10वें दौर की बैठक के बाद भारत-चीन का साझा बयान, पहले चरण का डिसएंगेजमेंट दूसरे इलाकों में विवाद खत्म करने का अच्छा आधार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और चीन के रक्षा मंत्रालयों ने कोर कमांडर स्तर की 10वें दौर की बैठक को लेकर साझा-बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि पैंगोंग-त्सो इलाके में पहले चरण का डिसइंगेजमेंट, एलएसी के दूसरे इलाकों में विवाद खत्म करने का एक अच्छा आधार है। बता दें कि  20 फरवरी (शनिवार) को कोर कमांडर स्तर की 10वें दौर की बैठक चीन के मोल्डो (चुशूल) बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर आयोजित की गई थी। ये बैठक करीब 16 घंटों तक चली।

शनिवार को हुई वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया जो लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं। वहीं, चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लिउ लिन कर रहे थे जो चीनी सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर हैं। यह बातचीत दोनों सेनाओं के पैंगांग सो (झील) के उत्तरी व दक्षिणी किनारों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सैनिकों व हथियारों की वापसी के पूरा होने के दो दिन बाद हुई। माना जा रहा है कि भारत ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये हॉट स्प्रिंग्स,गोगरा और देप्सांग जैसे इलाकों से वापसी प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

पहले चरण में पैंगोंग-त्सो लेक के उत्तर और दक्षिण में डिसइंगेजमेंट पूरा हो चुका है। चीनी सेना ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरी इलाका खाली कर दिया है और अब सिरिजैप पोस्ट पर चली गई है। एलएसी के सबसे विवादित इलाके, फिंगर एरिया से चीनी सेना ने अपने सैनिकों और बंकर्स के साथ साथ मिसाइल बेस और तोपखाने को भी हटा लिया है। भारतीय सेना भी फिंगर 4 से फिंगर 3 पर अपनी स्थायी चौकी, थनसिंह थापा पोस्ट पर चली गई है। 

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India, China affirm completion of disengagement of troops, will keep up talks
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