नासा मंगल और चंद्रमा पर फफूंद से घर बनाना चाहता है, ताकि अंतरिक्ष यात्री वहां रह सकें

न्यूयॉर्क. नासा मंगल और चंद्रमा जैसे दूसरे ग्रहों पर ‘फ्यूचर होम’ बनाने की तकनीक पर काम कर रहा है। इसके वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर टेस्ट कामयाब रहे, तो फफूंद से घर बनाया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों की मिट्टी पर मसेलिया कवक विकसित करने की संभावना तलाश रहे हैं और कुछ हद कामयाबी भी मिली है।

दावा है कि फन्जाई (कवक) और जमीन के नीचे पाए जाने वाले थ्रेड्स जो फफूंद (मायसेलिया भी कहते हैं) को बनाते हैं, की मदद से दूसरे ग्रहों पर घर बनाने की तकनीक को विकसित किया जा सकता है। इस अध्ययन को माइको-आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट के तहत अंजाम दिया जा रहा है, जिसे नासा इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट (एनआईएसी) फंडिंग कर रही है।

इसे सही परिस्थिति में उगाया जा सकता है

  • नासा का कहना है कि ये छोटे थ्रेड्स (एक कवक का मायसेलिया हिस्सा) अत्यधिक परिशुद्धता के साथ जटिल संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जो मशरूम जैसी बड़ी संरचनाओं के रूप में उभरते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कवक की चारखासियत हैं। पहली- इनकी कांक्रीट से ज्यादा बेंड स्ट्रेंथ होती है। दूसरी- इन्हें उगाया और इनकी मरम्मत की जा सकती है। तीसरी- अच्छे इन्सुलेटर होते हैं। चौथी- अग्निरोधी भी होते हैं।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल या चंद्रमा पर पहुंचने के बाद फफूंद को सही परिस्थिति यानी पानी और प्रकाश संश्लेषक बैक्टीरिया में विकसित किया जा सकता है। जब फफूंद एक तय आकार में बढ़ जाएगी, उसे गर्माहट देकर मार दिया जाएगा। वैज्ञानिक ऐसे तरीकों पर भी काम कर रहे हैं, जिनसे अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण से बचाने के लिए फंगल मायसेलिया बिछाया जा सकता है और यहां तक ​​कि मशरूम आधार गुंबद के अंदर ऑक्सीजन भी प्रदान की जा सकती है। वैज्ञानिक ऐसे तरीकों पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें फंगल मायसेलिया की परत अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण से बचाने के साथ बिल्डिंग के अंदर ऑक्सीजन भी प्रदान करे।
  • इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे वैज्ञानिक लिन रॉथ्सचाइल्ड ने बताया कि दूसरे ग्रहों के लिए आवास डिजाइन अभी शुरुआती दौर में हैं। इन ग्रहों पर अपने यहां से बिल्डिंग मटैरियल ले जाने में काफी ऊर्जा लगेगी और लागत भी ज्यादा आएगी। इसलिए अगर यह प्रोजेक्ट कामयाब रहा तो दूसरे ग्रहों पर घर बनाने का सपना साकार हो पाएगा।
मायसेलिया फफूंद से बनी ईटें।

फफूंद से स्टूल और ईटें बनाई गईं
शोधकर्ताओं ने मायसेलिया फफूंद से ईंट और स्टूल बनाने में कामयाबी हासिल की है। माइको-आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट के तहत स्टेनफोर्ड और ब्राउन यूनिवर्सिटीज की टीम ने 2018 में मायसेलिया फंगस को हफ्ते विकसित कर एक स्टूल तैयार किया था। यह दिखने में ऐसा लगता है कि किसी ने इसे लंबे वक्त रेफ्रिरेजटर में रखकर भूल गया हो। इसके अलावा, मायसेलिया फफूंद में लकड़ी का भूरा मिलाकर ईटें बनाई थीं।

मायसेलिया फफूंद से बना स्टूल।


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NASA wants to build houses with mold on Mars and the Moon, so astronauts can stay there

भारतवंशी एमबीए छात्रा का शव कार से बरामद, 30 दिसंबर को जिम जाने के बाद से लापता थी

वॉशिंगटन.18 दिनसे लापता एक भारतीय-अमेरिकी छात्रा का शव उसकी कार की डिक्की में पाया गया। निजी डिटेक्टिव्सने सोमवार (13 जनवरी) को 34 साल की सुरील डबावाला का शव शिकागो के वेस्ट गारफील्ड पार्क से बरामद किया। शव को कंबल में लपेटकर कार में रखा गया था।सुरील शिकागो के लोयोला कॉलेज में एमबीए की छात्रा थी और 30 जनवरी से घर से लापता थी।

सुरील के पिता अशरफ डबावाला शौमबर्ग इलाके के जाने-माने डॉक्टर हैं और उनका परिवारमूल रूप से गुजरात कारहने वाला है। सुरील के लापता होने के बाद उसके परिवार ने सूचना देने वाले कोकरीब 70 लाख रु. काइनाम देने की घोषणा की थी। सुरील के पिता के मुताबिक, वह 30 जनवरी को अपने घर से जिम जाने के लिए निकली थी। उसी दिन सुरील को आखिरी बार कार ड्राइव करते हुए देखा गया था।

परिवार ने निजी डिटेक्टिव्स की सेवा ली

कई दिन की खोजबीन के बाद भी जब सुरील का पता नहीं चला, तोपरिवार ने निजी डिटेक्टिव हायर किए। इन्ही डिटेक्टिव्स नेपुलिस और सुरील के परिवार की मौजूदगी में जब कार को खोला गया, तो अंदर कंबल में लिपटा उसका शव पड़ा मिला।

पुलिस को टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने बताया कि ऑटोप्सीरिपोर्ट से सुरील की मौत के कारणों का पता नहीं चला सका है। शिकागो पुलिस अब टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसे आने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। आसपास रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के बीच डबावाला परिवार काफी लोकप्रिय हैं। लोगों के मुताबिक सुरील का परिवार काफी मिलनसार है और उसके पिता भी सामाजिक कार्यों में शामिल रहते हैं।



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सुरील के फेसबुक प्रोफाइल से ली गई उसकी तस्वीर।
सुरील डबावाला शिकागो के लोयोला कॉलेज में एमबीए की छात्रा थी।

कतर नेशनल बैंक विजय माल्या के 17 बेडरूम वाले बंगले को नीलाम करना चाहता है, कोर्ट में याचिका दाखिल

लंदन. कतर नेशनल बैंक ने कोर्ट से पूर्व शराब कारोबारीविजय माल्या की फ्रांसीसी द्वीप इले सैंट मारगुएराइट पर 1.3-हेक्टेयर की प्रॉपर्टी को नीलाम करने की इजाजत मांगी है। बैंक का कहना है कि माल्या का यह बंगला काफी समय से खाली पड़ा है। इस साल की शुरुआत में भारत में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) अदालत ने बैंकों को माल्या की जब्त संपत्तियां बेचने की मंजूरी दे दी थी। हालांकि, इस आदेश पर 18 जनवरी तक स्थगन रहेगा।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या के इस बंगले में सीनेमा, हेलिपैड, नाइटक्लब और 17 शानदार बेडरूम हैं। 2008 में कतर नेशनल बैंक की एक इकाई अंसबाशेर एंड को. से 27 मिलियन यूरो (करीब 210 करोड़ रुपए) का लोन लेकर माल्या ने अपनी कंपनी गिज्मो इन्वेस्ट एसए के जरिए ले ग्रांड जार्डिन खरीदा। बैंक ने बुधवार को लंदन के एक हाईकोर्ट में बताया कि गिज्मो ने अब तक लोन नहीं चुकाया है और अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।

माल्या के सुपरयाट पर भी कब्जा

बैंक लंदन की हाईकोर्ट से माल्या के 50 मीटर के सुपरयाट बेचने के लिए भी आदेश देने की मांग कर रहा है। सुपरयाट की कीमत करीब पांच मिलियन (39 करोड़ रुपए) है।सुपरयाट के चालकों का वेतन नहीं दिए जाने के बाद जनवरी 2018 में मैरीन इन्सुरेंस कंपनी स्कल्ड नेबोट कोजब्त कर लिया।

प्रोपर्टी में 87 करोड़ रु. की गिरावट आई

बैंक के वकील गिडॉन शिराजी ने कोर्ट में कहा कि सितंबर 2015 में जब माल्या बेरविज कंपनी डियाजियो पीएलसी से 100 मिलियन डॉलर (710 करोड़ रु.) और भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम से 1.2 बिलियन डॉलर (8,529 करोड़ रु.) के मुकदमे का सामना कर रहा था। तब फ्रांस की द्वीप पर स्थित माल्या का बंगला मरम्मत की हालत में था। वकील ने कहा कि इंटीरियर डिजाइनर और बिल्डर्स ने बंगले की मरम्मत नहीं की थी। माल्या के लोन की अवधी बढ़ाने के अनुरोध के बाद बैंक ने प्रोपर्टी की जांच करने का निर्देश दिया था। रियल स्टेट एजेंट ने पाया कि प्रोपर्टी की कीमत में 10 मिलियन यूरो (78 करोड़ रु.) की गिरावट आई है। जनवरी 2018 तक भी प्रोपर्टी का काम पूरा नहीं हो सका।

माल्या पर 10,000 करोड़ रुपए का कर्ज

किंगफिशर एयरलाइन के लोन मामले में माल्या पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। वहां की अदालत और सरकार भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे चुकी, लेकिन माल्या ने फैसले के खिलाफ अपील की थी। उसकी अपील पर फरवरी में सुनवाई होगी। बिजनेस न्यूज वेबसाइट ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों के वकील मार्सिया शेकरडेमियन ने कहा कि माल्या पर 10,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, उसने अभी तक कोई भुगतान नहीं किया।



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विजय माल्या पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। -फाइल फोटो

चीन की जीडीपी ग्रोथ 2019 में 6.1% रही, यह 29 साल में सबसे कम; 1.5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार प्रभावित

बीजिंग. चीन कीजीडीपी ग्रोथ 2019 में 6.1% रह गई।यह 29 साल में सबसे कम है। चीन की सरकार ने शुक्रवार को कहा- कमजोर घरेलू मांग और अमेरिका के साथ 18 महीने तक चले ट्रेड वॉर की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। 2019 में दुनिया की दूसरी सबसे अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर 1990 के बाद सबसे कम रही। अमेरिका के साथ ट्रेडवॉर और घटते निर्यात की वजह से 2018 में चीन की अर्थव्यवस्था 28 साल के निचले स्तर 6.6% पर पहुंची थी। इससे पहले 2017 में विकास दर 6.8% रही थी।

बुधवार को चीन और अमेरिका ने पिछले 18 महीने से जारी ट्रेड वॉर को थामने के लिए पहले चरण के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके एक दिन बाद (गुरुवार) चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (एनबीएस) ने कहा था कि पिछले डेढ़ साल में अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे के निर्यात पर 25% कर लगाया, जिससे दोनों देशों के बीच 1.5 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार पर असर पड़ा।

विकास दर सरकारी अनुमान के मुताबिक
एनबीएस ने कहा कि देश की जीडीपी ग्रोथ6.1% रही, यह सरकार द्वारा निर्धारित 6-6.5% के निर्धारित लक्ष्य के भीतर है। चीन की सरकार के लिए राहत की बात यह रही कि अर्थव्यवस्था का आकार 2018 में13.1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर, 2019 में 14.38 ट्रिलियन डॉलर हो गया।

राष्ट्रपति ने 6% से कम विकास दर को गंभीर कहा था
जीडीपी ग्रोथ मनोवैज्ञानिक तौर पर अहम समझे जाने वाले 6% के स्तरसे ऊपर है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि जीडीपी ग्रोथ 6% से नीचे नहीं जानीचाहिए, अन्यथा यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट हो सकता है।

समझौते के बावजूद चीनी सामान पर कर बरकरार
अमेरिका की तरफ से भारी कर लगा दिए जाने से चीनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा था। बुधवार को ट्रेड वॉर रोकने के लिए पहले चरण के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका दूसरे चरण का समझौता होने तक 360 बिलियन डॉलर मूल्य के चीनी उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ जारी रहेगा।

यह केवल अंतरिम समझौता: अर्थशास्त्री
अर्थशास्त्री और नैटिक्सिस की एशिया प्रशांत प्रभारी एलिसिया गार्सिया हेरेरो ने स्थानीय अखबार को बताया- दोनों देशों के बीच पहले चरण का समझौता अंतरिम है और दूसरे चरण के समझौते तक चीनी माल को टैरिफ की मार झेलनी पड़ेगी। इस द्विपक्षीय समझौते के विवाद निवारण चैप्टर में यह प्रावधान है कि अगर कोई एक पक्ष इससे संतुष्ट न हो, तो वह इसमें संशोधन कर सकता है या समझौता तोड़ भी सकता है।

2020 तक नागरिकों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य
एनबीएस के आंकड़ों के अनुसार, चीन की प्रति व्यक्ति डिस्पोजेबल आय 2019 में 30,733 युआन (4,461.95 अमेरिकी डॉलर) थी, जो पिछले साल से 5.8% ज्यादा थी। वहीं, चीन में प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च में 5.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2019 में यह 21,559 युआन तक पहुंच गया। मूल्य आधारित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ने 2019 में 5.7% की दर से प्रगति की, जो 2018 के 6.2% से कम रहा। वहीं, दिसंबर में फिक्स्ड-एसेट इनवेस्टमेंट (एफएआई) में 5.4% की बढ़त दर्ज हुई, जो साल के पहले 11 महीनों में से 0.2% ज्यादा रहा।चीन ने 2010 के मुकाबले 2020 तक अपने ग्रामीण और शहरी नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।



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चीन ने प्रति व्यक्ति आय 10 साल पहले के मुकाबले दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है।

यूएन ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% से घटाकर 5.7% किया; 7वीं एजेंसी ने प्रोजेक्शन कम किया

नई दिल्ली. यूनाइटेड नेशंस (संयुक्त राष्ट्र) ने 2019-20 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% से घटाकर 5.7% कर दिया है। यूएन ऐसी 7वीं संस्था है, जिसने भारत का ग्रोथ प्रोजेक्शन घटाया है। इससे पहले वर्ल्ड बैंक, आरबीआई, एसबीआई, एडीबी, मूडीज और नॉमूरा ने भी ग्रोथ प्रोजेक्शन कम किया था। हालांकि, यूएन का अनुमान सरकार और आरबीआई के 5% के अनुमान से 0.7% ज्यादा है। यूएन का प्रोजेक्शन ऐसे समय सामने आया है, जब चीन ने भी विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं। अमेरिका से ट्रेड वॉर की वजह से चीन की ग्रोथ 2019 में 6.1% रही। यह 30 साल में सबसे कम है। फिर भी भारत की अनुमानित ग्रोथ से 1.1% ज्यादा है।

जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की 3 वजह
1. ऑटो सेक्टर: इस सेक्टर में पिछले साल मंदी छाई रही। गाड़ियों की बिक्री में 19 साल की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की जीडीपी में ऑटो इंडस्ट्री का 7% और मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में 49% शेयर है।
2. आईआईपी: सितंबर में कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती जैसे बड़े कदम के बावजूद देश में औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती बनी हुई है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में लगातार गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में आईआईपी 4.3% घट गया। यह 8 साल में सबसे तेज गिरावट थी। अक्टूबर में 3.8% कमी आई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में सुधार की वजह से नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में 1.8% तेजी आई।
3. एनबीएफसी: अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की एक वजह नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) का नकदी संकट भी है।

इकोनॉमी के 3 अन्य इंडिकेटर: देश में महंगाई बढ़ रही, रोजगार घट रहे, लेकिन शेयर बाजार में उछाल
1. खुदरा महंगाई दर साढ़े पांच साल में सबसे ज्यादा
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 7.35% रही। यह जुलाई 2014 के बाद सबसे ज्यादा है। सब्जियों खासकर प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दिसंबर में महंगाई दर ज्यादा प्रभावित हुई। सब्जियां दिसंबर में 60.5% महंगी हुईं। दालों की कीमतों में 15.44% इजाफा हुआ।

2. बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा, इस साल 16 लाख रोजगार घटेंगे
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में यह आशंका जताई गई है। इसके मुताबिक 2018-19 में देश में 89.7 लाख रोजगार बढ़े, लेकिन 2019-20 में इस आंकड़े में 15.8 लाख की कमी आ सकती है। ईपीएफओ के आंकड़ों में 15,000 रुपए तक वेतन वाले काम शामिल होते हैं। आर्थिक मामलों पर रिसर्च करने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुताबिक, 13 जनवरी 2020 की स्थिति के अनुसार देश में बेरोजगारी दर 7.6% है। सरकार ने भी एनएसएसओ की रिपोर्ट में कहा था कि बेरोजगारी दर 2017-18 में 6.1% थी। यह 45 साल में सबसे ज्यादा है।

3. शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर
सेंसेक्स पहली बार 42,000 के ऊपर है। पिछले दिनों कुछ बड़ी गिरावटों के बावजूद सेंसेक्स बीते डेढ़ महीने में 1000 अंक के फायदे में रहा है। 27 नवंबर को 41000 पर था। विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में तेजी आ रही है। इस महीने विदेशी निवेशकों ने अब तक करीब 524 करोड़ रुपए का नेट इन्वेस्टमेंट किया है।



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India GDP Growth Rate 2020 | United Nation (UN) WESP On India India GDP Growth Rate, Indian Economy Latest News and Updates; India’s GDP growth from 7.6 Percent to 5.7 Percent

अमेरिकी अफसर ने कहा- ईरान में हमले के बाद 11 सैनिकों में दिमागी चोट के लक्षण सामने आए

बगदाद. इराक में 8 जनवरी को ईरान ने अमेरिकी सैन्य बेसों पर मिसाइल हमला किया था। इसमें 11 सैनिकों को सिर पर गंभीर चोटेंआई हैं। एक अधिकारी ने दावा किया है कि यह ब्रेन इंजरी हो सकती है। घायल जवानों को पिछले 24 से 36 घंटे में इराक के बाहर भेजा गया है। एक अधिकारी के मुताबिक, 8 सैनिक आगे जांच के लिए जर्मनी के लैंडस्टुलऔर 3 जवान कुवैत भेजे गए।

ईरान ने जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या लेने के लिए 8 जनवरी की सुबह इराक के अनबर प्रांत में स्थित ऐन अल-असद बेस और इरबिल में एक ग्रीन जोन (अमेरिकी सैन्य ठिकानों) पर 22 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थी। हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनका किसी सैनिक की जान नहीं गई। हालांकि, उन्होंने घायलों की संख्या का जिक्र नहीं किया था।अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन बिल अर्बन ने शुक्रवार कोकहा कि हमले के बाद 11 सैनिकों मेंकॉनकशन के लक्षण पाए गए। अभी भी उनकी जांच जारी है।

हमले के एक दिन बाद हुई सैनिकों को समस्या

सैनिकों में काॅनकशन के लक्षणहमले के एक दिन बाद मेडिकल जांच के बाद सामने आए। इनमें से 8 सैनिकोंको आगे की जांच के लिए जर्मनी और 3 को कुवैत भेजा गया है। हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर सबकुछ ठीक होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सैन्य उपकरणों से लैस सेना है।


क्या है कॉन्कशन के लक्षण?
कॉन्कशन का मतलब है सिर पर चोट। आम तौर पर इसका प्रभाव कम देरी के लिए होता है। इसमें सिर दर्द और कुछ देर के लिए यादाश्त जाने ,शरीर के संतुलन पर प्रभाव पड़ने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। सिर में या शरीर के ऊपरी हिस्से में चोट लगने के कारण इसके लक्षण सामने आते हैं। कई बार इंसान को इसके लक्षण आने-जाने का पता नहीं चलता।



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ईरान ने 8 जनवरी की सुबह  इराक के अनबर प्रांत में स्थित ऐन अल-असद बेस पर 22 मिसाइलें दागी थी।

आतंकरोधी कोर्ट ने 87 लोगों को 4785 साल की सजा सुनाई, आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का भी आदेश

इस्लामाबाद.पाकिस्तान के आतंकरोधीकोर्ट (एटीसी) ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान(टीएलपी) पार्टी पर बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने टीएलपी प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी के भाई और भतीजे समेत पार्टी के 87 कार्यकर्ताओं को कुल मिलाकर 4785साल की सजा सुनाई और 11 करोड़ 74 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। रावलपिंडी एटीसी कोर्ट के जज शौकत कमाल डार ने गुरुवार देर रात यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का भी निर्देश दिया।

पुलिस ने 18 नवम्बर 2018 को टीएलपी प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी, उनके भाई आमीर हुसैन रिजवी और भतीजे मोहम्मद अली समेत 87 अन्य धार्मिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। ये सभी अशांति फैलाने के आरोप में हिरासत में लिए गए थे।

सभी आरोपीपर 1लाख 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया

एटीसी कोर्ट ने सभी आरोपियों को 55 साल की सजा सुनाई। हर एक पर 1 लाख 35 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर इन सभी की सजा 146 साल बढ़ जाएगी। सजा सुनाते वक्त रावलपिंडी एटीसी कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस, एलिट फोर्ट और विशेष शाखा के अधिकारियों को तैनात किया गया था। कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने के बाद आरोपियों को तीन बसों में भरकर अटक जेल ले जाया गया।

टीएलपी ने नवम्बर 2018 में पाकिस्तान भर में प्रदर्शन किया था

टीएलपी ने नवम्बर 2018 में अन्य पार्टियों के साथ मिलकर पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में धरना दिया था। ये प्रदर्शन ईशनिंदा के झूठे आरोप में 8 साल जेल में काटने वाली इसाई महिला आसिया बीवी को रिहा करने करने के निर्णय के विरोध में हुए थे। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया था और रिक्शा, कार और ट्रकों में आग लगाई थी। सरकार और धार्मिक पार्टियों के बीच 4 बिंदुओं पर समझौता होने के बाद विरोध समाप्त हुआ था।



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तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पार्टी ने नवम्बर 2018 मे पूरे पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन किया था।

भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% से घटाकर 5.7% किया; फिर भी सरकारी अनुमान से 0.7% ज्यादा

नई दिल्ली. यूनाइटेड नेशंस (संयुक्त राष्ट्र) ने 2019-20 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% से घटाकर 5.7% कर दिया है। हालांकि, यह सरकार और आरबीआई के 5% के अनुमान से 0.7% ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र ने अगले वित्त वर्ष (2020-21) में 6.6% ग्रोथ की उम्मीद जताई है, पिछला अनुमान 7.4% का था। भारत समेत दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती की वजह से यूएन ने ग्रोथ अनुमान कम किया है। 2020 में चीन की ग्रोथ का अनुमान 6.1% से घटाकर 6% किया है। इस बीच चीन ने शुक्रवार को सालाना ग्रोथ के आंकड़े भी जारी कर दिए। अमेरिका से ट्रेड वॉर के असर की वजह से चीन की जीडीपी ग्रोथ 2019 में 6.1% रही, यह 30 साल में सबसे कम है। फिर भी भारत की अनुमानित सालाना ग्रोथ (5%) के मुकाबले 1.1% ज्यादा है।

जीडीपी ग्रोथ 11 साल में सबसे कम रहने का अनुमान

संस्था/एजेंसी पिछला अनुमान मौजूदा अनुमान
यूनाइटेड नेशंस 7.6% 5.7%
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) * 5%
आरबीआई 6.1% 5%
एसबीआई 6.1% 5%
वर्ल्ड बैंक 6% 5%
एशियन डेवलपमेंट बैंक 6.5% 5.1%
मूडीज 5.8% 5.6%
नॉमूरा 5.7% 4.9%

*सीएसओ ने अभी पहला अनुमान ही जारी किया है, दूसरा अनुमान फरवरी में आएगा।

  • ग्रोथ रेट 5% रहती है तो यह 11 साल में सबसे कम होगी, इससे कम 3.1% ग्रोथ 2008-09 में दर्ज की गई थी।
  • 2018-19 में देश की जीडीपी ग्रोथ 6.8% रही थी, यह 5 साल में सबसे कम।
  • जुलाई-सितंबर तिमाही में ग्रोथ सिर्फ 4.5% रही थी, यह 26 तिमाही में सबसे कम।

जीडीपी ग्रोथ में गिरावट क्यों?

  • ऑटो सेक्टर में पिछले साल मंदी छाई रही। वाहनों की बिक्री में 19 साल की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की जीडीपी में ऑटो इंडस्ट्री का 7% और मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में 49% शेयर है।
  • सितंबर में कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती जैसे बड़े कदम के बावजूद देश में औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती बनी हुई है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में लगातार गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में आईआईपी 4.3% घट गया। यह 8 साल में सबसे तेज गिरावट थी। अक्टूबर में 3.8% कमी आई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में सुधार की वजह से नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में 1.8% तेजी आई।
  • अर्थशास्त्रियों के मुताबिक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) का नकदी संकट भी जीडीपी ग्रोथ में गिरावट के लिए जिम्मेदार है।

खुदरा महंगाई दर साढ़े पांच साल में सबसे ज्यादा
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 7.35% रही। यह जुलाई 2014 के बाद सबसे ज्यादा है। सब्जियों खासकर प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दिसंबर में महंगाई दर ज्यादा प्रभावित हुई। सब्जियां दिसंबर में 60.5% महंगी हुईं। दालों की कीमतों में 15.44% इजाफा हुआ।

बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा, 2017-18 में 6.1% थी
जनवरी 2019 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों पीसी मोहनन और जीवी मीनाक्षी ने इस्तीफा दे दिया था। दोनों ने सरकार द्वारा बेरोजगारी रिपोर्ट जारी नहीं करने के विरोध में इस्तीफा दिया था। कुछ ही दिन बाद नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रोजगार से जुड़ी एक रिपोर्ट लीक हुई। इसमें बताया गया कि 2017-18 में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा 6.1% के स्तर पर पहुंच गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 5.3% और शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 7.8% रही। इनमें नौजवान बेरोजगार सबसे ज्यादा थे, जिनकी संख्या 13% से 27% थी। 2011-12 में बेरोजगारी दर 2.2% थी। 2016 की नोटबंदी के बाद रोजगार से जुड़ा यह पहला सर्वे था। हालांकि, तब नीति आयोग ने इन आंकड़ों को अपुष्ट बताया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत और नई सरकार बनने के बाद केंद्र ने मई ने बेरोजगारी के यही आंकड़े जारी किए थे।

पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इस साल 16 लाख रोजगार घटेंगे: एसबीआई
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में यह आशंका जताई गई है। इसके मुताबिक 2018-19 के मुकाबले इस साल, यानी 2019-20 में रोजगार के करीब 16 लाख अवसर घटने वाले हैं। अर्थव्यवस्था में लगातार आ रही गिरावट के कारण रोजगार प्रभावित हो रहे हैं।

शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर

सेंसेक्स पहली बार 42,000 के ऊपर है। पिछले दिनों कुछ बड़ी गिरावटों के बावजूद सेंसेक्स बीते डेढ़ महीने में 1000 अंक के फायदे में रहा है। 27 नवंबर को 41000 पर था। विश्लेषकों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में तेजी आ रही है। इस महीने विदेशी निवेशकों ने अब तक करीब 524 करोड़ रुपए का नेट इन्वेस्टमेंट किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर परअमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर थमने और घरेलू मोर्चे पर बजट में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद से निवेशक खरीदारी कर रहे हैं।



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India GDP Growth Rate 2020 | United Nation (UN) WESP On India India GDP Growth Rate, Indian Economy Latest News and Updates; India’s GDP growth from 7.6 Percent to 5.7 Percent

अमेरिकी सैन्य अधिकारी का दावा, मिसाइल दागने के बाद 11 सैनिकों में ब्रेन इंजरी के लक्षण सामने आए

बगदाद. ईराक में अमेरिकी सैन्य बेस पर 8 जनवरी को हुए मिसाइल हमले में 11 अमेरिकी सैनिकों में ब्रेन इंजरी के लक्षण सामने आए। अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टेन बिल अर्बन ने शुक्रवार कोकहा कि हमले के बाद सैनिकों मेंकॉनक्युसन सिम्पटम ( एक प्रकार की ब्रेन इंजरी) पाया गया। अभी भी उनकी जांच जारी है। हालांकि उन्होंने कहा कि हमले मेंकिसी की मौत नहीं हुई थी। इससे पहले अमेरिका ने हमले के बाद अपने सैनिकों के घायल होने या मारे जाने से इंकार किया था।

ईरान ने जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या लेने के लिए 8 जनवरी की सुबह इराक के अनबर प्रांत में स्थित ऐन अल-असद बेस और इरबिल में एक ग्रीन जोन (अमेरिकी सैन्य ठिकानों) पर 22 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थी।

हमले के एक दिन बाद हुई सैनिकों को समस्या

सैनिकों में काॅनक्युसन सिंपटमहमले के एक दिन बादसैनिकों की मेडिकल जांच के बाद सामने आए। इनमें से 8 सैनिकोंको आगे की जांच के लिए जर्मनी और 3 को कुवैत भेजा गया है। हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर सबकुछ ठीक होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सैन्य उपकरणों से लैस सेना है।


क्या है कॉनक्युसन सिम्पटम
कॉनक्युसन सिम्पटम एक तरह की ब्रेन इंजरी है। आम तौर पर इसका प्रभाव अस्थायी होता है। इसमें सिर दर्द और कुछ देर के लिए यादाश्त जाने ,शरीर के संतुलन पर प्रभाव पड़ने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। सिर में या शरीर के ऊपरी हिस्से में चोट लगने के कारण इसके लक्षण सामने आते हैं। कई बार यह लक्षण कब आते और जाते हैं इंसान को इसका पता भी नहीं चलता।



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ईरान ने 8 जनवरी की सुबह  इराक के अनबर प्रांत में स्थित ऐन अल-असद बेस पर 22 मिसाइलें दागी थी।

रूस बोला- कश्मीर भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा, हम कभी इसे संयुक्त राष्ट्र में उठाने के पक्ष में नहीं रहे

नई दिल्ली. रूस ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है। भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदाशेव ने शुक्रवार को कहा कि हम कभी कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाए जाने के पक्ष में नहीं रहे, क्योंकि यह असल रूप में भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। उन्हें शिमला और लाहौर समझौते के आधार पर इसका हल करना है।

चीन ने एक दिन पहले ही पाकिस्तान की तरफ से यूएन की बैठक में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी। हालांकि, ज्यादातर देशों ने इस पर असहमति जताते हुए कहा था कि यह दो देशों का द्विपक्षीय मसला है। इसलिए इस मंच पर कश्मीर की चर्चा नहीं होनी चाहिए।

कश्मीर को लेकर भारत पर पूरा भरोसा: रूसी राजदूत

कुदाशेव ने कश्मीर के हालात सुधारने के लिए भारत की तरफ से उठाए कदमों पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “मुझे कश्मीर जाने की कोई वजह समझ नहीं आती, क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। कश्मीर मामला भारत के संवैधानिक दायरे में आता है। इसलिए मेरे वहां जा कर स्थिति देखने की कोई जरूरत नहीं।

रूसी राजदूत ने पश्चिमी देशों पर तंज कसते हुए कहा, “जो भी लोग कश्मीर की स्थिति और वहां उठाए जा रहे भारत के कदमों को लेकर आशंकित हैं, वे जब चाहें तब कश्मीर जा कर स्थिति देख सकते हैं। कश्मीर मामले में हमें भारत पर कभी शक नहीं रहा।” कुदाशेव का यह बयान अमेरिका, यूरोप और अफ्रीकी देशों के राजनयिकों के 16 सदस्यीय डेलिगेशन के कश्मीर दौरे के बाद आया है। इन सभी देशों के नेता कश्मीर के हालात जानने पहुंचे थे।

2025 तक भारत को सारे एस-400 सिस्टम डिलीवर होंगे
रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने कहा है कि भारत को दी जाने वाली एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। सभी सिस्टम 2025 तक अलग-अलग चरणों में भारत को सौंप दिए जाएंगे। भारत ने दिसंबर 2018 में रूस से 5 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। इसमें से 80 करोड़ की पहली किश्त रूस को दी जा चुकी है।

भारत ने 5 अरब डॉलर में किया है एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का समझौता।


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मोदी सरकार ने 5 अगस्त को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था, इसके बाद से ही रूस इसे भारत का आंतरिक मामला बताता रहा है।

आतंक रोधि कोर्ट ने 87 लोगों को 4785 साल की सजा सुनाई, आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का आदेश

इस्लामाबाद.पाकिस्तान के आतंक रोधि कोर्ट (एटीसी) ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान(टीएलपी) पार्टी पर बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने टीएलपी प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी के भाई और भतीजे समेत पार्टी के 87 कार्यकर्ताओं को कुल मिलाकर 4738 साल की सजा और 11 करोड़ 74 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।रावलपिंडी एटीसी कोर्ट के जज शौकत कमाल डार ने गुरुवार देर रात यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का भी निर्देश दिया।

पुलिस ने 18 नवम्बर 2018 को टीएलपी प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी, उनके भाई आमीर हुसैन रिजवी और भतीजे मोहम्मद अली समेत 87 अन्य धार्मिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। ये सभी अशांति फैलाने के आरोप में हिरासत में लिए गए थे।

सभी आरोपीपर 1लाख 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया

एटीसी कोर्ट ने सभी आरोपियों को 55 साल की सजा सुनाई। हर एक पर 1 लाख 35 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर इन सभी की सजा 146 साल बढ़ जाएगी। सजा सुनाते वक्त रावलपिंडी एटीसी कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस, एलिट फोर्ट और विशेष शाखा के अधिकारियों को तैनात किया गया था। कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने के बाद आरोपियों को तीन बसों में भरकर अटोक जेल ले जाया गया।

टीएलपी ने नवम्बर 2018 में पाकिस्तान भर में प्रदर्शन किया था

टीएलपी ने नवम्बर 2018 में अन्य पार्टियों के साथ मिलकर पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में धरना दिया था। ये प्रदर्शन ईशनिंदा के झूठे आरोप में 8 साल जेल में काटने वाली इसाई महिला आसिया बीवी को रिहा करने करने के निर्णय के विरोध में हुए थे। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया था और रिक्शा, कॉर और ट्रकों में आग लगाई थी। सरकार और धार्मिक पार्टियों के बीच 4 बिंदुओं पर समझौता होने के बाद विरोध समाप्त हुआ था।



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तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पार्टी ने नवम्बर 2018 मे पूरे पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन किया था।

पॉकेटमारी के आरोप में दो भारतीय समेत 7 गिरफ्तार, पुलिस ने पकड़ने के लिए चलाया था ऑपरेशन गेलफोर्स

मेलबर्न.ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने दो भारतीय समेत 7 लोगों को पॉकेटमारी के आरोप में गिरफ्तार किया है। गुरुवार को पकड़े गए चार पुरुष और तीन महिलाओं वाले इस गिरोह के पांच सदस्य श्रीलंकाई नागरिक है। दो गिरफ्तार भारतीय नागरिकों में एक महिला है। यह पिछले दो महीने से मेलबर्न के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में ट्रेन, बस और ट्राम नेटवर्क से सफर करने वाले लोगों को निशाना बना रहे थे। कई मामले सामने आने के बाद पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन गेलफोर्स’ चलाया था।

विक्टोरिया पुलिस की प्रवक्ता मेलिसा सीच ने कहा गिरोह के सभी सदस्यों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। ऑस्ट्रेलियन बोर्डर पुलिस विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने पर विचार कर सकती है। इन सभी पर चोरी का मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने टीम बनाकर प्रमुख स्थानों पर नजर रखी

सार्जेंट क्रिस ओ ब्रीन ने कहा कि हमने शहर में हो रही चोरी और पॉकेटमारी की जांच की। आरोपी मौके के हिसाब से एक साथ मिलकर वारदातों को अंजाम दिया करते थे। विक्टोरिया पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। पुलिस ने कई टीमें बनाकर प्रमुख स्थानों पर नजर रखी और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की।

क्या है ऑपरेशन गेलफोर्स

सार्जेंट ब्रीन के मुताबिक, ऑपरेशन गेलफोर्स पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में हो रही पॉकेटमारी का पता लगाने के लिए दिसंबर 2019 में शुरू किया गया था। इसे ट्रांजिट सेफ्टी डिविजन और मेलबर्न टास्किंग यूनिट (एमटीयू) ने साथ मिलकर चलाया गया। 8 जनवरी को इसके तहत एल्बिओन इलाके के एक घर पर छापेमारी कर नकदी और चोरी के सामान बरामद किए गए थे। गुरुवार को सभी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हुआ। अब इन्हें14 अप्रैल को मेलबर्न मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने पेश होंगे।

आस्ट्रेलिया में जेब काटने की क्या सजा है:
आस्ट्रेलिया में जेब काटने पर चोरी का मामला दर्ज होता है। ऐसे मामलों में 10 साल तक की जेल का प्रावधान है। हालांकि 12 साल से कम उम्र के बच्चे या 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग के साथ यह अपराध करने पर सजा की अवधि 15 साल तक बढ़ाई जा सकती है। चोरी के माल की कीमत 50 लाख से कम होने पर ऐसे मामलों मे काउंटी कोर्ट या मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई होती है।



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पिछले दो महीने से मेलबर्न की ट्रेन, बस और ट्रामों में हो रही पॉकेटमारी करने वाला गिरोह गिरफ्तार।

प्रधानमंत्री मेदवेदेव के इस्तीफे के एक दिन बाद संसद ने पुतिन के खास मिखाइल मिशुस्तिन को नया पीएम चुना

मॉस्को. रूस की संसद ने मिखाइल वी. मिशुस्तिन को देश का नया प्रधानमंत्री चुना है। टैक्स विभाग के प्रमुख पद पर रह चुके मिशुस्तिन अब तक रूस की राजनीति में अनजाना चेहरा थे। हालांकि, बुधवार को राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनका नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था।

पुतिन ने बुधवार को ही रूस के संविधान में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया था कि देश में राजनीतिक ताकतों का बंटवारा ज्यादा बेहतर तरीके से किया जाएगा। यह शक्तियां राष्ट्रपति से लेकर संसद, राज्य परिषद और अन्य सरकारी संस्थानों को भी दी जाएंगी।

पुतिन संविधान में बदलाव का ऐलान करने के बाद प्रधानमंत्री मेदवेदेव से मिले थे।

गैर-राजनीतिक उम्मीदवार के पक्ष में एकतरफा वोटिंग हुई
मिशुत्सिन रूस की फेडरल टैक्स सर्विस के प्रमुख रह चुके हैं। उन्हें अर्थव्यवस्था मामलों में काफी अनुभवी माना जाता है। रूस की संसद डुमा में गुरुवार को मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री चुनने के लिए वोटिंग हुई। इसमें उनके पक्ष में 424 में से 383 वोट पड़े। कम्युनिस्ट पार्टी के 41 सांसद वोटिंग के दौरान गैरमौजूद रहे। पुतिन ने बाद में औपचारिक तौर पर मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।


पुतिन के ऐलान के बाद पुराने साथी मेदवेदव ने प्रधानमंत्री पद छोड़ा था
पुतिन के इस ऐलान के बाद उनके करीबी साथी दिमित्री मेदवेदेव और उनकी पूरी कैबिनेट ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। मेदवेदेव पुतिन के काफी भरोसेमंद साथी रहे हैं। 2008 में पुतिन को संवैधानिक वजहों से राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था (रूस में तब कोई व्यक्ति अधिकतम 2 बार राष्ट्रपति रह सकता था)। तब मेदवेदेव ने पुतिन के लिए प्रधानमंत्री पद छोड़ा और उन्हीं के कहने पर राष्ट्रपति बने। 2012 में मेदवेदेव सरकार ने कानून बदल कर राष्ट्रपति बनने की सीमा को खत्म कर दिया। इसी के साथ पुतिन राष्ट्रपति पद पर वापस लौटे थे।

मेदवेदेव 1990 में राजनीति में उतरे थे, तब उन्होंने पुतिन के साथ काफी करीब से काम किया।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
रूस की राजनीति की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि पुतिन 2024 में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने संविधान में कुछ अहम बदलाव का फैसला किया। अभी यह साफ नहीं है कि वो किस तरह के बदलाव करने वाले हैं। खास बात यह है कि मेदवेदेव के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद पुतिन ने उन्हें रूस सुरक्षा परिषद का डिप्टी चेयरमैन नियुक्त कर दिया। मेदवेदेव आने वाले समय में पुतिन के सलाहकार के तौर पर उनके साथ जुड़े रहेंगे।



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पुतिन ने संसद में वोटिंग के बाद औपचारिक तौर पर नए प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन से मिले।

जिस आग से 50 लाख एकड़ में फैला जंगल जल गया, वहां दमकलकर्मियों ने 20 करोड़ साल पुराने 200 पेड़ बचाए

सिडनी. ऑस्ट्रेलिया में आग से पर्यावरण और जैव विविधता को हुए भारी नुकसान के बीच एक अच्छी खबरहै। जहां आग से 50 लाख एकड़ में फैला जंगल जल गया, वहीं दमकलकर्मियों ने 200 विलुप्तप्राय पेड़ बचा लिए। वोलेमी पाइन प्रजाति वाले इन पेड़ों को स्थानीय लोग ‘डायनासौर ट्रीज’ के नाम से भी बुलाते हैं। माना जाता है कि येपेड़ 20 करोड़ साल पुराने हैं। आसपास की आग बुझाने के बाद दमकलकर्मी हेलिकॉप्टर से जंगलों के बीच इन पेड़ों तक भी पहुंचे।

न्यू साउथ वेल्स के पर्यावरण मंत्री मैट केन के मुताबिक, वोलेमी पाइन्स पेड़ दुनिया में केवल ब्लूमाउंटेन्स के जंगली इलाके में ही पाए जाते हैं। ऐसे केवल 200 पेड़ ही बचे हैं। इनकी वास्तविक लोकेशन क्या है, यह गोपनीय रखा गया है।

कुछ इस तरह चलाया गया पेड़ों को बचाने का ऑपरेशन

केन ने कहा कि आग लगते ही हम समझ गए थे कि इन्हें बचाने के लिए हमें एक ऑपरेशन करनाहोगा। आग लगातार इन पेड़ों के पास पहुंच रही थी।दमकलकर्मियों ने पहले वॉटर बॉम्बिंग जेट की मदद से पेड़ों के आसपास पानी और आग बुझाने वाले झाग का छिड़काव किया। आग कम होने पर दमकलकर्मी जंगल में उतरे। डायनासौर ट्रीज के पास जेनरेटर से चलने वालीएक सिंचाई प्रणाली लगाई गई, जिससे पेड़ों पर गर्मी का प्रभाव न हो।

26 साल पहले इन पेड़ों के बचे होने की बात सामने आई

केन के मुताबिक, पहले वोलेमी पाइन पेड़ों को विलुप्त समझ लिया गया था। 1994 में न्यू साउथ वेल्सनेशनल पार्क के रेंजर डेविड नोबल ने इन्हें ढूंढा और इनके बचे होने की बात सामने आई। इससे पहले तक इस पेड़ के सिर्फ जीवाश्म ही देखे गए। वोलेमीपाइन को जंगल में अवैध ढंग से जाने वाले लोगों और पेड़ों को होने वाली बीमारी से खतरा है। पहली बार इन्हें जंगल की आग से बचाने के लिए अभियान चलाया गया है, जो भविष्य में ऐसी स्थिति आने पर हमारे लिए मददगार होगा।



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तस्वीर में डायनासोर काल के पेड़ गलियारे में दिख रहे हैं। 2 महीने चले अभियान से ही हरियाली बच सकी।
डायनासौर ट्रीज के नाम से मशहूर ये पेड़ 20 करोड़ साल पुराने हैं।

भारत के सबसे ताकतवर संचार उपग्रह जीसैट-30 का प्रक्षेपण सफल; अब जहां नेटवर्क नहीं, वहां भी मिलेगा सिग्नल

पेरिस. इसरो का संचार उपग्रह जीसैट-30 सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित हो गया है। इसे शुक्रवार तड़के 2:35 बजे फ्रेंच गुआना के कौरू स्थित स्पेस सेंटर यूरोपियन रॉकेट एरियन 5-वीटी 252 से लॉन्च किया गया। लॉन्च के करीब 38 मिनट 25 सेकंड बाद सैटेलाइट कक्षा में स्थापित हो गया। 3357 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट देश की संचार प्रौद्योगिकी में बदलाव लाएगा। इसरो के मुताबिक, 3357 किलो वजनी सैटेलाइट 15 साल तक काम करेगा।

इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक पी कुन्हीकृष्णन ने इस मौके पर कहा, “2020 की शुरुआत एक शानदार लॉन्च के साथ हुई है। इसरो ने 2020 का मिशन कैलेंडर जीसैट-30 के सफल प्रक्षेपण के साथ किया है। खास बात यह है कि इसे जिस एरियन 5 रॉकेट से लॉन्च किया गया, उसका पहली बार 2019 में इस्तेमाल किया गया, तब भी रॉकेट का इस्तेमाल भारतीय सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए हुआ।

इंटरनेट स्पीड तेज होगी, डीटीएच सेवाओं में सुधार होगा

इसके लॉन्च होने के बाद देश की संचार व्यवस्था और मजबूत हो जाएगी। इससे इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी। साथ ही देश में जहां नेटवर्क नहीं है, वहां मोबाइल नेटवर्क का विस्तार हाेगा। इसके अलावा डीटीएच सेवाओं में भी सुधार होगा।यह एक दूरसंचार उपग्रह है, जो इनसैट सैटेलाइट की जगह काम करेगा। इसमें दो सोलर पैनल और बैटरी लगी है, जिससे इसे ऊर्जा मिलेगी।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
पुराने संचार उपग्रह इनसैट सैटेलाइट की उम्र पूरी हो रही है। देश में इंटरनेट की नई तकनीक आ रही है। 5जी पर काम चल रहा है। ऐसे में ज्यादा ताकतवर सैटेलाइट की जरूरत थी। जीसैट-30 उपग्रह इन्हीं जरूरतों को पूरा करेगा।



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फ्रेंच गुआना के कौरू स्थित स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया जीसैट-30।

मोदी की योजनाओं का आलोचक रहा है वॉशिंगटन पोस्ट, दूसरी बार सत्ता में आने पर कहा था- वे कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं

वॉशिंगटन. भारत दौरे पर आए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं मिल पाएं।मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी वजह यह बताई जा रही है कि बेजोस का अखबार वॉशिंगटन पोस्ट कई मौकों पर मोदी और उनकी सरकार कीआलोचना करता रहा है। जब मोदी दूसरी बार भारी बहुमत से सत्ता में आए थे, तब भी अखबार ने दावा किया था कि वे अब अपने कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं।

अमेरिकी अखबार में पिछले साल 23 मई को रिपोर्ट आई थी कि मोदी को दूसरी बार भारी बहुमत मिला। उन्हें वोट करने वाले मतदाताओं में कट्‌टर हिंदुओं की संख्या ज्यादा थी। इसलिए वे पॉपुलिज्म की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। उनकी नीतियों में भी हिंदुत्व की झलक देखने को मिल सकती है। मोदी ने अपने पिछले कार्यकाल में हर साल एक करोड़ रोजगार देने का वादा किया, लेकिन असलीयत इसके बिल्कुल उलटी है। 45 सालों में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा बढ़ी। यह भी आरोप लगाया गया था कि उनके पिछले कार्यकाल में विकास दर सुस्त पड़ गई।

‘गैर-उदारवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाया’
अखबार के मुताबिक, मोदी ने गैर-उदारवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री रहते हुए मोदी ने औपचारिक तौर पर एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं किया। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह लगा कि उन्होंने अपनी आलोचना करने वाले पत्रकारों पर हमेशा दबाव बनाए रखा। उन्होंने और उनकी पार्टी ने देश के 18 करोड़ मुसलमानों की चिंता नहीं की। राम मंदिर का निर्माण हमेशा से उनकी पार्टी के एजेंडे में रहा। अखबार ने यह भी लिखा कि उनके दूसरे कार्यकाल में उनकी पार्टी में एक ऐसी सांसद (साध्वी प्रज्ञा) चुनी गईं, जिस पर आतंकी घटना को अंजाम देने का आरोप है। घटना में कई बेगुनाह मुसलमान मारे गए थे।

‘धर्मनिरपेक्ष देश को हिंदू राष्ट्र में बदलने का प्रयास कर रहे’

नागरिकता कानून को लेकर भी अखबार ने मोदी की आलोचना की थी। वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा था कि भारत ने मुस्लिम शरणार्थियों को अलग रखते हुए विवादित नागरिकता बिल को पारित कर दिया है। मोदी ने इस कानून से भारत के मुसलमानों को सावधान किया है। भारत के 130 करोड़ वाली जनसंख्या में करीब 18 करोड़ मुसलमान हैं। उन्हें डर है कि मोदी धर्मनिरपेक्ष भारत को एक हिंदू राष्ट्र में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। देश में अब मुसलमानों को द्वितीय श्रेणी का माना जाएगा।

अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर अखबार ने इसे असंवैधानिक बताया था

जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया। 6 अगस्त को वॉशिंगटन पोस्ट ने साउथ एशियन हिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर कंजवाल की एक लेख प्रकाशित की। लेख के मुताबिक, मोदी सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक बताया गया था। इस असंवैधानिक फैसले की वजह से जम्मू-कश्मीर में कोलोनियल प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। क्योंकि अब दूसरे राज्य के लोग कश्मीर में जमीन खरीद सकेंगे और स्थानीय लोगों को वहां से हटा सकेंगे। वहां पहले से ही करीब पांच लाख भारतीय सैनिक तैनात हैं। मोदी सरकार वहां अपने लॉन्ग टर्म प्लान लागू करने की योजना बना रही है। मोदी सरकार वहां भारी संख्या में हिंदुओं की आबादी बढ़ाना चाहती है। सरकार की मंशा वहां की मुस्लिम जनसंख्या को कम करने और हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने की है।



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Narendra Modi-Jeff Bezos Meet: Narendra Modi, Amazon CEO Jeff Bezos Latest News Updates On Washington Post Against Modi Government Moves

मोदी अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस से नहीं मिलेंगे; बेजोस के अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने सरकार की नीतियों की निंदा की थी

नई दिल्ली. दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और अमेजन के फाउंडर-सीईओ जेफ बेजोस के भारत दौरे का आज आखिरी दिन है। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेजोस से नहीं मिलेंगे। इसके पीछे दो वजह हो सकती हैं। एक वजह यह कि कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) अमेजन के खिलाफ जांच कर रहा है। दूसरी और अहम वजह यह कि बेजोस के अखबार वॉशिंगटन पोस्ट का रुख मोदी सरकार के प्रति आलोचनात्मक रहा है।

वॉशिंगटन पोस्ट ने मोदी को ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड मिलने की निंदा की थी

बेजोस ने मोदी से मिलने का वक्त मांगा था। बेजोस ने बुधवार को भारत की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उन्होंने 7,100 करोड़ रुपए के नए निवेश और 71 हजार करोड़ रुपए के मेक इन इंडिया प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करने का ऐलान भी किया। लेकिन, प्रधानमंत्री से मीटिंग फिक्स होने के संकेत नहीं मिले। बेजोस का अखबार वॉशिंगटन पोस्ट अब तक मोदी सरकार की कई नीतियों की निंदा कर चुका है। धारा 370 हटाने के फैसले के बाद अखबार ने खबरों और विचारों पर आधारित आर्टिकल की सीरीज प्रकाशित की थी। इनमें मोदी को बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड मिलने की भी निंदा की गई थी।

सीएए पर भी आलोचनात्मक लेख प्रकाशित किया था

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन पोस्ट ने हाल ही में भारतीय पत्रकारों- बरखा दत्त और राणा अय्यूब के विचारों को भी प्रकाशित किया था। अखबार ने 13 दिसंबर को एक आर्टिकल प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था- भारत का नया कानून लाखों मुस्लिमों की नागरिकता छीन सकता है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के संदर्भ में छपे इस लेख पर सरकार से जुड़े कई लोगों ने कहा था कि यह भ्रम फैलाने वाला है और गलत मंशा से प्रकाशित किया गया।

भाजपा नेता ने कहा- दुनिया को शर्तें माननी पड़ेंगी

बेजोस दौरे के आखिरी दिन आज मुंबई में कारोबारी जगत के लोगों से मिल सकते हैं। शाम को बॉलीवुड के इवेंट में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में मोदी से मुलाकात होने की गुंजाइश भी नहीं दिख रही। न्यूज एजेंसी ने बताया कि भाजपा के एक महासचिव सेमोदी के बेजोस से नहीं मिलने की वजह पूछी गई तो वे टाल गए। लेकिन, कहा कि दूसरे कार्यकाल में सरकार का रुख पहले कार्यकाल जैसा नहीं है, दुनिया को शर्तें माननी पड़ेंगी।



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जेफ बेजोस (बाएं) और नरेंद्र मोदी।

स्पीकर पेलोसी ने सीनेट को ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग के दस्तावेज सौंपे, इस पर साइन करने के लिए सांसदों को पेन बांटे

वॉशिंगटन. अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने गुरुवार को सीनेट को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग के दो दस्तावेज सौंप दिए। उन्होंने इन दस्तावेजों पर कई पेनों से खुद साइन करने के बाद वहां मौजूद सांसदों को पेन बांटे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह देश के लिए दुखद है कि राष्ट्रपति ने अपने पद की गोपनीयता का उल्लंघन किया और राष्ट्रीय सुरक्षा को नजरअंदाज कर चुनावी प्रक्रिया को खतरे में डाला।

दस्तावेज सौंपने के बाद महाभियोग की सुनवाई के लिए चुने गए हाउस मैनेजर ने सीनेट के चेम्बर में सभी सदस्यों को ट्रम्प पर लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया। पहले दस्तावेज में ट्रम्प पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप है। दूसरे प्रस्ताव में उनके खिलाफ महाभियोग सुनवाई के दौरान संसद के काम में अड़चन डालने का आरोप लगाया गया है।

सीनेट जाएंगे चीफ जस्टिस
सीनेट के नेता मिच मैक्कॉनेल ने सभी सदस्यों को आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स शपथ लेने पहुंचेंगे और चीफ जस्टिस सभी सांसदों की ओर से शपथ लेंगे। अमेरिका के इतिहास में ऐसा महज तीसरी बार होगा जब सीनेट को कोर्ट में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि महाभियोग की सुनवाई मंगलवार तक शुरू होगी। इसके बाद व्हाइट हाउस को सुनवाई लंबित होने की जानकारी दी जाएगी और सीनेट राष्ट्रपति को लंबित आरोपों पर जवाब देने या अपना वकील भेजने के लिए राष्ट्रपति को सम्मन भेजेगा।

दिसंबर 2019 को सदन में प्रस्ताव पास हुए थे
पेलोसी ने पहली बार सितंबर 2019 में ट्रम्प पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया था। 19 दिसंबर 2019 को उनके खिलाफ महाभियोग के लिए सदन में दो प्रस्ताव पेश किए गए थे।प्रस्तावों पर वोटिंग के दौरान डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प के खिलाफ और रिपब्लिकन ने ट्रम्प के पक्ष में वोटिंग की। दोनों प्रस्ताव के पक्ष में 230 और विपक्ष में 197 वोट पड़े थे।उन्होंने दो डेमोक्रेट्स और अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला था। निजी और सियासी फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 2020 राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए अपने पक्ष में यूक्रेन से विदेशी मदद मांगी थी।

अमेरिका में राष्ट्रपति के खिलाफ अभियोग के मामले:

  • 1868 मेंअमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयूजॉनसन के खिलाफ अपराध और दुराचार के आरोपों पर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग प्रस्ताव पास हुआ। उनके खिलाफ संसद में आरोपों के 11 आर्टिकल्स पेश किए गए। हालांकि, सीनेट में वोटिंग के दौरान जॉनसन के पक्ष में वोटिंग हुई और वे राष्ट्रपति पद से हटने से बच गए।
  • 1998 मेंबिल क्लिंटन के खिलाफ भी महाभियोग लाया गया था। उन पर व्हाइट हाउस में इंटर्न रही मोनिका लेवेंस्की ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्हें पद से हटाने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन सीनेट में बहुमत नहीं मिल पाया।
  • वॉटरगेट स्कैंडल में पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (1969-74) के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई होने वाली थी, लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया। उन पर अपने एक विरोधी की जासूसी का आरोप लगा था।


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ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू करवाने में स्पीकर नैंसी पेलोसी की भूमिक अहम।

कश्मीर पर चीन-पाकिस्तान को फिर नाकामी मिली, भारत बोला- अच्छे रिश्तों के लिए सही मुद्दे उठाएं

न्यूयॉर्क. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को बुधवार को एक बार फिर नाकामी हाथ लगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन-पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर समर्थन जुटाने में असफल रहे। भारत ने कहा कि हमारे साथ संबंध बेहतर करने के लिए पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह सही मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। यूएनएससी के कई सदस्यों ने कहा कि कश्मीर, भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है। लिहाजा, इसे दोनों देशों के बीच बातचीत से ही हल होना चाहिए।

बुधवार को चीन के दबाव में कश्मीर पर यूएनएससी की बैठक बुलाई गई। इस ‘क्लोज्ड डोर मीटिंग’ में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के अलावा किसी को शामिल नहीं किया जाएगा।

‘एक बार फिर उनकी हार हुई’
यूएन में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘हमने एक बार फिर देखा कि एक सदस्य देश की कोशिशों की हार हुई। ये हमारे लिए खुशी की बात है कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा कश्मीर में खतरे की स्थिति को नकार दिया गया। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर लगातार आधारहीन आरोप लगाता रहा है। कई देशों का कहना है कि कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से ही हल किया जाना चाहिए।’’

पिछली बैठक में पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सहयोगी चीन ने इस बैठक के लिए दबाव बनाया। अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद भी चीन ने इस मुद्दे पर यूएनएससी की बैठक बुलाई थी। हालांकि, तब चीन और पाकिस्तान को इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ, क्योंकि सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा करार देते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद दिसंबर में भी चीन ने कश्मीर पर चर्चा कराने के लिए बैठक का आग्रह किया था, लेकिन तब बैठक नहीं हुई।

चीन के अलावा सभी सदस्य भारत के साथ
यूएनएससी में 5 स्थायी सदस्य देश हैं, जबकि 10 निर्वाचित सदस्यों का निश्चित कार्यकाल होता है। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन इसके स्थायी सदस्य हैं। चीन के अलावा बाकी 4 सदस्य देश कश्मीर मुद्दे पर दखल देने से इनकार करते रहे हैं। भारत सरकार के रुख का समर्थन करते हुए इन देशों ने सभी विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने को कहा है।



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यूएन में चीन के अलावा बाकी 4 स्थायी सदस्य देश कश्मीर मुद्दे पर दखल देने से इनकार करते रहे हैं। -फाइल फोटो

चुनाव जीतने के 5 दिन बाद राष्ट्रपति साई की चीन को चेतावनी- हम आजाद मुल्क, हमला किया तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

ताइपे. ताइवान की राष्ट्रपति साईइंग-विन ने बुधवार को चेतावनी दी है कि अगर चीन उन पर हमला करता है,तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। साई ने 5 दिन पहले ही आम चुनाव में 80 लाख वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की है। उन्होंने चीन समर्थित प्रत्याशी को 38% के अंतर से चुनाव हराया था। ताइवान को चीन से अलग राष्ट्र बताते हुए साई ने कहा किताइवान पहले से ही आजाद देश है। इसे ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के नाम से जाना जाता है और हमेंअपनी आजादी का ऐलान करने की जरूरत नहीं।

साई ने क्यों दिया बयान?

साईके राष्ट्रपति बनने के बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि अगर ताइवान आजादी की घोषणा करता है तो चीन उसपर जबर्दस्ती कब्जा कर लेगा। इस पर साईने कहा किएक आजाद देश होने के नाते हम चीन से सम्मान की उम्मीद करते हैं। मॉडर्न ताइवान पिछले 70 साल से मेनलैंड चीन से अलग है और स्वतंत्र तौर पर काम कर रहा है। ताइवान अपनी आजादी परकिसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा।

‘उम्मीद करती हूं कि चीन हमारे जनादेश का सम्मान करेगा’

चीन की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि ताइवान के लोगों के विचारों का चीन सम्मान करेगा। राष्ट्रपति चुनाव में दिए गए लोगों के जनादेश को गहराई से समझेगा। चीन इस पर गौर करते हुए अपनी कुछ मौजूदा नीतियों में भी बदलाव करेगा। उन्होंने कहा कि मुझ पर आजादी से जुड़े मुद्दों को मजबूती से रखने का दबाव है।

ताइवान मेनलैंड चीन का हिस्सा होने में विश्वास नहीं करता: साई

साई ने कहा कि 1949 में चीन के नागरिक युद्ध में कम्युनिस्ट से हार के बाद ताइवान दशकों तक नेशनलिस्ट चियांग काई-शेक की तनाशाही में रहा। 1980 के बाद यह एशिया के सबसे प्रगतिशील लोकतंत्र के तौर पर उभरा है। हालांकि, इसे दुनिया के काफी कम देशों से मान्यता मिली है लेकिन इस चुनाव का परिणाम बताता है कि ताइवान के लोग मेनलैंड चीन का हिस्सा होने की थ्योरी में विश्वास नहीं रखते।



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ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने अपने देश को चीन का हिस्सा मानने से इंकार किया।