोषक तत्व मिलता है और उनकी वृद्धि अच्छी होती है। ये काफ़ी महंगी होती हैं, इसलिए जिन लोगों के पास समय का अभाव है, उनके लिए ये तकनीक मददगार है।

क्या होता है वर्टिकल गार्डन?
जो लोग कम जगह पर बाग़ीचा बनाना चाहते हैं, उनके लिए वर्टिकल गार्डन एक अच्छा विकल्प है। इन्हें बहुत छोटे-छोटे गमलों में लगाने के बजाय थोड़े बड़े गमलों में लगाना बेहतर है। छोटे गमलों में लगाने से इनकी उम्र कम हो जाती है और पौधों को अच्छी तरह से पोषण नहीं मिल पाता। अगर पौधों को लंबे समय तक रखना चाहते हैं तो बड़े गमलों का इस्तेमाल करें।



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2 हजार साल पुराना है पतंगबाजी का इतिहास, कम से कम 6 किमी प्रति घंटा की हवा हो तभी उड़ती है पतंग

लाइफस्टाइल डेस्क. कागज का एक छोटा टुकड़ा जब किसी डोर से बंध जाता है और हवा का एक झोंका पाकर इठलाने लगता है तो बन जाती है पतंग। इंसान ने परिंदों को हवा में गोते लगाते देखा तो सोचा कि क्यों न मैं भी कुछ ऐसा करूं। बस, यहीं से उपजी पतंग की सोच, जो कालांतर में मनोरंजन, कला और संस्कृति का हिस्सा बन गई। इतिहास, धर्म और सभ्यता के साथ रूप बदलती पतंग और पतंगबाजी को पर्यटन से भी जोड़ दिया गया है। मकर संक्रांति के मौके पर याद किए जाने वाले सूर्य और पतंग दोनों ही प्रेरणा के स्रोत भी हैं। आइए, समझते हैं कि पतंग के अलग-अलग पक्ष और पहलू क्या हैं…

विज्ञान : आसमान में कैसे उड़ती है पतंग?

  • एक साधारण पतंग को उड़ने के लिए सबसे बेहतर समय तब होता है, जब कम से कम 6 किलोमीटर और अधिकतम 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही हो। हवा की गति 6 किमी से कम होने पर उड़ने में दिक्कत आती है और अधिक होने पर पतंग से नियंत्रण खोने लगता है।
  • जिस तरह हवाई जहाज के उड़ने का संबंध हवा से है ठीक वैसा पतंग के साथ भी है। पतंग की हवा में उड़ने की क्षमता उसकी बनावट और उससे बंधी कन्नी की स्थिति पर निर्भर करती है।
  • आमतौर पर उड़ाई जाने वाली साधारण आकार की पतंग तब उड़ती है, जब उसकी निचली सतह की ओर से हवा का दबाव पड़ता है। कन्नी की ऊपर वाली डोरी पतंग को हवा में खींचती है,जिससे पतंग को ऊंचा उड़ाने के लिए इसके नीचे वाले हिस्से में हवा के सापेक्ष एक कोण बन जाता है।
  • हवा की गति को जानने के लिए इन दिनों कई तरह की डिवाइस मौजूद हैं। पहले पत्तियों या झंडे के मूवमेंट देखकर हवा की गति का पता लगाया जाता था।

इतिहास : बांस से बनेकागज से हुआ था पतंग का आविष्कार

  • पतंग का इतिहास लगभग 2000 साल से भी अधिक पुराना है। माना जाता है कि सबसे पहले पतंग का आविष्कार चीन के शानडोंग में हुआ। इसे पतंग का घर के नाम से भी जाना जाता है।
  • एक कहानी के मुताबिक, एक चीनी किसान अपनी टोपी को हवा में उड़ने से बचाने के लिए उसे एक रस्सी से बांध कर रखता था, इसी सोच के साथ पतंग की शुरूआत हुई।
  • मान्यता ये भी है कि 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में चीन दार्शनिक मोझी और लू बान ने बांस के कागज से पतंग का आविष्कार किया था।
  • 549 ईसवींसे कागज की पतंगों को उड़ाया जाने लगा था, क्योंकि उस समय पतंगों को संदेश भेजने के रूप में इस्तेमाल किया गया था। ज्यादातर लोगों का मानना है कि चीनी यात्री हीएन और ह्वैन सैंग पतंग को भारत में लाए थे। वायुमंडल में हवा के तापमान, दबाव, आर्द्रता, वेग और दिशा के अध्ययन के लिए पहले पतंग का ही प्रयोग किया जाता था।1898 से 1933 तक संयुक्त राज्य मौसम ब्यूरो ने मौसम के अध्ययन के लिए पतंग केंद्र बनाए हुए थे,जहां से मौसम नापने की युक्तियों से लैस बॉक्स पतंगें उड़ा कर मौसम सम्बंधी अध्ययन किए जाते थे।

अर्थशास्त्र : भारत 1200 करोड़ रुपए का पतंग बाजार

  • एसोचैम के मुताबिक, भारत में पतंग का बाजार 1200 करोड़ रुपए का है। देशभर में 70 हजार से ज्यादा कारीगर पतंग बाजार से जुड़े हैं।
  • मार्केट में एक पतंग की कीमत 2 से 150 रुपए तक होती है, लेकिन काइट फेस्टिवल्स मेंं उड़ाई जाने वाली पतंग महंगी होती हैं। यह उसके आकार, बनावट और मैटेरियल पर निर्भर करती है।
  • पतंग कारोबार के लिए उत्तर प्रदेश के कई जिले मशहूर हैं। बरेली, अलीगढ़, रामपुर, मुरादाबाद और लखनऊ में तैयार होने वाला मांझा और पतंग राजस्थान समेत कई राज्यों में भी सप्लाई किया जाता है। एक बड़े आकार की चरखी में मांझे की छह रील भरी जा सकती है। एक रील में 900 मीटर लंबा मांझा होता है। एक औसत क्वालिटी वाली छह रील वाली चरखी लेंगे तो 400-600 रुपए का खर्चा आता है।

कला : समझें कन्ने बांधने और पेच लड़ाने का कॉन्सेप्ट

  • पतंग की उड़ान कन्ने बांधने की कला पर निर्भर है। इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे हवा बेहद कम या सामान्य है, तो कन्ना थोड़ा छोटा रखना ही बेहतर है। हवा की गति तेज है तो आगे और पीछे दोनों तरफ कन्ने को बराबर रखें।
  • पतंग के कन्ने बांधने के लिए मांझे का प्रयोग न करें। इसके लिए सद्दी बेहतर है, क्योंकि इसके टूटने का खतरा बेहद कम रहता है।
  • पेंच दो तरह से लड़ाए जाते हैं डोर खींचकर या ढील देकर। डोर खींचकर पेच लड़ाना चाहते हैं तो आपकी पतंग विरोधी पतंग से नीचे होनी चाहिए।
  • अगर ढील देकर पेच लड़ाना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि डोर को धीरे-धीरे छोड़ें। इस दौरान पतंग को गोल-गोल घुमाते रहेंगे तो जीतने की संभावना रहेगी। पेच लड़ाते समय मांझा टकराएं।

भूगोल : देश-दुनिया में पतंग को समर्पित फेस्टिवल्स

  • ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा पतंगोत्सव फेस्टिवल ऑफ विंड्स के नाम से सिडनी में हर साल सितंबर में सेलिब्रेट किया जाता है।
  • चीन के वेईफांग शहर में हर साल अप्रैल में काइट फेस्टिवल आयोजित होता है। यहां मान्यता है कि ऊंची पतंग को देखने से नजर अच्छी रहती है।
  • जापान में हर साल मई के पहले सप्ताह में हमामात्सु के शिजुका प्रान्त में पतंगोत्सव होता है। यहां मानते हैं कि पतंग उड़ाने से देवता प्रसन्न होते हैं।
  • भारत में खासतौर मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने का रिवाज है। जनवरी के पहले सप्ताह में अहमदाबाद और जयपुर में भारत के सबसे बड़े काइट फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं।
  • ब्रिटेन में हर साल अगस्त के दूसरे सप्ताह में पोर्ट्समाउथ इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। यहां डिजाइनर से लेकर 3डी पतंगों के लिए लोग जुटते हैं।
  • हर साल 1 नवंबर को ग्वाटेमाला में काइट्स ऑफ सुपेंगो के नाम से पतंग उत्सव मनाया जाता है। जिसमें 15-20 मीटर चौड़ी पतंगे उड़ाई जाती हैं।
  • इंडोनेशिया के बाली काइट फेस्टिवल में 4-10 मीटर चौड़ी और 100 मीटर की पूंछ वाली पतंगे उड़ाई जाती हैं। यह अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में सेलिब्रेट किया जाता है।
  • साउथ अफ्रीका के केपटाउन में जनवरी के दूसरे हफ्ते में इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल सेलिब्रेट किया जाता है।
  • अमेरिका में द जिल्कर काइट फेस्टिवल सेलिब्रेट किया जाता है। हर मार्च में यहां म्यूजिक कॉन्सर्ट से लेकर हर उम्र वर्ग के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
  • इटली में सर्विया इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल हर साल अप्रैल में मनाया जाता है।

गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड जो पतंग के नाम बने

  • ऑस्ट्रेलिया के रॉबर्ट मूरे ने 2014 में दुनिया में सबसे ऊंची पतंग (चार हजार नौ सौ मीटर ) उड़ाने का रिकॉर्ड बनाया था।
  • 2005 में कुवैत के एक काइट फेस्टिवल में अब्दुल रहमान और फारिस ने दुनिया की सबसे बड़ी पतंग उड़ाई। यह 25 मीटर लंबी और 40 मीटर चौड़ी थी।
  • 2006 में एक डोर से 43 पतंगों का उड़ाने का रिकॉर्ड चीन के मा क्विंगहुआसेट के नाम है।
  • पुर्तगाल के फ्रेसिस्को लुफिन्हा के पास यात्रा करते हुए सबसे लंबी काइटसर्फिंग यात्रा (862 किमी) करने का रिकॉर्ड है।
  • 2011 में यूनाइटेड नेशनल रिलीफ एंड वर्क एजेंसी ऑर्गेनाइजेशन ने फिलीस्तीन बच्चों के लिए गाजा स्ट्रिप के समुद्रतट पर 12,350 पतंगें उड़ाकर रिकॉर्ड बनाया।


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नमकीन डिशेज में फल करें शामिल, मेथी पकोड़े में केले, आम का सांभर और आलू बुखारे वाले अमृतसरी छोले बढ़ाएं स्वाद

संजीव कपूर, शेफ
हम यह तो जानते ही हैं कि फल पोषण से भरे हुए होते हैं और हमारे लिए बहुत फायदेमंद हैं। सभी की तरह मैं भी रोजाना कोई न कोई फल जरूर खाता हूं। मिठाइयों, केक और जैम आदि में फ्रूट्स का काफी इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपने नमकीन या चटपटे व्यंजनों में फल इस्तेमाल किए हैं? हम नीबू जैसे खट्‌टे फल मैरीनेशन में और सलाद में इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन पाइनएप्पल, आलूबुखारे, अंजीर, केला, आम वगैरह का क्या? यह अजीब लगता है न? लेकिन यही तो मजेदार बात है क्योंकि इन फलों के रंग, स्वाद और टेक्सचर से अपनी डिशेज को शानदार रूप दिया जा सकता है।

मुझे लगता है कि हमें किसी भी इंग्रीडिएंट को पकाने के या उसे डिश में इस्तेमाल करने के तरीकों को सीमित नहीं करना चाहिए। मैंने खुद फलों का अलग-अलग डिशेज में प्रयोग किया है और यकीन मानिए इसका नतीजा बहुत स्वादिष्ट था। मैं अपनी कुकिंग में फलों के इस्तेमाल के कुछ आइडिया शेयर कर रहा हूं:

मेथी पकोड़ा में केले: बेसन, मेथी की पत्तियों, कटी हुई हरी मिर्च, कुछ मसालों, नमक, शक्कर और बेकिंग सोडा के साथ छिले हुए और मैश किए हुए केले मिलाएं। इसमें पानी मिलाकर बैटर बनाएं। डीप फ्राय कर गरमागरम परोसें। लीजिए हल्क-फुल्के पकोड़े तैयार हैं।

आलूबुखारे वाले अमृतसरी छोले: आलूबुखारों को काटकर उबाल लें। मिक्सर में इसकी प्यूरी (गूदा) बना लें। इसमें अमृतसरी छोले की ग्रेवी मिलाएं। इसे तब तक पकाएं जब तक सारे स्वाद मिल न जाएं। लीजिए खट्‌टे-मीठे अमृतसरी छोले तैयार हैं।

अंजीर की चटनी: पके अंजीरों को काट लें। पैन में तेल गरम करें और इसमें पंच फोड़न (मसाला), हरी मिर्च, अदरक, कटे हुए अंजीर डालें। साथ में कुछ मसाले, नमक और पिसी काली मिर्च डालकर तलें। इसमें थोड़ी शक्कर मिलाएं और गाढ़ा होने तक इसे पकाएं।

आम का सांभर: सांभर में सब्जियों की जगह पके हुए आम काटकर डालें। स्वाद आने तक उन्हें धीमी आंच पर पकने दें। उबले हुए चावल के साथ परोसने के लिए मीठा और स्वादिष्ट सांभर तैयार है।
अचारी पाइनएप्पल टिक्का मसाला: ताजे पाइनएप्पल के टुकड़ों को नमक, आम के अचार, मसाले, सरसों तेल, सिके हुए बेसन से मैरीनेट करें और 15-20 मिनट के लिए रख दें। इन्हें कबाब वाली स्टिक्स पर लगाकर पकने तक ड्रिल करें। गरमागरम परोसें।

ऑरेंज ब्रोकोली: कॉर्न फ्लॉर, नमक, हल्के सोया सॉस और पानी के साथ ताजा ऑरेंज जूस मिलाएं। ब्रोकली के टुकड़ों को हल्का-सा नमक डालकर गरम पानी में उबाल लें। अब ब्रोकली को हल्के तेल में कटी हुई लहसुन, अदरक और हरी मिर्च के साथ तल लें। इसे ऑरेंज वाले मिक्सचर में मिला लें और सॉस के गाढ़े होने तक पकाएं। ऑरेंज के बारीक छिल्कों से गार्निश कर परोसें।
इन आइडियाज में आप देख सकते हैं कि नमकीन डिशेज को भी फल अनोखा स्वाद दे सकते हैं। तो आप भी इन्हें ट्राय करके देखिए। आप निराश नहीं होंगे।



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food experiment with chef Sanjeev Kapoor know how to add fruit in dishes

धूप में पतंगबाजी से मिलता है विटामिन-डी, तिल के लड्डू से तन और मन रहता सेहतमंद

हेल्थ डेस्क. मकर संक्रांति के त्योहार का एक रंग यह भी है कि मद्धम होती सर्दी के बीच खिली धूप में पतंगबाजी। मान्यता है कि पतंगबाजी के दौरान हम दिनभर में धूप में समय बिताते हैं। इससे शरीर मजबूत होता है और सक्रिय थी। विज्ञान कहता है, सर्दियों में धूप के जरिये मिलने वाला विटामिन-डी पूरे साल का कोटा पूरा करता है। पतंगबाजी के बहाने शरीर सक्रिय होता है, हड्डियों और ऊतकों की रिपयेरिंग होती है।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के शोध आंकड़ों एवं आईसीएमआर के शोधों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत भारतीय विटामिन डी की कमी के शिकार हैं, जिनमें बच्चे एवं बड़े दोनों ही शामिल हैं। गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में एक हफ्ते तक पतंगबाजी करके मकर संक्रांति को सेलिब्रेट करते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सूर्य की किरणों से विटामिन-डी लेने का सही समय होता है सर्दी का असर घटने लगता है और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस दौरान संक्रांति के तिल के लड्डु खाने का रिवाज है। 100 ग्राम तिल में करीब 975 मिग्रा कैल्शियम पाया जाता है जो विटामिन-डी के साथ अवशोषित होकर हड्डियों को मजबूत बनाता है। फिजिशियन और बाल राेग एवं एलर्जी विशेष डॉ अव्यक्त अग्रवाल कहते हैं, सूर्य से दूरी यानी बीमारी। भारत सहित कई संस्कृतियों में सूर्य को देवता कहा गया है।

मॉडर्न मेडिसिन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि सूरज के प्रकाश से बरसों तक खुद को दूर रखने वाले लोगों की मृत्यु जल्दी होती है। लोग आज घरों, कारों में दिन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजार देते हैं। सूर्य से सीधे सम्पर्क न हो पाने के कई कारण कई शारीरिक और मानसिक दिक्कतें बढ़ रही हैं। जानिए कैसे रोजाना कुछ समय धूप में बिताकर स्वस्थ रह सकते हैं


विटामिन-डी का निर्माण…

सूरज की किरणें त्वचा पर पड़ने से विटामिन डी कानिर्माण होता है।विटामिन डी कई शारीरिक प्रक्रियाओं के संचालन में बेहद आवश्यक हॉर्मोन है। यह बच्चों की हड्डियों व दांतों के विकास और उनकी मजबूती के अतिरिक्त वयस्कों में हड्डियों, जोड़ों के क्षरण से सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से एलर्जी, अवसाद, हाथ-पैर में दर्द, थकावट, भूलने की बीमारी, अनिद्रा, हार्ट अटैक, कैंसर इत्यादि का भी सम्बंध है।

मानसिक स्वास्थ्य : अवसाद और अनिद्रा दूर होती है

यूरोप इत्यादि में अवसाद के बहुत से मरीज़ होने का एक मुख्य कारण साल के कुछ महीनों तक सूरज की रोशनी का कम मिलना है। यह स्थिति तब है जबकि वहां नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक स्थिति भारत से कहीं बेहतर है। दरअसल, सूर्य की किरणें सेरोटोनिन एवं मेलाटोनिन नाम के दो महत्वपूर्ण रसायनों के स्राव में मददगार होती हैं। इन रसायनों की कमी से अवसाद एवं अनिद्रा की समस्या हो सकती है। अनिद्रा के मरीजों के तो उपचार का हिस्सा है सुबह के समय सूर्य की रोशनी में एक घंटा बिताना।

प्रतिरक्षा : धूप में बैक्टीरिया और वायरस खत्म होते हैं

सूर्य की रोशनी प्राकृतिक ऑटोक्लेव (कीटाणुनाशक प्रक्रिया) भी है। धूप के सम्पर्क में आकर न सिर्फ बहुत से हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस ख़त्म होते हैं, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफ़ा होता है। मेलाटोनिन हॉर्मोन त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से नुकसान से बचाता है। इसलिए धूप के अधिक सम्पर्क में रहने पर यह अधिक बनता है। साथ ही यह बॉडी की सर्काडियन रिम को नियंत्रित रख मीठी नींद, इम्युनिटी को बढ़ाता है।

स्वस्थ त्वचा: एक्जीमा औरस्किन कैंसर मेलानोमा का खतरा घटताहै

कुछ त्वचा रोग जैसे एक्जीमा, सोरायसिस में डर्मेटोलॉजिस्ट भी कुछ देर धूप में रहने की सलाह देते हैं। स्किन कैंसर मेलानोमा के होने की आशंका भी सूर्य की रोशनी से कम होती है। स्किन टीबी के मामलों में भी दवाओं के अतिरिक्त सूर्य किरणों से उपचार किया जाता रहा है।

बहरहाल, तेज धूप में देर तक बैठने या समुद्र किनारे तेज धूप में बैठने से त्वचा में सन बर्न के लक्षण उबर सकते हैं एवं लगातार तेज धूप में रहने से स्किन कैंसर की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में सनस्क्रीन के इस्तेमाल से दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। खासकर समुद्र किनारे जाने पर या समुद्री इलाकों में पर्यटन के समय ध्यान रखना अधिक आवश्यक है, क्योंकि पानी से परावर्तित होकर ये किरणें दोगुना प्रभाव डालती हैं।

दिमागी सेहत : अल्जाइमर्स जैसी बीमारी में फायदेमंद हल्की धूप

मल्टीप्लस्क्लेरोसिस एवं भूलने की बीमारी अल्जाइमर्स जैसे गंभीर मस्तिष्क रोगों के उपचार में भी सूर्य किरणों का लाभकारी प्रभाव पड़ता है।

आंखों का स्वास्थ्य : हल्की धूप फायदेमंद

इसके लिए भी सूर्य की रोशनी मददगार है, किंतु ध्यान रहे कि सूर्य की तरफ़ सीधे देखना आंखों के लिए नुक़सानदेह हो सकता है।

कैंसर से सुरक्षा : धूप कीकमी से कैंसर का खतरा

सूर्य की किरणें कई प्रकार के कैंसर जैसे हॉजकिंस लिम्फोमा, कोलोन कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर आदि से बचाव का एक माध्यम हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन के शोध के अनुसार लंबे समय तक विटामिन डी की कमी (यानी धूप से दूरी) कैंसर की आशंका बढ़ाती है।

मजबूत शरीर: हड्डियों व जोड़ों की बेहतरी

रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी जोड़ों के दर्द से सम्बंधित बीमारियों एवं दमा के दौरे भी सूर्य की रोशनी से कम होते हैं।

तनाव में कमी : खुशी से भर देती है धूप

जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी (2003) के अनुसार, सूर्य की किरणें हैप्पी हॉर्मोन एंडोर्फिन के स्राव में भी उत्प्रेरक होती हैं। यही वजह है कि बादलों वाले दिन लम्बे चलें तो मनोदशा ख़राब होने लगती है और लम्बी बदली के बाद धूप का खिलना हमें ख़ुशी से भर देता है।



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